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अंध भक्ति किसे कहते हैं जानिए कौन होते हैं अंधभक्त

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  अंधभक्त किसे कहते हैं? अंध भक्त का शाब्दिक अर्थ- अंधभक्त का तात्पर्य हिन्दी शब्दावली के अनुसार वो भक्त जो आंख बंद कर दुसरों का अनुसरण करें। अनुयायी जो अपने नेता पर अधिक भरोसा करे । और  अपने विवेक का इस्तेमाल बिल्कुल न करे।     अन्ध शब्द के अन्य मिश्रित शब्द अंध प्रेम-Blind love अंध भक्त-Blind supporter अंध विश्वास-  Superstition ,Blind Faith अंध राष्ट्रवाद -Blind Patriotism अंध-Blind भक्त- Worshiper भक्ति शब्द  का प्रयोग ईश्वर भक्ति ,मातृ भक्ति,पितृ भक्ति ,राष्ट्र भक्ति ,  आदि भक्त वो हैं जो   जो भक्ति करते है जो  किसी में श्रद्धा और आस्था और  विश्वास रखतें हैं।  जैसे -शिव भक्त , कृष्ण भक्त ,देवी भक्त ,राष्ट्र भक्त आदि हैं। जो भक्ति करते है अंधभक्त का तात्पर्य किसी भी व्यक्ति पर ऑंखमूँदकर विश्वास करने वाला अनुयायी। जिसमें व्यक्ति अपने विवर्क और तर्क का प्रयोग न करे। निरीश्वरवादी बौद्ध अन्य धर्म अनुयाइयों के धर्म ग्रंथ में अकल्पनीय बातों का खंडन करते है ,वो हिन्दू ,मुस्लिम ,ईसाइयों के धर्म ग्रथों में दिए गए कई कथानकों का खंडन करते है और कपोल कल्पित कहते हैं  और इन धर्मों में आस्था रख

उत्तरवैदिक काल का इतिहास

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  उत्तरवैदिक काल का  इतिहास उत्तर वैदिक काल 1000 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व तक का है ,इस काल में चार वेदों में तीन वेद यजुर्वेद, सामवेद,अथर्वेद की रचना हुई साथ में ब्राम्हण ग्रन्थ ,आरण्यक ,उपनिषद ग्रन्थ भी लिखे गये ,इन ग्रंथों में वर्णित तथ्यों के आधार पर तथा उत्खनन में चित्रित धूसर मृदभांड से,   लोहे के प्रयोग से जो अतरंजीखेड़ा ,नोह से   मिले हैं उसके आधार पर  उस समय की जानकारी  मिलती है जिसमें  ज्ञात होता है कि कबाइली तत्व कमजोर हो गए थे क्षेत्रीय राज़्यों का उदय हुआ था ,कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था का जन्म हो चुका था ,वर्ण व्यवस्था में  जटिलता आ चुकी थी। धर्म में यज्ञ के कर्मकांड में जटिलता आ चुकी थी। साथ में उपनिषदों में यज्ञ को आडम्बर बताकार ज्ञान और ध्यान द्वारा ही ईश्वर से जुड़ने का सरल मार्ग प्रतिपादित किया गया था। उत्तरवैदिक काल में सामाजिक और  प्रशासनिक व्यवस्था------ उत्त रवैदिक काल मे  पंजाब से बाहर गंगा यमुना के दोआब तक आ गए ,उत्तरवैदिक साहित्य से जानकारी मिलती है कि आर्य क्रमिक रूप से पूरब की तऱफ बढ़ रहे थे,तथा प्रसार होने से नवीन  राज्यों का निर्माण हो रहा था ,कुछ श्रेष्ठ जनों