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Showing posts from December 8, 2019

राम वी. सुतार मूर्तिकार की जीवनी

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 राम वी सुतार मूर्तिकार की जीवनी---- राम वी सुतार का प्रारंभिक जीवन ---राम वी सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को जिला धूलिया  ग्राम गुंदूर महाराष्ट्र में हुआ था राम जी सुतार भारत के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार है इनका पूरा नाम राम वन जी सुतार है ,इनके पिता गाँव मे ग़रीब परिवार से थे ,इनका विवाह 1957 में प्रमिला से हुआ ,इनके पुत्र का नाम अनिल रामसुतार है जो पेशे से वास्तुकार हैं और नोयडा में रहते हैं।   शिक्षा -- इनकी शिक्षा इनके गुरु रामकृष्ण जोशी से प्रेरणा लेकर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में हुआ,1953 में इनको इसी कॉलेज से मोडलिंग विधा में गोल्ड मेडल मिला। कार्य - 1958 में आप सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के दृश्य श्रव्य विभाग में तकनीकी सहायक भी रहे 1959 में आपने स्वेच्छा से सरकारी नौकरी त्याग दी और पेशेवर मूर्तिकार बन गए  मोडलर के रूप में औरंगाबाद  आर्कियोलॉजी मे  रहते हुए 1954 से 1958 तक आपने अजंता और एलोरा की प्राचीन  मूर्तियों की पुनर्स्थापन का काम किया।   आप द्वारा निर्मित कुछ मूर्तियां इस प्रकार है -- आपने 150 से अधिक देशों में गांधी जी की मूर्तियां को बनाया --आपने 45 फुट ऊंची चंबल नदी मूर्

हड़प्पा कालीन सभ्यता मे धार्मिक जीवन religious aspect of hadappan society

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          ----  हड़प्पा  कालीन धार्मिक विश्वास---- सिन्धु सभ्यता काल के समाज मे धार्मिक नियम कायदे कैसे थे इसके लिए हमे पुरातात्विक सामग्रियों पर आश्रित रहना पड़ता है ,साथ मे हमें हड़प्पा काल के समकालीन मेसोपोटामिया में प्रचलित धार्मिक  साक्ष्य का भी सहारा लेना पड़ता है क्योंकि मेसोपोटामिया की लिपि को पढ़ा जा सका है जिसके द्वारा उस जगह में प्रचलित धर्म के बारे में जानकारी मिल जाती है ,चूंकि उस समय  हड़प्पा संस्कृति और   मेसोपोटामिया के बीच व्यापार होता था ,इसलिए व्यापारियों के आवागमन और आपसी मेलमिलाप से निश्चित ही दोनों धर्मो और संस्कृतियों में भी मेलमिलाप हुआ होगा , दोनों संस्कृतियों के तुलनात्मक अध्ययन से सिन्धु सभ्यता के धार्मिक जीवन मे भी  मेसोपोटामिया  की  संस्कृति का प्रभाव पड़ा।           सिन्धु सभ्यता के पुरातात्विक सामग्री जो  उस  समय मे प्रचलित  धर्म का ज्ञान करातीं हैं ,  इनमें मूर्तियां , मुद्राएं , पत्थर , मृदभांड तथा पत्थर से निर्मित लिंग , चक्र की आकृतियां , ताम्र फ़लक तथा कुछ विशिष्ट भवन जिनका प्रयोग पूजास्थल के रूप में किया जाता होगा तथा कब्रिस्तान प्रमुख है।   हड़प