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Showing posts from January 15, 2021

जीका वायरस रोग के लक्षण और बचाव

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 जीका वायरस रोग के लक्षण और बचाव--     एक साल पूर्व जीका वायरस का प्रकोप केरल और कुछ दक्षिणी भारत के राज्यों तक सुनने को मिल रहा था,आज 2021 में जीका वायरस के मरीज उत्तर भारत तक पैर पसार चुका है ,मध्यप्रदेश,गुजरात,राजस्थान  में कई जिलों में पैर पसार रहा है जीका वायरस  छोटे शहरों कस्बों तक भी फैल रहा है ,इस रोग के लक्षण वाले मरीज़ उत्तर प्रदेश के,इटावा ,कन्नौज,जालौन ,फतेहपुर में मिले हैं। उत्तर भारत और मध्य भारत तक इसके मरीज  बहुतायत में मिले हैं। कैसे फैलता है जीका वायरस-- जीका वायरस का संक्रमण मच्छरों के द्वारा होता है,वही मच्छर जिनसे डेंगू और चिकुनगुनिया होता है, यानी मच्छर काटने के बाद ही जीका वायरस फैलता है। थोड़ा सा अंतर भी है डेंगू वायरस और जीका वायरस में ,जीका वायरस  से यदि एक बार कोई संक्रमित हो जाता है ,और वह अपने साथी से शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे भी संक्रमित कर सकता है,साथ मे संक्रमित माता के पेट मे पल रहे गर्भस्थ शिशु भी संक्रमित हो सकता है, साथ मे  जीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति यदि कहीं ब्लड डोनेट करता है ,तो उस  ब्लड में भी जीका वायरस होता है। इस प्रकार ये खून जिसके श

निकोलस रोरिक आर्टिस्ट की जीवनी

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निकोलस रोरिक आर्टिस्ट की जीवनी: निकोलस रोरिक रूस के एक प्रसिद्ध आर्टिस्ट और साहित्यकार दार्शनिक थे जिन्होंने अपने जीवन मे विश्व के कई देशों का भ्रमण किया और अंतिम जगह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में  एक स्थान पर अपना अंतिम पड़ाव डाला और यही इनकी मृत्यु भी हुई ।      इनका जन्म सेंटपीटर्सबर्ग USSR (  सोवियत रुस ) में 9 अक्टूबर 1874 को हुआ था,इनके माता पिता रशियन मूल के ही थे।   शिक्षा--- इन्होंने 1853 में सेंटपीटर्स बर्ग विश्विद्यालय और इम्पीरियल अकादमी में एक साथ दाखिला लिया और 1897 में आर्टिस्ट की डिग्री प्राप्त की तो 1898 में लॉ की डिग्री प्राप्त की।   इन्होंने शिक्षा प्राप्ति के बाद इम्पीरियल सोसाइटी ऑफ आर्ट ग्रुप में प्रारंभिक शिक्षण कार्य किया 1906 से1917 तक  इस सोसाइटी के लिए सेवा दी।      इनकी प्रारम्भिक रुचि आर्कियोलॉजी तथा स्टेज डिजाइनिंग में थी,उन्होंने कई थियेटर के रंगमंच साजसज्जा में ख्याति प्राप्त की।      इसी समय ये अपने पत्नी से प्रभावित होकर भारत के धर्म और दर्शन को जाने में रुचि जगाई ,उन्होंने रामकृष्ण परमहंस ,विवेकानंद के दर्शन तथा भगवतगीता के दर्शन को जाना समझा। साथ मे वो