आज कल भारत में जॉब अवसर कम होने पर व्यक्ति विदेश जाकर जॉब पाने की सोचता है वो यूरोप के देशों में अपने किसी मित्र या दूर के रिश्तेदार के सेटल्ड होने के बारे में सोचता है यूरोप में जॉब पाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा यदि आप किसी व्यावसायिकों डिग्री और अनुभव को रखते है जैसे आज आई टी प्रोफेसनल की भारी मांग है इसी तरह अन्य जॉब में नर्सिंग करियर डॉक्टरों और विभिन्न साइंसेस में पी एच डी के लोग विदेशों में जॉब पाने की उत्सुक रहते है। यूरोप की तरह ऑस्ट्रेलिया एक डेस्टिनेशन है जहां भारत के युवा सेटल्ड होना चाहते हैं ,बेशकत ऑस्ट्रेलिया को आज के यूथ यूरोप के बाद महत्व देते हैं ,क्योंकि ऑस्ट्रेलिया साउथ पोलर के ज्यादा पास होने से इसके दूर होने का आभास होता है बनिस्बत यूरोप अमेरिका कनाडा के,आज हम यहां पर चर्चा करेंगे कि ऑस्ट्रेलिया की धरती में कैसे पैर जमाया जाएं।
ऑस्ट्रेलिया एक अद्भुत देश है और अपने अवसरों व जीवन के बेहतर नजरिए के लिए भारतीयों के बीच काफी लोकप्रिय है। भारत से ऑस्ट्रेलिया में नौकरी पाने और वहां काम करने व रहने के लिए हजारों आवेदक 'कंगारुओं की भूमि' (लैंड ऑफ कंगारूज) का रुख करते हैं। यदि आप भी ऑस्ट्रेलिया जाना चाहते हैं और वहां के कामकाजी घंटों, उच्च गुणवत्ता वाले जीवन और हाई-पायिंग (अधिक वेतन वाली) नौकरियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो आपको ऑस्ट्रेलिया वर्क वीजा के लिए आवेदन करना होगा।
हालांकि, आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है - ऑस्ट्रेलिया में नौकरी पाने की इस प्रक्रिया में आपका मार्गदर्शन करने के लिए हम यहाँ मौजूद हैं।
प्रसंग और संदर्भ: भारतीय ड्रीम और ऑस्ट्रेलिया
हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया (Australia) भारतीय छात्रों, कामगारों और पेशेवरों के लिए सबसे पसंदीदा देश बनकर उभरा है। बेहतर जीवनशैली, उच्च वेतन, और स्थायी निवास (PR) की सुगम नीतियां इसका मुख्य कारण हैं। हर साल भारत से लगभग 30,000 से 40,000 लोग स्थायी या अस्थायी वीज़ा पर ऑस्ट्रेलिया जाते हैं। भारतीय लोग मुख्य रूप से मेलबर्न (Melbourne), सिडनी (Sydney), ब्रिसबेन (Brisbane), और एडिलेड (Adelaide) जैसे शहरों को चुनते हैं, जहाँ पहले से ही एक मजबूत और सहायक भारतीय कम्युनिटी मौजूद है।
10 प्रमुख करियर विकल्प, योग्यता और प्रवेश परीक्षाएं
ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश करने और पीआर (PR) पाने के लिए स्किल्ड ऑक्यूपेशन लिस्ट (Skilled Occupation List) के तहत आना जरूरी है। नीचे ऐसे ही 10 क्षेत्रों का विवरण दिया गया है:
1. स्कूल शिक्षक (School Teacher)
- भारतीय योग्यता: ग्रेजुएशन + बी.एड. (B.Ed.) या 4 साल का इंटीग्रेटेड बी.एड.।
- ऑस्ट्रेलियाई मान्यता: भारत की बी.एड. डिग्री वहां सीधे काम नहीं करती। वहां शिक्षक बनने के लिए AITSL (Australian Institute for Teaching and School Leadership) से स्किल्स असेसमेंट कराना होता है। इसके लिए आपके पास कुल 4 साल की हायर एजुकेशन (ग्रेजुएशन + बी.एड. मिलाकर) होनी चाहिए, जिसमें न्यूनतम 45 दिनों की 'सुपरवाइज्ड टीचिंग प्रैक्टिस' (इंटरर्नशिप) अनिवार्य है।
- अनिवार्य परीक्षा: IELTS Academic परीक्षा देना जरूरी है, जिसमें लिसनिंग और स्पीकिंग में 8.0 बैंड और रीडिंग और राइटिंग में 7.0 बैंड होने चाहिए।
2. अकाउंटेंट (Accountant)
- भारतीय योग्यता: B.Com / M.Com / MBA (Finance) या भारतीय CA।
- भारतीय CA की मान्यता: यदि आप भारत में क्वालिफाइड CA (ICAI के सदस्य) हैं, तो CA ANZ (Chartered Accountants Australia & New Zealand) के साथ उनके पारस्परिक समझौते (MOU) के तहत आप वहां सीधे मान्यता पा सकते हैं। इसके लिए आपको वहां रहकर उनका International Pathway Program (IPP) पास करना होता है।
