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Showing posts from June 17, 2019

राम वी. सुतार मूर्तिकार की जीवनी

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 राम वी सुतार मूर्तिकार की जीवनी---- राम वी सुतार का प्रारंभिक जीवन ---राम वी सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को जिला धूलिया  ग्राम गुंदूर महाराष्ट्र में हुआ था राम जी सुतार भारत के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार है इनका पूरा नाम राम वन जी सुतार है ,इनके पिता गाँव मे ग़रीब परिवार से थे ,इनका विवाह 1957 में प्रमिला से हुआ ,इनके पुत्र का नाम अनिल रामसुतार है जो पेशे से वास्तुकार हैं और नोयडा में रहते हैं।   शिक्षा -- इनकी शिक्षा इनके गुरु रामकृष्ण जोशी से प्रेरणा लेकर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में हुआ,1953 में इनको इसी कॉलेज से मोडलिंग विधा में गोल्ड मेडल मिला। कार्य - 1958 में आप सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के दृश्य श्रव्य विभाग में तकनीकी सहायक भी रहे 1959 में आपने स्वेच्छा से सरकारी नौकरी त्याग दी और पेशेवर मूर्तिकार बन गए  मोडलर के रूप में औरंगाबाद  आर्कियोलॉजी मे  रहते हुए 1954 से 1958 तक आपने अजंता और एलोरा की प्राचीन  मूर्तियों की पुनर्स्थापन का काम किया।   आप द्वारा निर्मित कुछ मूर्तियां इस प्रकार है -- आपने 150 से अधिक देशों में गांधी जी की मूर्तियां को बनाया --आपने 45 फुट ऊंची चंबल नदी मूर्

Rabindranath tagore , poet and painter

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                                                       : रवींद्र नाथ टैगोर:   रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा है  कि "महीने के बजाए हम पल पल की गिनती करें ,तभी कुछ करने के लिए हमारे पास समय होगा।" रवींद्र नाथ टैगोर का जन्म कलकत्ता नगर में 7 मई1861 को देवेंद्र नाथ टैगोर के घर मे हुआ, देवेंद्र नाथ टैगोर देश के एक माननीय धार्मिक ,सामाजिक नेता थे, उनके सभी भाई ऊंचे पदों में पदासीन थे, रवींद्र नाथ टैगोर की परवरिश में माता पिता अधिक ध्यान नहीं दे पाए क्योंकि माता हमेशा बीमार रहतीं थीं और पिता उनकी देखभाल के लिए इलाज के लिए बाहर रहते थे ,रवींद्र नाथ का बचपन का अधिकतर समय नौकरों के बीच बीता ,जो रवींद्र को घर मे बन्द कर बाजार चले जाते थे ,  ये अपनी माता पिता की चौदहवीं संतान थे और भाइयों में सबसे छोटे ,छोटे होने के कारण उनको दब कर रहना पड़ता था , इनकी माता का  नाम सारदा देवी था। 1875 में जब टैगोर मात्र 14 वर्ष के थे तभी उनकी माता का देहांत हो गया। इन्ही परिस्थितियों के बीच उनका स्वभाव अंतर्मुख होने लगा और कल्पनाओं में विचरित होने लगा ,उनके 14 वर्ष की आयु में  स्वदेश प्रेम

Subhas Chandra Bose|Biography हिंदी में | Indian national army

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(सुभाष चन्द्र बोस , आर्मी के साथ) Subhas Chandra Bose biography  सुभाष चंद्र बोस (1897-1945)       भारत के इतिहास में कुछ क्रांतिकारी नेताओं में यदि यदि भगत सिंह,चंद्र शेखर आज़ाद को याद करते ही सिहरन हो जाती है , उसी तरह सुभाष  चंद्र बोस के नाम सुनते ही उनके तश्वीर को देखते ही अपने आप हाँथ माथे में पहुंचकर  सैल्यूट कर देता है हर भारत के बन्दे को सुभाष चंद्र बोस के लिए अंतरात्मा से सम्मान है ,देश उन्हें "नेता जी "के नाम से जानता है।                                                             कुछ समय पूर्व गुमनामी बाबा के मृत्यु के बाद उनके पास सुभाष बाबू के चश्मे ,कुछ दस्ताबेज ,और परिवार के साथ मिली तश्वीर से लगता है कि वो सुभाष बाबू ही थे ,जो  फैजाबाद में 'भगवानजी' गुमनामी बाबा के नाम से जाने गए, पूरे जीवनकाल किसी से आमने सामने नही मिले,परंतु कुछ उनके परिचित गुप्त रूप से उनसे मिलने का दावा करते रहे,वो भी रहस्य था, ये रहस्य बना ही रहा ,सरकार के द्वारा बनाये गए कई आयोग में  भी कोई स्पष्ट जानकारी नही दे सके , कभी देश मे ये सूचना उपलब्ध कराई गई की सरकार द्व