Posts

Showing posts from June 11, 2019

DU LLB प्रवेश परीक्षा

 DU-LLB प्रवेश परीक्षा  परीक्षा का नाम - दिल्ली विश्वविद्यालय एलएलबी प्रवेश परीक्षा  लोकप्रिय नाम - DU LL.B प्रवेश परीक्षा  संचालन प्राधिकरण (authority) : विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली  DU LLB प्रवेश परीक्षा पात्रता ---  (i) सामान्य, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (एससी / एसटी) उम्मीदवारों के लिए पात्रता मानदंड अध्यादेश में दिया गया है।  एलएलबी में प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड     (ii) सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों के लिए, दिल्ली विश्वविद्यालय या किसी भी अन्य भारतीय या विदेशी विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट / पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा कम से कम 50% अंकों या समकक्ष ग्रेड के साथ मान्यता प्राप्त।    हालांकि, प्रवेश परीक्षा में सामान्य उम्मीदवारों के लिए अधिसूचित अंकों से ओबीसी उम्मीदवारों के प्रवेश के लिए कट ऑफ अंक 10% तक कम होगा।  (iii) सामान्य उम्मीदवारों के लिए निर्धारित न्यूनतम पात्रता में 5% अंकों की छूट अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में दी जाएगी।  (भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले के अनुपालन में पी.वी. इंडीयरसन बनाम भारत संघ

Raja Ram mohan ray :first indian social reformer

Image
 राजा राम मोहन राय-- Raja Ram Mohan Ray             मैं आज आपको राजा राम मोहन राय के बारे में बताता हूँ ----/--/----                 राजा राम मोहन राय (raja ram mohan Ray ) की कहानी ब्रिटिश काल की है , जब देश मे मुग़ल काल की संस्कृति ,भाषा,और कुछ प्रशासन भी चल रहा था, परंतु ब्रिटिश का बंगाल में आधिपत्य के बाद ,उन्होंने भारत के संस्कृति में अधिक हस्तक्षेप के बिना व्यापार करने में ही ध्यान लगाया । परंतु अंग्रेजों के आगमन से भारत के लोंगों के बीच आधुनिक उदारवादी विचारों का प्रसार हुआ ,भारत के लोंगों को अपने धर्म की कई बुराइयां दिखाई दीं जो समाज मे जनसामान्य में व्याप्त थी , जैसे स्त्रियों की स्थिति बहुत खराब थी , विधवा महिलाओं की स्थिति नारकीय थी।                    इसी समय राजा राम मोहन राय का जन्म 1774 में बंगाल के हुगली जिले के राधानगर कस्बे में   कुलीन ब्राम्हण  परिवार में  हुआ था , बंगाल के नवाबों ने इनके परिवार की सेवा के कारण इनके पूर्वजों को रामराय की उपाधि दी जो बाद में संक्षिप्त रूप से राय उपनाम से चलता रहा ।                  ये बचपन से ही तीक्ष्ण दिमाग़ के और स्वभाव

Young bangal movement at bengal, Henry vivan derozio

Image
      हेनरी विवियन डेरेज़िओ और उनका बचपन-    हेनरी विवियन डेरेजियो ,का जन्म अप्रैल 1809 में कलकत्ता में हुआ , इनके पिता फ्रांसिस डेरेजियो एक ऐंग्लो इंडियन परिवार से थे, हेनरी विवियन डेरेजीयो का बचपन कलकत्ता में ही बीता,  बचपन से ही तीक्ष्ण दिमाग के धनी थे डेरेजियो,सत्रह वर्ष की उम्र में डेरेजिओ हिन्दू कॉलेज में सहायक प्रधानाचार्य हो गए थे। 1831 से 1826 तक वो हिन्दू कॉलेज  में प्रधानाचार्य रहे , इन्होंने कुछ समय में ही मेधावी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपना अनुयायी बना लिया, ये ऐंग्लो इंडियन  जर्रूर थे ,परंतु इनको अपने देश भारत से बहुत अधिक प्रेम था , इन्होंने राष्ट्रभक्ति की कई कविताएं इंग्लिश में लिखीं , कह सकतें है कि वो एक राष्ट्रवादी कवि थे ।   हेनरी विवियन डेरेज़िओ का यंग बंगाल मूवमेंट---             डेरेजियो ने हिन्दू कॉलेज में शिक्षण कार्य के दौरान छात्रों को पश्चिमी तार्किक ज्ञान,और विज्ञान परक सोंच को बताया  उन्होंने किसी भी बात को आंख मूंद कर विश्वास करने से रोका हर उस बात पर विश्वास करने को कहा जो तर्क की कसौटी पर खरी उतरे, उन्होंने स्वतंत्रता, समानता, भातृत्व