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Showing posts from October 23, 2021

जगदीश स्वामीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni

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जगदीश स्वमीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni जगदीश स्वामीनाथ( Jagdeesh Swaminathan ) भारतीय चित्रकला क्षेत्र के वो सितारे थे जिन्होंने अपनी एक अलग फक्कड़ जिंदगी व्यतीत किया ,उन्होंने अपने बहुआयामी व्यक्तित्व में जासूसी उपन्यास भी लिखे तो सिनेमा के टिकट भी बेचें।उन्होंने कभी भी अपनी सुख सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया ।   जगदीश स्वामीनाथन का बचपन -(Childhood of Jagdish Swminathan) जगदीश स्वामीनाथन का जन्म 21 जून 1928 को शिमला के एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ।इनके पिता एन. वी. जगदीश अय्यर एक परिश्रमी कृषक थे एवं उनकी माता जमींदार घराने की थी  और तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे। जगदीश स्वामीनाथन उनका प्रारंभिक जीवन शिमला में व्यतीत हुआ था ।शिमला में ही प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की यहां पर इनके बचपन के मित्र निर्मल वर्मा और रामकुमार भी थे। जगदीश स्वामीनाथन बचपन से बहुत जिद्दी स्वभाव के थे,उनकी चित्रकला में रुचि बचपन से थी पर अपनी जिद्द के कारण उन्होंने कला विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया। उन्होंने हाईस्कूल पास करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की PMT परीक्षा (प्री मेडिकल टेस्ट) में

M. lakshmikant|polity boo| review हिंदी में

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  M. lakshmikant polity book review हिंदी में M. lakshmikant की  Polity book बुक भारतीय संविधान और राजव्यवस्था की सबसे बेहतरीन बुक्स में गिनी जाती है,हर सिविल सेवा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट के लिए ये बहुत ही लुभावनी किताब है क्योंकि इस किताब में हर तथ्य का विवेचन क्रमबद्ध सरल भाषा मे दिया गया है जिससे जो छात्र राजनीति विज्ञान और संविधान का इससे पूर्व अध्ययन नहीं किया हो वो  छात्र भी इसको रुचि पूर्वक आत्मसात कर सकता है।       उसे  संविधान में दिए गए आर्टिकल से भय नही लगता,वह संविधान के निर्माण में 1600 ब्रिटिश कॉलोनी के विकास और उनके द्वारा निर्मित विभिन्न चार्टर के बारे में जानकारी प्राप्त करता है ,तत्त्पश्चात संविधान के अंकुरण को विकसित होता हुआ देखता है विभिन्न गवर्नर और गवर्नर जनरलों वायसरायों के समय की कैसे धीरे धीरे नागरिकों को विधायिका में प्रवेश करने की इजाजत मिली और अंततः 1935 का अधिनियम आया जो वर्तमान संविधान का बेस कहलाता है।        आप जब इस पुस्तक को पढ़ेंगे तो आपको प्रस्तावना (Preamble) से ही संविधान पर  एक झलक दिख जाती है ,आगे इस पुस्तक में करीब 940 पेज 80 चैप्टर और 66