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Showing posts from November 1, 2019

असित कुमार हलदार आर्टिस्ट की biography

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 असित कुमार हाल्दार आर्टिस्ट की बायोग्राफी असित कुमार हाल्दार एक कल्पना शील, भावप्रवण चित्रकार के साथ साथ अच्छे साहित्यकार ,शिल्पकार, कला समालोचक,चिंतक,कवि,विचारक भी थे। असित कुमार हाल्दार का प्रारंभिक जीवन--- असित कुमार हलदार का जन्म सन 1890 पश्चिम बंगाल के जोड़ासांको नामक स्थल में  स्थित टैगोर भवन  के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इनकी नानी रवींद्र नाथ टैगोर की बहन थीं।   असित कुमार हलदार के बाबा  का नाम राखालदास हाल्दार था  जो उस समय लंदन विश्वविद्यालय में संस्कृत विषय के प्राध्यापक थे, और पिता सुकुमार हाल्दार भी कला में निपुण थे  ,उनकी प्रेरणा से असित कुमार हलदार को भी कला में अभिरुचि जगी। साथ मे वो बचपन से ही ग्रामीणों के बीच रहकर उनकी पटचित्र कला को गौर से देखा और समझा था।  15 वर्ष की आयु में हाल्दार को कलकत्ता के गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला मिल गया , यहां पर इनको गुरु के रूप में  अवनींद्र नाथ टैगोर का सानिध्य मिला। उनसे उन्होंने कला की बारीकियों को सीखा,  यहां पर इन्होंने जादू पाल और बकेश्वर पाल से मूर्तिकला सीखी।    यहां आपको पर असित कुमार हाल्दार को अपने कक्षा में अन्

हिन्दू पूजा अनुष्ठान में नारियल क्यों तोड़ा जाता है

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   हिन्दू पूजा में नारियल क्यों तोड़ा जाता है ,कारण क्या है?     भारत में हिन्दू पूजा में नारियल फल का अत्यधिक महत्व है यज्ञ में या कलश निर्माण में नारियल का महत्व है और उसकी पूजा होती है । यहां तक  कहीं कहीं मृतक के अंतिम संस्कार में भी नारियल का प्रयोग होता है।        सनातन धर्म में नारियल को श्रीफल कहा गया है ,नारियल को भगवान विष्णु  ने लक्ष्मी और नारियल पेंड को समुद्र मन्थन के बाद प्राप्त किया ,इसीलिए इस फल को श्रीफल कहा गया है , इसमें पाये जाने वाले तीन काले गड्ढे  भगवान शिव के  तीन नेत्र के प्रतीक हैं । नारियल का ऊपरी खोल अत्यधिक कठोर होता है और अंदर सफेद फल होता है , जो पवित्रता और शांति को प्रकट करता है , नारियल को फोड़ा जाना ये  दर्शाता है कि अंदर के अभिमान को तोड़ने के बाद ही ख़ुद के आंतरिक सत्य और पवित्रता को जाना जा सकता है ,देवी के मन्दिर या अन्य पूजन से पूर्व नारियल फोड़ना यही दिखाता है कि  ईश्वर के पास नमन से पूर्व ख़ुद के अंदर व्याप्त घमण्ड को खत्म करना होगा।       महिलाओं को नारियल फ़ल को तोड़ने की मनाही की गई है ,क्योंकि ये माना जाता है कि महिलाओं के गर्भ धारण की शक्ति प्र

Ancient Indian time calculation technic

विश्व का सबसे बड़ा भारतीय और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र (ऋषि मुनियो का अनुसंधान ) ■ क्रति = सैकन्ड का  34000 वाँ भाग ■ 1 त्रुति = सैकन्ड का 300 वाँ भाग ■ 2 त्रुति = 1 लव , ■ 1 लव = 1 क्षण ■ 30 क्षण = 1 विपल , ■ 60 विपल = 1 पल ■ 60 पल = 1 घड़ी (24 मिनट ) , ■ 2.5 घड़ी = 1 होरा (घन्टा ) ■ 24 होरा = 1 दिवस (दिन या वार) , ■ 7 दिवस = 1 सप्ताह ■ 4 सप्ताह = 1 माह , ■ 2 माह = 1 ऋतू ■ 6 ऋतू = 1 वर्ष , ■ 100 वर्ष = 1 शताब्दी ■ 10 शताब्दी = 1 सहस्राब्दी , ■ 432 सहस्राब्दी = 1 युग ■ 2 युग = 1 द्वापर युग , ■ 3 युग = 1 त्रैता युग , ■ 4 युग = सतयुग ■ सतयुग + त्रेतायुग + द्वापरयुग + कलियुग = 1 महायुग ■ 76 महायुग =  1 मनवन्तर ,      24 मन्वन्तर= 1 कल्प (1000 महायुग = 1 कल्प) ■ 1 नित्य प्रलय = 1 महायुग (धरती पर जीवन अन्त और फिर आरम्भ ) ■ 1 नैमितिका प्रलय = 1 कल्प ।(देवों का अन्त और जन्म ) ■ महाकाल = 730 कल्प ।(ब्राह्मा का अन्त और जन्म ) सम्पूर्ण विश्व का सबसे बड़ा और वैज्ञानिक समय गणना तन्त्र यही है। जो हमारे देश भारत में बना। ये हमारा भारत जिस पर हमको गर्व है l दो लिंग : नर

मध्य पाषाण काल The Mesolithic age, middle Stone age ,madhya pashan kaal

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        मध्यपाषाण काल (Mesolithic Age) या middle stone age-- मध्य पाषाण काल के विषय में जानकारी सर्वप्रथम 1967 में सी एल कार्लाइल ने की जब उन्होंने लघु पाषाण उपकरण खोज निकाले ,ये लघु पाषाण उपकरण आधे इंच से पौन इंच तक थे, या कह सकते हो एक से आठ सेंटीमीटर के औजार थे। भारत मे मानव अस्थिपंजर मध्यपाषाण काल से ही मिलने प्रारम्भ हुए, भारत मे मध्य पाषाण कालीन पुरास्थल राजस्थान,गुजरात , बिहार ,मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र,आंध्रप्रदेश, कर्नाटक ,आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु,केरल,उत्तर प्रदेश के विभिन्न भागों में मध्यपाषाण कालीन लघु पाषाण कालीन वस्तुएं उत्खनन में प्राप्त हुईं हैं,यदि सबसे मुख्य स्थलों की बात करें तो  इनमे से एक बागोर है जो राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित है यहां 1968-1970 के बीच वी एन मिश्रा ने उत्खनन करवाया,यहां से मानव कंकाल मिला है,    आगे मध्य प्रदेश  आतें है तो यहां तो यहां होशंगाबाद जिले में अवस्थित  आदमगढ़ शैलाश्रय से 25 हजार   लघु पाषाण उपकरण प्राप्त हुए।    इसी प्रकार रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका के शैलाश्रय और गुफाओं से मध्यपाषाण कालीन उपकरण प्राप्त हुए ।      उत्तर प