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Showing posts from March 9, 2020

DU LLB प्रवेश परीक्षा

 DU-LLB प्रवेश परीक्षा  परीक्षा का नाम - दिल्ली विश्वविद्यालय एलएलबी प्रवेश परीक्षा  लोकप्रिय नाम - DU LL.B प्रवेश परीक्षा  संचालन प्राधिकरण (authority) : विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली  DU LLB प्रवेश परीक्षा पात्रता ---  (i) सामान्य, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (एससी / एसटी) उम्मीदवारों के लिए पात्रता मानदंड अध्यादेश में दिया गया है।  एलएलबी में प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड     (ii) सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए, दिल्ली विश्वविद्यालय या किसी भी अन्य भारतीय या विदेशी विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट / पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा कम से कम 50% अंकों या समकक्ष ग्रेड के साथ मान्यता प्राप्त।    हालांकि, प्रवेश परीक्षा में सामान्य उम्मीदवारों के लिए अधिसूचित अंकों से ओबीसी उम्मीदवारों के प्रवेश के लिए कट ऑफ अंक 10% तक कम होगा।  (iii) सामान्य उम्मीदवारों के लिए निर्धारित न्यूनतम पात्रता में 5% अंकों की छूट अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में दी जाएगी।  (भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुपालन में पी.वी. इंडीयरसन बनाम भारत संघ

हड़प्पा संस्कृति का पतन कैसे हुआ

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   हड़प्पा संस्कृति का उद्भव पर जिस तरह अनेक मत है विद्वानों के उसी तरह हड़प्पा संस्कृति के पतन होना भी एक आश्चर्य ही है कि इतनी विकसित और विस्तृत सभ्यता धीरे धीरे विलुप्त क्यों हो गई ,और इस सभ्यता के व्यक्ति और उनके साथ उनकी विकसित वैज्ञानिक  संस्कृति भी कैसे बाद के समय में बदल गई या गायब हो गई ,इस पर कई विद्वानों ने अपने अपने मत प्रस्तुत किया है। हड़प्पा संस्कृति का पतन--- दूसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व हड़प्पा संस्कृति का शहरी चरण समाप्त हो गया ,हालाँकि उसके ह्रास के लक्षण  बहुत पहले ही दिखने लगे थे जब हड़प्पा मोहनजोदड़ो तथा कालीबंगां में शहरी योजना के आधार पर निर्माण कार्य बहुत ही कम हो गए थे । ये शहर  अब कच्चे भवनों  और झोपड़ पट्टियों में बदलते जा रहे थे। शहरी योजना के आधार पर निर्माण कार्य तो कम हुआ ही था साथ में माप तौल के उपकरण, हड़प्पाई लिपि, कांसे के औजार भी खत्म हो गए लगभग 1800 ईसा पूर्व हड़प्पाई शहर वीरान हो गए थे,इस समय तक मेसोपोटामिया से प्राप्त मुहरों में भी मेलुहा का कोई जिक्र नहीं मिलता हैं,अब ये हड़प्पाई बस्तियों के लोग धीरे धीरे गांव की तरफ कृषक कार्यो को अपनाने लगे ,अब गैर हड़प्पा