- अनिवार्य परीक्षा: CA ANZ या CPA ऑस्ट्रेलिया से स्किल्स असेसमेंट और PTE/IELTS में न्यूनतम 7.0 बैंड (या समकक्ष)।
3. नर्स और हेल्थकेयर वर्कर (Nursing)
- भारतीय योग्यता: GNM डिप्लोमा या B.Sc. Nursing।
- क्या इंग्लिश बोलना जरूरी है? हाँ, शत-प्रतिशत अनिवार्य है। बिना इंग्लिश टेस्ट (IELTS में 7.0 ईच या OET में B ग्रेड) के नर्सिंग रजिस्ट्रेशन (NMBA) और वीज़ा मिलना असंभव है। इसलिए भारत में ही सबसे पहले इंग्लिश स्पीकिंग और टेस्ट की तैयारी करनी चाहिए।
4. इलेक्ट्रिशियन (IT/Trade - Electrician)
- भारतीय योग्यता: ITI (Electrician Trade) या पॉलिटेक्निक डिप्लोमा।
- मांग और एडजस्टमेंट: ऑस्ट्रेलिया में लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रिशियन की भारी मांग है। भारत से जाने वाले बंदे को वहां TRA (Trades Recognition Australia) से असेसमेंट कराना होता है और शुरुआती दौर में किसी स्थानीय लाइसेंसधारी के तहत 'असिस्टेंट' या 'अप्रेंटिस' के रूप में काम करते हुए अपना ऑस्ट्रेलियन इलेक्ट्रिकल लाइसेंस लेना होता है।
5. मैकेनिकल/सिविल इंजीनियर (Engineering)
- भारतीय योग्यता: B.Tech / BE या संबंधित ट्रेड में पॉलिटेक्निक डिप्लोमा।
- अनिवार्य परीक्षा: Engineers Australia द्वारा स्किल्स असेसमेंट, जिसके लिए CDR (Competency Demonstration Report) लिखनी होती है।
6. आईटी और सॉफ्टवेयर डेवलपर (IT Professionals)
- भारतीय योग्यता: BCA / MCA / B.Tech (CS/IT)।
- अनिवार्य परीक्षा: ACS (Australian Computer Society) द्वारा असेसमेंट।
7. शेफ और कुक (Hospitality)
- भारतीय योग्यता: होटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा/डिग्री या प्रासंगिक अनुभव।
- प्रवेश प्रक्रिया: TRA असेसमेंट और प्रैक्टिकल टेस्ट।
8. ऑटोमोटिव मैकेनिक (Automobile Mechanic)
- भारतीय योग्यता: ITI/पॉलिटेक्निक (ऑटोमोबाइल/मोटर मैकेनिक)।
- मांग: स्थानीय गैरेज और सर्विस सेंटर्स में भारी कमी। TRA असेसमेंट आवश्यक।
9. कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट मैनेजर (Construction PM)
- भारतीय योग्यता: सिविल इंजीनियरिंग या कंस्ट्रक्शन मैनेजमेंट डिग्री।
- असेसमेंट संस्था: VETASSESS।
10. सोशल वर्कर (Social Worker)
- भारतीय योग्यता: Master of Social Work (MSW)।
- असेसमेंट संस्था: AASW (Australian Association of Social Workers)।
पासपोर्ट, वीज़ा और शुरुआती खर्च का ब्योरा
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मद (Expenses) |
अनुमानित लागत (INR में) |
विवरण |
|---|---|---|
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भारतीय पासपोर्ट |
₹1,500 - ₹2,000 |
सामान्य/तत्काल प्रक्रिया के तहत भारत में बनेगा। |
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इंग्लिश टेस्ट (IELTS/PTE) |
₹17,000 - ₹17,500 |
प्रति प्रयास। |
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स्किल्स असेसमेंट फीस |
₹30,000 - ₹60,000 |
संस्था के अनुसार (AITSL, TRA, ACS आदि)। |
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स्किल्ड इंडिपेंडेंट वीज़ा (Subclass 189/190) |
₹2,40,000 - ₹2,50,000 |
मुख्य आवेदक के लिए वीज़ा एप्लीकेशन फीस। |
|
हवाई टिकट (One-way) |
₹50,000 - ₹80,000 |
सीजन के अनुसार। |
|
शुरुआती रहने का खर्च (1-2 महीने) |
₹1,50000 - ₹2,00000 |
रेंट |
कुल शुरुआती फंड: एक व्यक्ति को सुरक्षित रूप से ऑस्ट्रेलिया पहुंचने और सैटल होने की प्रक्रिया में ₹5,00,000 से ₹7,00,000 (वीज़ा फीस और शुरुआती बैकअप मिलाकर) का कुल खर्च बैठता है।
क्या वीज़ा के लिए वहां किसी मित्र/स्पॉन्सर का होना जरूरी है?
