Posts

Showing posts from January 15, 2021

जगदीश स्वामीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni

Image
जगदीश स्वमीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni जगदीश स्वामीनाथ( Jagdeesh Swaminathan ) भारतीय चित्रकला क्षेत्र के वो सितारे थे जिन्होंने अपनी एक अलग फक्कड़ जिंदगी व्यतीत किया ,उन्होंने अपने बहुआयामी व्यक्तित्व में जासूसी उपन्यास भी लिखे तो सिनेमा के टिकट भी बेचें।उन्होंने कभी भी अपनी सुख सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया ।   जगदीश स्वामीनाथन का बचपन -(Childhood of Jagdish Swminathan) जगदीश स्वामीनाथन का जन्म 21 जून 1928 को शिमला के एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ।इनके पिता एन. वी. जगदीश अय्यर एक परिश्रमी कृषक थे एवं उनकी माता जमींदार घराने की थी  और तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे। जगदीश स्वामीनाथन उनका प्रारंभिक जीवन शिमला में व्यतीत हुआ था ।शिमला में ही प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की यहां पर इनके बचपन के मित्र निर्मल वर्मा और रामकुमार भी थे। जगदीश स्वामीनाथन बचपन से बहुत जिद्दी स्वभाव के थे,उनकी चित्रकला में रुचि बचपन से थी पर अपनी जिद्द के कारण उन्होंने कला विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया। उन्होंने हाईस्कूल पास करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की PMT परीक्षा (प्री मेडिकल टेस्ट) में

निकोलस रोरिक आर्टिस्ट की जीवनी

Image
निकोलस रोरिक आर्टिस्ट की जीवनी: निकोलस रोरिक रूस के एक प्रसिद्ध आर्टिस्ट और साहित्यकार दार्शनिक थे जिन्होंने अपने जीवन मे विश्व के कई देशों का भ्रमण किया और अंतिम जगह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में  एक स्थान पर अपना अंतिम पड़ाव डाला और यही इनकी मृत्यु भी हुई ।      इनका जन्म सेंटपीटर्सबर्ग USSR (  सोवियत रुस ) में 9 अक्टूबर 1874 को हुआ था,इनके माता पिता रशियन मूल के ही थे।   शिक्षा--- इन्होंने 1853 में सेंटपीटर्स बर्ग विश्विद्यालय और इम्पीरियल अकादमी में एक साथ दाखिला लिया और 1897 में आर्टिस्ट की डिग्री प्राप्त की तो 1898 में लॉ की डिग्री प्राप्त की।   इन्होंने शिक्षा प्राप्ति के बाद इम्पीरियल सोसाइटी ऑफ आर्ट ग्रुप में प्रारंभिक शिक्षण कार्य किया 1906 से1917 तक  इस सोसाइटी के लिए सेवा दी।      इनकी प्रारम्भिक रुचि आर्कियोलॉजी तथा स्टेज डिजाइनिंग में थी,उन्होंने कई थियेटर के रंगमंच साजसज्जा में ख्याति प्राप्त की।      इसी समय ये अपने पत्नी से प्रभावित होकर भारत के धर्म और दर्शन को जाने में रुचि जगाई ,उन्होंने रामकृष्ण परमहंस ,विवेकानंद के दर्शन तथा भगवतगीता के दर्शन को जाना समझा। साथ मे वो