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Showing posts from May 2, 2021

अंध भक्ति किसे कहते हैं जानिए कौन होते हैं अंधभक्त

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  अंधभक्त किसे कहते हैं? अंध भक्त का शाब्दिक अर्थ- अंधभक्त का तात्पर्य हिन्दी शब्दावली के अनुसार वो भक्त जो आंख बंद कर दुसरों का अनुसरण करें। अनुयायी जो अपने नेता पर अधिक भरोसा करे । और  अपने विवेक का इस्तेमाल बिल्कुल न करे।     अन्ध शब्द के अन्य मिश्रित शब्द अंध प्रेम-Blind love अंध भक्त-Blind supporter अंध विश्वास-  Superstition ,Blind Faith अंध राष्ट्रवाद -Blind Patriotism अंध-Blind भक्त- Worshiper भक्ति शब्द  का प्रयोग ईश्वर भक्ति ,मातृ भक्ति,पितृ भक्ति ,राष्ट्र भक्ति ,  आदि भक्त वो हैं जो   जो भक्ति करते है जो  किसी में श्रद्धा और आस्था और  विश्वास रखतें हैं।  जैसे -शिव भक्त , कृष्ण भक्त ,देवी भक्त ,राष्ट्र भक्त आदि हैं। जो भक्ति करते है अंधभक्त का तात्पर्य किसी भी व्यक्ति पर ऑंखमूँदकर विश्वास करने वाला अनुयायी। जिसमें व्यक्ति अपने विवर्क और तर्क का प्रयोग न करे। निरीश्वरवादी बौद्ध अन्य धर्म अनुयाइयों के धर्म ग्रंथ में अकल्पनीय बातों का खंडन करते है ,वो हिन्दू ,मुस्लिम ,ईसाइयों के धर्म ग्रथों में दिए गए कई कथानकों का खंडन करते है और कपोल कल्पित कहते हैं  और इन धर्मों में आस्था रख

हनुमान जी की आरती Hanuman ji ki Arti

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हनुमान जी की आरती- (पंचमुखी हनुमान जी) आरती: हनुमान जी की आरती कीजै हनुमान लला की,दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरिवर कांपै,रोग दोष जाके निकट न झाँपै। अंजनि पुत्र महा बलदाई,संतन के प्रभु सदा सहाई। दे बीरा रघुनाथ पठाये,लंका जारि सिय सुध लाये। लंका सो कोट समुद्र सी खाई ,जात पवनसुत बार न लाई। लंका जारि असुर संहारे,सियारामजी के काज सँवारे। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,आनि सजीवन प्राण उबारे। पैठि पताल तोरि जम-कारे, अहिरावन की भुजा उखारे। बाएं  भुजा असुर दल मारे,दाहिनी भुजा संतजन तारे। सुर नर मुनिजन आरती उतारें,जै जै जै हनुमान उचारें। कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई। जो हनुमान जी की आरती गावै ,बसि बैकुंठ परम पद पावै। लंक विध्वंस किये रघुराई।तुलसीदास स्वामी कीरत  गाई। आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।   Hanuman Aarti (English)  Aarti kije hanuman lala ki  dusht dalan ragunath kala ki  aarti kije hanuman lala ki  dusht dalan ragunath kala ki  aarti kije hanuman lala ki  jake bal se girivar kaanpe  rog dosh ja ke nikat na jhaanke  anjani putra maha baldaaee  santan k