नहीं, यह जरूरी नहीं है। यूएसए (USA) की तरह ऑस्ट्रेलिया केवल एम्प्लॉयर स्पॉन्सरशिप पर निर्भर नहीं है। ऑस्ट्रेलिया का Point-Based GSM System (General Skilled Migration) योग्यता पर काम करता है। यदि आपके पास उम्र, शिक्षा, कार्य अनुभव और अंग्रेजी (IELTS/PTE) के अच्छे अंक हैं, तो आप बिना किसी रिश्तेदार या मित्र के Subclass 189 या 190 (PR वीज़ा) के तहत खुद स्वतंत्र रूप से अप्लाई कर सकते हैं और आसानी से वीज़ा पा सकते हैं।
क्या वीज़ा के लिए वहां किसी मित्र/स्पॉन्सर का होना जरूरी है?
नहीं, यह जरूरी नहीं है। यूएसए (USA) की तरह ऑस्ट्रेलिया केवल एम्प्लॉयर स्पॉन्सरशिप पर निर्भर नहीं है। ऑस्ट्रेलिया का Point-Based GSM System (General Skilled Migration) योग्यता पर काम करता है। यदि आपके पास उम्र, शिक्षा, कार्य अनुभव और अंग्रेजी (IELTS/PTE) के अच्छे अंक हैं, तो आप बिना किसी रिश्तेदार या मित्र के Subclass 189 या 190 (PR वीज़ा) के तहत खुद स्वतंत्र रूप से अप्लाई कर सकते हैं और आसानी से वीज़ा पा सकते हैं।
शुरुआती संघर्ष, एकमोडेशन और जमीनी हकीकत
सस्ते ठहरने के विकल्प (Accommodation)
शुरुआत में भारत की तरह बेहद सस्ती धर्मशालाएं वहां नहीं मिलतीं। लेकिन वहां Backpacker Hostels, Shared Apartments (flatmates.com.au) और YMCA जैसे विकल्प मिलते हैं, जहां एक कमरा या बेड ₹1,000 से ₹1,500 प्रतिदिन के हिसाब से शेयरिंग में मिल जाता है।
शुरुआती समस्याएं और संघर्ष का समय
- लोकल एक्सपीरियंस की कमी: शुरुआत में बड़ी कंपनियां सीधे जॉब नहीं देतीं, क्योंकि वे "Australian Experience" मांगती हैं।
- सर्वाइवल जॉब्स: एक शिक्षक या अकाउंटेंट को भी शुरुआती 3 से 6 महीने अपने खर्च निकालने के लिए पेट्रोल पंप, रिटेल स्टोर, उबर ड्राइविंग या ट्यूशन टीचर (होम ट्यूशन/ऑनलाइन) जैसी सर्वाइवल जॉब्स करनी पड़ सकती हैं।
- स्कूल खोलने का विचार: ऑस्ट्रेलिया में खुद का स्कूल या ट्रेनिंग सेंटर खोलना शुरुआत में संभव नहीं है, क्योंकि वहां कड़े नियम, भारी निवेश और कड़े सरकारी अप्रूवल की आवश्यकता होती है। पहले वहां कम से कम 3-5 साल नौकरी करके सिस्टम को समझना समझदारी होगी।
एक नए व्यक्ति को पूरी तरह अपने मनमुताबिक प्रोफेशनल फील्ड में सेटल होने और मानसिक रूप से स्थिर होने में 6 महीने से 1 साल का कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। उचित योजना और बेहतरीन अंग्रेजी संचार कौशल इस संघर्ष को आधा कर देते हैं।

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