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Showing posts from November 27, 2021

Satish Gujral Artist की जीवनी हिंदी में

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    सतीश गुजराल आर्टिस्ट की जीवनी--  Biography of  Satish Gujral Artist --   सतीश गुजराल बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार,मूर्तिकार वास्तुकार,लेखक हैं जिनका जन्म 25 दिसंबर 1925 को झेलम पंजाब (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था।इनको देश के दूसरे सर्वोच्च सिविलियन अवार्ड पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।इनके बड़े भाई इंद्रकुमार गुजराल 1997 से 1998 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे है।जो भारत के 13 वें प्रधानमंत्री थे। सतीश गुजराल का बचपन--    जब सतीश गुजराल मात्र 8 साल के थे तब उनके साथ एक दुर्घटना हो गई उनका पैर  एक नदी के पुल में फिसल गया वह जल धारा में पड़े हुए पत्थरो से गंभीर चोट लगी पर  उन्हें बचा लिए गया,इस दुर्घटना के  कारण उनकी टांग टूट गई तथा सिर में गंभीर चोट आई,सिर में गंभीर चोट के कारण उनको एक  सिमुलस नामक बीमारी ने घेर लिया जिससे  उनकी श्रवण शक्ति चली गई। उनकी श्रवण शक्ति खोने,पैर में चोट लगने के कारण उनको लोग लंगड़ा,बहरा गूंगा समझने लगे।वह पांच साल बिस्तर में ही लेटे रहे,यह समय उनके लिए बहुत ही संघर्ष पूर्ण था।इसलिए वह अकेले में खाली समय बैठकर रेखाचित्र बनाने लगे। 

बीना दास वीरांगना की जीवनी हिंदी में

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बीना दास वीरांगना की जीवनी--  परतंत्रता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए अनेकों क्रांतिकारियों ने शहादत दी और कुछ ने कठोर यातनाएं सही ,सिर्फ पुरुष ही आगे नहीं रहे बल्कि कई वीरांगनाओं ने उनके साथ कदमताल करते हुए उनका पूरा साथ दिया और कई क्रान्तिकारी महिलाओं ने ख़ुद मोर्चा भी संभाला और खुद को देश के लिए न्यौछावर कर दिया उनमें से एक नाम शुमार है बीना दास का जिनके नाम से ही अंग्रेज भयभीत हो जाते थे। बीना दास का बचपन-- बीना दास का जन्म 24 अगस्त 1911 को बंगाल के कृष्णा नगर में हुआ था,बीना के पिता बेनीमाधवदास एक प्रसिद्ध अध्यापक थे उनके शिष्यों के फेहरिस्त में सुभाष चन्द्र बोस के नाम भी आता है।    बीना दास   की माता सरला एक सोशल वर्कर थीं। जो पुन्याश्रम नामक संस्था की संचालिका थीं ,इस संस्था का काम मुख्य क्रांतिकारियों की सहायता करना, उन क्रांतिकारियों के लिए हथियार का इंतजाम करना। शिक्षा-- बीना दास ने सेंट जान डियोसिन गर्ल्स कॉलेज सर हाइस्कूल किया ,उनकी बहन कल्याणी दास एक स्वतंत्रता सेनानी थीं।   बीना दास ने हाइस्कूल की  परीक्षा के बाद सुभाष चन्द्र बोस की संस्था बंगाल वालंटियर कार्पस में सम्मिलि