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उत्तरवैदिक काल का इतिहास

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  उत्तरवैदिक काल का  इतिहास उत्तर वैदिक काल 1000 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व तक का है ,इस काल में चार वेदों में तीन वेद यजुर्वेद, सामवेद,अथर्वेद की रचना हुई साथ में ब्राम्हण ग्रन्थ ,आरण्यक ,उपनिषद ग्रन्थ भी लिखे गये ,इन ग्रंथों में वर्णित तथ्यों के आधार पर तथा उत्खनन में चित्रित धूसर मृदभांड से,   लोहे के प्रयोग से जो अतरंजीखेड़ा ,नोह से   मिले हैं उसके आधार पर  उस समय की जानकारी  मिलती है जिसमें  ज्ञात होता है कि कबाइली तत्व कमजोर हो गए थे क्षेत्रीय राज़्यों का उदय हुआ था ,कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था का जन्म हो चुका था ,वर्ण व्यवस्था में  जटिलता आ चुकी थी। धर्म में यज्ञ के कर्मकांड में जटिलता आ चुकी थी। साथ में उपनिषदों में यज्ञ को आडम्बर बताकार ज्ञान और ध्यान द्वारा ही ईश्वर से जुड़ने का सरल मार्ग प्रतिपादित किया गया था। उत्तरवैदिक काल में सामाजिक और  प्रशासनिक व्यवस्था------ उत्त रवैदिक काल मे  पंजाब से बाहर गंगा यमुना के दोआब तक आ गए ,उत्तरवैदिक साहित्य से जानकारी मिलती है कि आर्य क्रमिक रूप से पूरब की तऱफ बढ़ रहे थे,तथा प्रसार होने से नवीन  राज्यों का निर्माण हो रहा था ,कुछ श्रेष्ठ जनों