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Showing posts from December 1, 2019

राम वी. सुतार मूर्तिकार की जीवनी

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 राम वी सुतार मूर्तिकार की जीवनी---- राम वी सुतार का प्रारंभिक जीवन ---राम वी सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को जिला धूलिया  ग्राम गुंदूर महाराष्ट्र में हुआ था राम जी सुतार भारत के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार है इनका पूरा नाम राम वन जी सुतार है ,इनके पिता गाँव मे ग़रीब परिवार से थे ,इनका विवाह 1957 में प्रमिला से हुआ ,इनके पुत्र का नाम अनिल रामसुतार है जो पेशे से वास्तुकार हैं और नोयडा में रहते हैं।   शिक्षा -- इनकी शिक्षा इनके गुरु रामकृष्ण जोशी से प्रेरणा लेकर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में हुआ,1953 में इनको इसी कॉलेज से मोडलिंग विधा में गोल्ड मेडल मिला। कार्य - 1958 में आप सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के दृश्य श्रव्य विभाग में तकनीकी सहायक भी रहे 1959 में आपने स्वेच्छा से सरकारी नौकरी त्याग दी और पेशेवर मूर्तिकार बन गए  मोडलर के रूप में औरंगाबाद  आर्कियोलॉजी मे  रहते हुए 1954 से 1958 तक आपने अजंता और एलोरा की प्राचीन  मूर्तियों की पुनर्स्थापन का काम किया।   आप द्वारा निर्मित कुछ मूर्तियां इस प्रकार है -- आपने 150 से अधिक देशों में गांधी जी की मूर्तियां को बनाया --आपने 45 फुट ऊंची चंबल नदी मूर्

social life of indus valley civilization, सैंधव सभ्यता में सामाजिक जीवन

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social life of indus valley civilization, सैंधव सभ्यता में सामाजिक जीवन---- :सैंधव सभ्यता की खिलौना बैलगाड़ी: सिन्धु सभ्यता के सामाजिक धार्मिक विशेषताओं के बारे में जानकारी हमें उत्खनन से प्राप्त मृण्मूर्तियों और  प्राप्त अन्य सामग्रियों से पता चलता है । खुदाई में प्राप्त नारी मूर्तियों से प्रकट होता है कि उनका परिवार मातृसत्तात्मक था । सामाजिक वर्गीकरण------ -------- ----- मोहनजोदड़ो की खुदाई से प्राप्त अवशेषों से समाज मे विभिन्न वर्गों के अस्तित्व का प्रमाण मिलता है । हड़प्पा  में श्रमिक बस्तियों के आधार पर कुछ विद्वान दास प्रथा के  प्रचलित होने का अनुमान लगाया जा सकता है , व्हीलर महोदय ने दास प्रथा का  हड़प्पा संस्कृति में श्रमिक बस्तियों को दास की बस्तियाँ मान लिया है ,परंतु सुमेरियन सभ्यता और मिस्र की सभ्यता में दास प्रथा के अस्तित्व के आधार पर हड़प्पा में दास प्रथा का खोजना तर्कसंगत नहीं है।   हड़प्पा में बड़े और छोटे मकान अत्यंत पास पास है जो यह निष्कर्ष निकालता है कि सामाजिक भेदभाव अमीर और गरीब के बीच का नहीं था ,सभी मेलजोल के साथ सहअस्तित्व पूर्ण जीवन जीते थे। सिन्धु सभ्य