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Showing posts from January 10, 2021

Squat व्यायाम क्या है,SQUAT पांच फ़ायदे।

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 SQUAT व्यायाम क्या है -  आप squat व्यायाम से शरीर को फिट रख सकतें हैं वैसे तो शरीर को फिट रखने के लिए बहुत सी exercise करते है , जो आपको चुस्त दुरुस्त रखतीं है, आपकी मसल्स को मजबूती प्रदान करता है ,परंतु सारी एक्सरसाइज के बाद भी आपने अपने दैनिक अभ्यास में squat को सम्मिलित नहीं किया तो आप बहुत कुछ छोड़ रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप आज से ही sqaut को अपने रोज के एक्सरसाइज में सम्मिलित करें । यह अभ्यास महिला और पुरुष दोनों के लिए फायदेमंद है। इस एक्सरसाइज में प्रारम्भ में आपको समस्या आ सकती है परंतु धीरे धीरे रोज़ाना अभ्यास से ये बहुत सरल लगने लगता है। प्रारम्भ में आप इसको करने में किसी चीज का सहारा लेकर कर सकते हैं ,परंतु बाद में आप धीरे धीरे बिना सहारे का अभ्यास कर सकते हैं। इस एक्सरसाइज की विशेषता यह है कि इसे कहीं भी बिना इक्विपमेंट के  भी किया जा सकता है। यह एक्सरसाइज केवल  शरीर के एक भाग को ही मजबूत नही करता बल्कि पूरे शरीर को संतुलित रूप से मजबूत करता है,साधारण तौर पर ऐसा लगता है कि इस एक्सरसाइज से केवल टाँगों(legs)को मज़बूती मिलती है परंतु ऐसी बात नहीं है इस एक्सरसाइज से पूरा शर

Jogen chaudhari kalakar ki jivni

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    जोगेन  चौधरी कलाकार की जीवनी : जोगेन चौधरी का बचपन---   jogen chaudhari (जोगेन चौधरी)  केे जन्म 19 फरवरी 1939 को पूर्वी बंगाल  (आज का बांग्लादेश)  के फरीदपुर क़स्बे मे हुआ था , इनके पिता प्रमथ नाथ चौधरी  ब्राह्मण जमींदार थे , इनके पिता ने गांव  में होने  वाले नाटकों  में   कई  पौराणिक आख्यानों को  दीवार में  पेंट किया था और बहुत से हिंदू आईकॉन  के चित्र भी बनाए थे ,जोगेंन चौधरी की माता अल्पना ड्राइंग करने में दक्ष थीं।       1947 तक  जोगेन  चौधरी गांव के परिवेश  मेंं  ही रहे  1947 में  भारत विभाजन के ठीक पहले  जोगेन और उनके पिता कोलकाता शिफ्ट हो   गए  और 1948 के बाद पूरा परिवार कोलकाता में आकर के बस गया  1951 तक उनका पूरा परिवार अपने चाचा के पुलिस डिपार्टमेंट के क्वार्टर में ही रहता रहा ; इसी मकान में   जोगेन ने दीवारों पर अपनी पहली पेंटिंग बनाई  ,1951 में  जोगेन चौधरी का परिवार  शहीद नगर कॉलोनी ढाकुरिया कोलकाता के दूसरे घर में शिफ्ट हो गया         जोगेन चौधरी  शिक्षा और नौकरी   -- 1962 में  जोगेन चौधरी हैंडलूम बोर्ड कोलकाता में डिजाइनर की नौकरी पा गए  1967 में 5 महीने के लिए लंद