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Showing posts from June 17, 2019

अंध भक्ति किसे कहते हैं जानिए कौन होते हैं अंधभक्त

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  अंधभक्त किसे कहते हैं? अंध भक्त का शाब्दिक अर्थ- अंधभक्त का तात्पर्य हिन्दी शब्दावली के अनुसार वो भक्त जो आंख बंद कर दुसरों का अनुसरण करें। अनुयायी जो अपने नेता पर अधिक भरोसा करे । और  अपने विवेक का इस्तेमाल बिल्कुल न करे।     अन्ध शब्द के अन्य मिश्रित शब्द अंध प्रेम-Blind love अंध भक्त-Blind supporter अंध विश्वास-  Superstition ,Blind Faith अंध राष्ट्रवाद -Blind Patriotism अंध-Blind भक्त- Worshiper भक्ति शब्द  का प्रयोग ईश्वर भक्ति ,मातृ भक्ति,पितृ भक्ति ,राष्ट्र भक्ति ,  आदि भक्त वो हैं जो   जो भक्ति करते है जो  किसी में श्रद्धा और आस्था और  विश्वास रखतें हैं।  जैसे -शिव भक्त , कृष्ण भक्त ,देवी भक्त ,राष्ट्र भक्त आदि हैं। जो भक्ति करते है अंधभक्त का तात्पर्य किसी भी व्यक्ति पर ऑंखमूँदकर विश्वास करने वाला अनुयायी। जिसमें व्यक्ति अपने विवर्क और तर्क का प्रयोग न करे। निरीश्वरवादी बौद्ध अन्य धर्म अनुयाइयों के धर्म ग्रंथ में अकल्पनीय बातों का खंडन करते है ,वो हिन्दू ,मुस्लिम ,ईसाइयों के धर्म ग्रथों में दिए गए कई कथानकों का खंडन करते है और कपोल कल्पित कहते हैं  और इन धर्मों में आस्था रख

Rabindranath tagore , poet and painter

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                                                       : रवींद्र नाथ टैगोर:   रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा है  कि "महीने के बजाए हम पल पल की गिनती करें ,तभी कुछ करने के लिए हमारे पास समय होगा।" रवींद्र नाथ टैगोर का जन्म कलकत्ता नगर में 7 मई1861 को देवेंद्र नाथ टैगोर के घर मे हुआ, देवेंद्र नाथ टैगोर देश के एक माननीय धार्मिक ,सामाजिक नेता थे, उनके सभी भाई ऊंचे पदों में पदासीन थे, रवींद्र नाथ टैगोर की परवरिश में माता पिता अधिक ध्यान नहीं दे पाए क्योंकि माता हमेशा बीमार रहतीं थीं और पिता उनकी देखभाल के लिए इलाज के लिए बाहर रहते थे ,रवींद्र नाथ का बचपन का अधिकतर समय नौकरों के बीच बीता ,जो रवींद्र को घर मे बन्द कर बाजार चले जाते थे ,  ये अपनी माता पिता की चौदहवीं संतान थे और भाइयों में सबसे छोटे ,छोटे होने के कारण उनको दब कर रहना पड़ता था , इनकी माता का  नाम सारदा देवी था। 1875 में जब टैगोर मात्र 14 वर्ष के थे तभी उनकी माता का देहांत हो गया। इन्ही परिस्थितियों के बीच उनका स्वभाव अंतर्मुख होने लगा और कल्पनाओं में विचरित होने लगा ,उनके 14 वर्ष की आयु में  स्वदेश प्रेम

Subhas Chandra Bose and Indian national army

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(सुभाष चन्द्र बोस , आर्मी के साथ) सुभाष चंद्र बोस (1897 -  1945)       भारत के इतिहास में कुछ क्रांतिकारी नेताओं में यदि यदि भगत सिंह , चंद्र शेखर आज़ाद को याद करते ही सिहरन हो जाती है , उसी तरह सुभाष  चंद्र बोस के नाम सुनते ही उनके तश्वीर को देखते ही अपने आप हाँथ माथे में पहुंचकर  सैल्यूट कर देता है हर भारत के बन्दे को सुभाष चंद्र बोस के लिए अंतरात्मा से सम्मान है  ,देश उन्हें "नेता जी "के नाम से जानता है।                                                  Subhas Chandra Bose and Indian national army           कुछ समय पूर्व गुमनामी बाबा के मृत्यु के बाद उनके पास सुभाष बाबू के चश्मे ,कुछ दस्ताबेज ,और परिवार के साथ मिली तश्वीर से लगता है कि वो सुभाष बाबू ही थे ,  जो  फैजाबाद में ' भगवानजी'    गुमनामी बाबा के नाम से जाने गए, पूरे जीवनकाल किसी से आमने सामने नही मिले,परंतु कुछ उनके परिचित गुप्त रूप से उनसे मिलने का दावा करते रहे,वो भी रहस्य था, ये रहस्य बना ही रहा ,सरकार के द्वारा बनाये गए कई आयोग में  भी कोई स्पष्ट जानकारी नही दे सके , कभी देश मे ये सूचना उ