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Showing posts from December 8, 2019

Satish Gujral Artist की जीवनी हिंदी में

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    सतीश गुजराल आर्टिस्ट की जीवनी--  Biography of  Satish Gujral Artist --   सतीश गुजराल बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार,मूर्तिकार वास्तुकार,लेखक हैं जिनका जन्म 25 दिसंबर 1925 को झेलम पंजाब (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था।इनको देश के दूसरे सर्वोच्च सिविलियन अवार्ड पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।इनके बड़े भाई इंद्रकुमार गुजराल 1997 से 1998 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे है।जो भारत के 13 वें प्रधानमंत्री थे। सतीश गुजराल का बचपन--    जब सतीश गुजराल मात्र 8 साल के थे तब उनके साथ एक दुर्घटना हो गई उनका पैर  एक नदी के पुल में फिसल गया वह जल धारा में पड़े हुए पत्थरो से गंभीर चोट लगी पर  उन्हें बचा लिए गया,इस दुर्घटना के  कारण उनकी टांग टूट गई तथा सिर में गंभीर चोट आई,सिर में गंभीर चोट के कारण उनको एक  सिमुलस नामक बीमारी ने घेर लिया जिससे  उनकी श्रवण शक्ति चली गई। उनकी श्रवण शक्ति खोने,पैर में चोट लगने के कारण उनको लोग लंगड़ा,बहरा गूंगा समझने लगे।वह पांच साल बिस्तर में ही लेटे रहे,यह समय उनके लिए बहुत ही संघर्ष पूर्ण था।इसलिए वह अकेले में खाली समय बैठकर रेखाचित्र बनाने लगे। 

हड़प्पा कालीन सभ्यता मे धार्मिक जीवन religious aspect of hadappan society

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          ----  हड़प्पा  कालीन धार्मिक विश्वास---- सिन्धु सभ्यता काल के समाज मे धार्मिक नियम कायदे कैसे थे इसके लिए हमे पुरातात्विक सामग्रियों पर आश्रित रहना पड़ता है ,साथ मे हमें हड़प्पा काल के समकालीन मेसोपोटामिया में प्रचलित धार्मिक  साक्ष्य का भी सहारा लेना पड़ता है क्योंकि मेसोपोटामिया की लिपि को पढ़ा जा सका है जिसके द्वारा उस जगह में प्रचलित धर्म के बारे में जानकारी मिल जाती है ,चूंकि उस समय  हड़प्पा संस्कृति और   मेसोपोटामिया के बीच व्यापार होता था ,इसलिए व्यापारियों के आवागमन और आपसी मेलमिलाप से निश्चित ही दोनों धर्मो और संस्कृतियों में भी मेलमिलाप हुआ होगा , दोनों संस्कृतियों के तुलनात्मक अध्ययन से सिन्धु सभ्यता के धार्मिक जीवन मे भी  मेसोपोटामिया  की  संस्कृति का प्रभाव पड़ा।           सिन्धु सभ्यता के पुरातात्विक सामग्री जो  उस  समय मे प्रचलित  धर्म का ज्ञान करातीं हैं ,  इनमें मूर्तियां , मुद्राएं , पत्थर , मृदभांड तथा पत्थर से निर्मित लिंग , चक्र की आकृतियां , ताम्र फ़लक तथा कुछ विशिष्ट भवन जिनका प्रयोग पूजास्थल के रूप में किया जाता होगा तथा कब्रिस्तान प्रमुख है।   हड़प