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Showing posts from November 24, 2019

असित कुमार हलदार आर्टिस्ट की biography

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 असित कुमार हाल्दार आर्टिस्ट की बायोग्राफी असित कुमार हाल्दार एक कल्पना शील, भावप्रवण चित्रकार के साथ साथ अच्छे साहित्यकार ,शिल्पकार, कला समालोचक,चिंतक,कवि,विचारक भी थे। असित कुमार हाल्दार का प्रारंभिक जीवन--- असित कुमार हलदार का जन्म सन 1890 पश्चिम बंगाल के जोड़ासांको नामक स्थल में  स्थित टैगोर भवन  के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इनकी नानी रवींद्र नाथ टैगोर की बहन थीं।   असित कुमार हलदार के बाबा  का नाम राखालदास हाल्दार था  जो उस समय लंदन विश्वविद्यालय में संस्कृत विषय के प्राध्यापक थे, और पिता सुकुमार हाल्दार भी कला में निपुण थे  ,उनकी प्रेरणा से असित कुमार हलदार को भी कला में अभिरुचि जगी। साथ मे वो बचपन से ही ग्रामीणों के बीच रहकर उनकी पटचित्र कला को गौर से देखा और समझा था।  15 वर्ष की आयु में हाल्दार को कलकत्ता के गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला मिल गया , यहां पर इनको गुरु के रूप में  अवनींद्र नाथ टैगोर का सानिध्य मिला। उनसे उन्होंने कला की बारीकियों को सीखा,  यहां पर इन्होंने जादू पाल और बकेश्वर पाल से मूर्तिकला सीखी।    यहां आपको पर असित कुमार हाल्दार को अपने कक्षा में अन्

Dengue se kaise bachenडेंगू बुखार के लक्षण और उपचार

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 Dengue se kaise bachenडेंगू बुखार के लक्षण और उपचार डेंगू बुखार क्या है, कब से शुरू हुआ?  डेंगू बुखार क्या है, कब से शुरू हुआ?  डेंगू बुखार का नाम सुनते ही  बड़े बड़ों को भय हो जाता है क्योंकि बीते दस साल में हमने हजारों लोगों को मरते देखा है, गांव के गांव इस बुख़ार से पीड़ित हुआ और बहुत से नवजवान ,बच्चे,बूढ़े इसके गिरफ्त में आये, आज डेंगू  लगभग पूरी दुनिया में अपने मौत का शिकंजा पहुंचा चुका है ,संसार के लगभग 115 देश इस  आपदा के शिकार हैं।      डेंगू के लक्षण का पहला लिखित  वर्णन 1780 में मिलता है, परंतु डेंगू बुख़ार वास्तव में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से  1945 -46  से   विस्तारित होना शुरू  हुआ , फिर धीरे धीरे पूरी दुनिया में आवागमन से फैला और 2010 के बाद ये अधिक देशों में फ़ैल गया , यदि 1945 से 2010 के बीच डेंगू से होने वाली मौत की तुलना करें तो इसमें 35% बृद्धि दर्ज की गई , क्योंकि यदि सामान्य व्यक्ति भी डेंगू प्रभावित क्षेत्र में दस दिन रुक कर वापस आ जाये तो उसको भी डेंगू  होने के चाँस बढ़ जाते हैं ,और यदि उसको हुआ तो वह अपने परिवार वालों को भी वही रोग फैला सकता है,ये रोग छु