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Showing posts from October 25, 2021

जगदीश स्वामीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni

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जगदीश स्वमीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni जगदीश स्वामीनाथ( Jagdeesh Swaminathan ) भारतीय चित्रकला क्षेत्र के वो सितारे थे जिन्होंने अपनी एक अलग फक्कड़ जिंदगी व्यतीत किया ,उन्होंने अपने बहुआयामी व्यक्तित्व में जासूसी उपन्यास भी लिखे तो सिनेमा के टिकट भी बेचें।उन्होंने कभी भी अपनी सुख सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया ।   जगदीश स्वामीनाथन का बचपन -(Childhood of Jagdish Swminathan) जगदीश स्वामीनाथन का जन्म 21 जून 1928 को शिमला के एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ।इनके पिता एन. वी. जगदीश अय्यर एक परिश्रमी कृषक थे एवं उनकी माता जमींदार घराने की थी  और तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे। जगदीश स्वामीनाथन उनका प्रारंभिक जीवन शिमला में व्यतीत हुआ था ।शिमला में ही प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की यहां पर इनके बचपन के मित्र निर्मल वर्मा और रामकुमार भी थे। जगदीश स्वामीनाथन बचपन से बहुत जिद्दी स्वभाव के थे,उनकी चित्रकला में रुचि बचपन से थी पर अपनी जिद्द के कारण उन्होंने कला विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया। उन्होंने हाईस्कूल पास करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की PMT परीक्षा (प्री मेडिकल टेस्ट) में

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी

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  दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी -- दीनदयाल उपाध्याय भारतीय पॉलिटिशियन,संगठनकर्ता और एक सामाजिक चिंतक थे,उन्होंने हिंदुत्व के विचारधारा को आगे बढ़ाया उनके  संघर्षपूर्ण सादे जीवन यापन और राष्ट्र के लिए चिंतन संघर्षपूर्ण जीवन से न सिर्फ हिंदुत्व को धार दी बल्कि एक जनमानस में उनका पड़ा।   दीनदयाल उपाध्याय का बचपन- -       पंडित   दीनदयाल उपाध्याय का जन्म सितंबर 1916  को मथुरा जिले के एक गांव नगला चंद्रभान में हुआ था,दीनदयाल उपाध्याय को बचपन से ही अत्यधिक संघर्ष करना पड़ा।यद्यपि दीनदयाल उपाध्याय के पिता भगवती प्रसाद उपाध्याय रेलवे में जलेसर में सहायक स्टेशन मास्टर थे,तथा उनकी माता एक धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं।  दीनदयाल एक छोटे भाई शिवदयाल थे जो उनसे दो वर्ष छोटे थे। दीनदयाल के बाबा का नाम हरिराम उपाध्याय था जो एक ज्योतिषी थे। उन्होंने उनकी जन्म कुंडली देखकर बताया था कि ये बालक अपने जीवन मे अत्यधिक यश प्राप्त करेगा और अविवाहित रहेगा।       दीनदयाल उपाध्याय जब तीन वर्ष के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया ,तब उनकी माता अपने दोनो  पुत्रों  के साथ अपने मायके आ गईं ,जहां पर उनके नाना पंडित चुन्न