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Showing posts from August 12, 2019

Squat व्यायाम क्या है,SQUAT पांच फ़ायदे।

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 SQUAT व्यायाम क्या है -  आप squat व्यायाम से शरीर को फिट रख सकतें हैं वैसे तो शरीर को फिट रखने के लिए बहुत सी exercise करते है , जो आपको चुस्त दुरुस्त रखतीं है, आपकी मसल्स को मजबूती प्रदान करता है ,परंतु सारी एक्सरसाइज के बाद भी आपने अपने दैनिक अभ्यास में squat को सम्मिलित नहीं किया तो आप बहुत कुछ छोड़ रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप आज से ही sqaut को अपने रोज के एक्सरसाइज में सम्मिलित करें । यह अभ्यास महिला और पुरुष दोनों के लिए फायदेमंद है। इस एक्सरसाइज में प्रारम्भ में आपको समस्या आ सकती है परंतु धीरे धीरे रोज़ाना अभ्यास से ये बहुत सरल लगने लगता है। प्रारम्भ में आप इसको करने में किसी चीज का सहारा लेकर कर सकते हैं ,परंतु बाद में आप धीरे धीरे बिना सहारे का अभ्यास कर सकते हैं। इस एक्सरसाइज की विशेषता यह है कि इसे कहीं भी बिना इक्विपमेंट के  भी किया जा सकता है। यह एक्सरसाइज केवल  शरीर के एक भाग को ही मजबूत नही करता बल्कि पूरे शरीर को संतुलित रूप से मजबूत करता है,साधारण तौर पर ऐसा लगता है कि इस एक्सरसाइज से केवल टाँगों(legs)को मज़बूती मिलती है परंतु ऐसी बात नहीं है इस एक्सरसाइज से पूरा शर

Gupt kaleen sanskrit ,sahity, art -गुप्त काल की संस्कृति ,साहित्य, कला

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            *** गुप्त कालीन संस्कृति*** गुप्त काल का समय  300 ईस्वी से 600 ईस्वी तक रहा है ,इस समय हिन्दू धर्म ग्रन्थो में ,ज्ञान विज्ञान ,कला साहित्य में अत्यधिक उन्नति हुई इसीलिए गुप्तकाल को स्वर्णयुग कहा जाता है।         गुप्त कालीन धर्म........  गुप्त काल में धार्मिक दृष्टीकोण से पुनुरुत्थान हुआ  ,इस समय मन्दिरों और मूर्तियॉ बनी, इसी समय पौराणिक धर्म  हिंदू धर्म की स्थापना हुई,इस समय वैष्णव धर्म प्रधान धर्म बन गया ,अधिकांश गुप्त सम्राटों ने इसी धर्म को अपनाया और स्वयं  स्वयं परम भागवत की उपाधि धारण की तथा अपने सिक्कों पर शंख ,चक्र ,गदा ,पद्म , गरुण और लक्ष्मी   की आकृतियां बनवाईं,    गुप्त शासकों  के संरक्षण  के कारण ही  वैष्णव धर्म  न  केवल भारत तक रहा बल्कि ये पूरे दक्षिण पूर्व एशिया , कंबोडिया ,इंडोनेशिया तक फ़ैल गया। विष्णु की अनेक मूर्तियां बनीं अनेक मन्दिर बनें , विष्णु को अनेक अवतारों के रूप में चित्रित किया , विष्णु के 24 अवतारों की मूर्तियां मन्दिरों में उकेरी गईं। विष्णु के अनेक मन्दिरों में विष्णु  चक्र भृति बराह अवतार अथवा अनंतशायी के रूप में प्रतिष्ठित थे। दि