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Showing posts from October 25, 2021

Aneesh kapoor आर्टिस्ट की जीवनी

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  अनीश कपूर का जन्म 12 मार्च 1954 को मुम्बई में हुआ था ,उनके पिता एक  इण्डियन पंजाबी हिन्दू थे ,उनकी माता यहूदी परिवार से थे ,अनीश कपूर के नाना पुणे के यहूदी मंदिर जिसे सिनेगॉग कहते है के एक कैंटर थे।  (अनीश कपूर)         इनके पिता भारतीय नौ सेना (NEVY)मैं जल वैज्ञानिक (Hydrographer) थे,अनीश कपूर के एक भाई टोरंटो कनाडा के यार्क विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर हैं।   अनीश कपूर की शिक्षा-- अनीश कपूर की प्रारंभिक शिक्षा दून स्कूल देहरादून में हुई,प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद सन 1971 में अनीश कपूर  इजराइल चले गए ,वहां पर उन्होंने इलेक्ट्रिकल  इंजीनियरिंग के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया ,परंतु उनकी गणित में अरुचि होने के कारण छै महीने बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दिया,तब उन्होंने एक आर्टिस्ट बनने का निश्चय किया।वह इंग्लैंड गए यहां पर होर्नसे कॉलेज ऑफ आर्ट में एडमिशन लिया और चेल्सिया स्कूल ऑफ आर्ट एंड डिज़ाइन में कला का अध्ययन किया। अनीश कपूर की  महत्वपूर्ण संरचनाये और स्कल्पचर- - अनीश कपूर ने  1979-1980 में 1000 Names नामक  इंस्टालेशन बनाये आपने ये स्कल्पचर और संरचनाओं  में अमूर्

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी

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  दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी -- दीनदयाल उपाध्याय भारतीय पॉलिटिशियन,संगठनकर्ता और एक सामाजिक चिंतक थे,उन्होंने हिंदुत्व के विचारधारा को आगे बढ़ाया उनके  संघर्षपूर्ण सादे जीवन यापन और राष्ट्र के लिए चिंतन संघर्षपूर्ण जीवन से न सिर्फ हिंदुत्व को धार दी बल्कि एक जनमानस में उनका पड़ा।   दीनदयाल उपाध्याय का बचपन- -       पंडित   दीनदयाल उपाध्याय का जन्म सितंबर 1916  को मथुरा जिले के एक गांव नगला चंद्रभान में हुआ था,दीनदयाल उपाध्याय को बचपन से ही अत्यधिक संघर्ष करना पड़ा।यद्यपि दीनदयाल उपाध्याय के पिता भगवती प्रसाद उपाध्याय रेलवे में जलेसर में सहायक स्टेशन मास्टर थे,तथा उनकी माता एक धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं।  दीनदयाल एक छोटे भाई शिवदयाल थे जो उनसे दो वर्ष छोटे थे। दीनदयाल के बाबा का नाम हरिराम उपाध्याय था जो एक ज्योतिषी थे। उन्होंने उनकी जन्म कुंडली देखकर बताया था कि ये बालक अपने जीवन मे अत्यधिक यश प्राप्त करेगा और अविवाहित रहेगा।       दीनदयाल उपाध्याय जब तीन वर्ष के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया ,तब उनकी माता अपने दोनो  पुत्रों  के साथ अपने मायके आ गईं ,जहां पर उनके नाना पंडित चुन्न