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Showing posts from November 14, 2019

अजंता की चित्रकला ..मेरी अजंता यात्रा और उनके गुफाओं के चित्र

अजंता की यात्रा ::
अजंता की चित्रकला
अजंता भ्रमण और अजंता की गुफाओं के विश्व प्रसिद्ध चित्र.
 सह्याद्रि पर्वतों के उत्तुंग शिखर जो आज भी हरियाली को समेटे है , चारो तरफ पहाड़ ही पहाड़ दिखाई देते है इस मनोरम स्थल को देखते निहारते हुए जब मैं टैक्सी में बैठे बैठे सोंच रहा था इस रमणीक स्थल में 2000 पहले से मौर्य,सातवाहन, वाकाटक ,राष्ट्रकूट जैसे राजवंशों ने अपनी शौर्य  गाथाएं लिखीं ,  मध्य काल में छत्रपति शिवाजी  के पराक्रम और शौर्य की ये वादियां गवाह है ,  एक नाथ तुकाराम और रामदेव जैसे महान संतो के भजन जिनसे समाज में नई चेतना मिली , मेरा मन प्रफुल्लित था इस वीर भूमि और  शांत भूमि में आकर प्रकृति के साथ अठखेलियां खेलते खेलते औरंगाबाद जिले के गांव फरदारपुर में अजंता के पास पहुंचा, टैक्सी वाले ने मुझे एक होटल में पहुँचाया वो बहुत सुविधाजनक तो नही था पर मैंने एक रात बिताने के लिए ठीक ही समझा , अगले दिन हमने एक टैक्सी ली जिसने दो घण्टे के बाद हमे उस तलहटी में पहुँचाया जहां से ऊपर जाना था अजंता गुफ़ा देखने के लिए ,  टैक्सी के ड्राईवर हमे ऊपर तो ले गए पर   चार किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया क्योंकि महाराष…

सिन्धु सभ्यता का आर्थिक जीवन,economic life of saindhav period

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सिन्धु सभ्यता का आर्थिक जीवन -------------   कृषि--- ------- ------ ------
सिन्धु सभ्यता की आर्थिक व्यवस्था यद्यपि नगरीय तरह की थी , परंतु नगरों की स्थापना तभी सम्भव है जब गांव से अतिरिक्त उत्पादन होने लगे , इस अतिरिक्त उत्पादन के लिए कृषि में कुछ नई तकनीक का प्रयोग करने में ही सम्भव है ,कृषि में अतिरेक उत्पादन के लिए मिट्टी उर्वर  होना चाहिए,सिंचाई के साधन हो,खेत की जोताई गहराई से हो सके ,तब खेत मे साल में दो फ़सलें उग सकती हैं, तब अतिरिक्त अनाज से नगरवासियों को भोजन मिल सकता है। सैंधव सभ्यता का व्यापक नगरीकरण  अत्यंत उपजाऊ भूमि की  पृष्ठभूमि में संभव था।

       सैंधव सभ्यता में नदियों से जलोढ़ मिट्टी बाढ़ के बाद एकत्र होने से उपजाऊ हो जाती थी , उस काल मे वर्षा भी अधिक होती थी , जिससे बिना सिंचाई के ही अधिक फ़सल उगाई जा सकती थी ,  सिंचाई के लिए नहरों का प्रमाण नही मिलता , अधिक वर्षा होती थी,     जिससे ज्यादा पानी वाली फसलें जैसे धान और कपास भी उगाई जातीं थीं , गेहूँ की तीन और जौ की दो फसलें  उपजाई जातीं थीं  इसके प्रमाण  काफी कम हैं परंतु लोथल और रंगपुर से मिट्टी के  बर्तनों  में धान की…