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Showing posts from March 9, 2020

अकबर पद्मसी आर्टिस्ट की जीवनी।

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 अकबर पद्मसी आर्टिस्ट की जीवनी।  अकबर पद्मसी आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में। अकबर पद्मसी को एस. एच. रजा ,F N सूजा, M.F. हुसैन की श्रेणी में रखा जाता है। इन्होंने कई विधाओं में कार्य किया , अकबर पद्मसी ने तैल रंग ,जल रंग ,स्कल्पचर और प्रिंटमेकिंग में , लिथोग्राफी,  में कंप्यूटर ग्राफ़िक्स में कार्य किया। अकबर पदमसी  अकबर पदमसी का प्रारंभिक जीवन -- अकबर पद्मसी का जन्म गुजरात के कच्छ क्षेत्र में एक मुस्लिम खोजा जाति में हुआ था ,इनके पूर्वज पहले राज दरबार मे कविता और गायन वादन किया करते थे जिन्हें चारण कहा जाता था। पद्मसी के बाबा काठियावाड़ क्षेत्र के गांव वघनगर के सरपंच थे तब लोंगों ने उनके अच्छे कार्यों के कारण पदमसी की उपाधि दी थी जो वास्तव में पद्मश्री का अपभ्रंश है।पद्मसी के पिता हसन पदमसी एक जाने माने व्यापारी थे जिनका फर्नीचर का व्यापार था वो बहुत धनी थे उनके दस मकान थे।परंतु इतना होने के बावजूद पदमसी परिवार में कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति नहीं था ,तब अकबर पद्मसी जो सात भाइयों में से एक थे  ,इनके एक भाई एलिक पदमसी थे जिन्होंने थियेटर रंगमंच में नाट्यदक्षता से अपनी पहचान बनाई थी  वो थिएटर आर्टिस

हड़प्पा संस्कृति का पतन कैसे हुआ

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 हड़प्पा संस्कृति का उद्भव पर जिस तरह अनेक मत है विद्वानों के उसी तरह हड़प्पा संस्कृति के पतन होना भी एक आश्चर्य ही है कि इतनी विकसित और विस्तृत सभ्यता धीरे धीरे विलुप्त क्यों हो गई ,और इस सभ्यता के व्यक्ति और उनके साथ उनकी विकसित वैज्ञानिक  संस्कृति भी कैसे बाद के समय में बदल गई या गायब हो गई ,इस पर कई विद्वानों ने अपने अपने मत प्रस्तुत किया है। हड़प्पा संस्कृति का पतन-- दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व हड़प्पा संस्कृति का शहरी चरण समाप्त हो गया ,हालाँकि उसके ह्रास के लक्षण  बहुत पहले ही दिखने लगे थे जब हड़प्पा मोहनजोदड़ो तथा कालीबंगां में शहरी योजना के आधार पर निर्माण कार्य बहुत ही कम हो गए थे । ये शहर  अब कच्चे भवनों  और झोपड़ पट्टियों में बदलते जा रहे थे। शहरी योजना के आधार पर निर्माण कार्य तो कम हुआ ही था साथ में माप तौल के उपकरण, हड़प्पाई लिपि, कांसे के औजार भी खत्म हो गए लगभग 1800 ईसा पूर्व हड़प्पाई शहर वीरान हो गए थे,इस समय तक मेसोपोटामिया से प्राप्त मुहरों में भी मेलुहा का कोई जिक्र नहीं मिलता हैं,अब ये हड़प्पाई बस्तियों के लोग धीरे धीरे गांव की तरफ कृषक कार्यो को अपनाने लगे ,अब गैर हड़प्पा