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Showing posts from May 2, 2021

विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी

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 विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी: मोरिस डेविस का प्रारंभिक जीवन विलियम मोरिस डेविस का जन्म फिलाडेल्फिया  यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में हुआ था । डेविस ने हारवर्ड  से1869 में स्नातक की उपाधि ग्रहण की,सन 1870 से 1873 तक वह अर्जेंटीना के कार्डोबा के मौसम विज्ञान वेधशाला में सहायक के रूप में काम किया , हार्वर्ड से वापस लौटने के बाद इन्होंने वह भूगर्भीय व भूआकृति विज्ञान का अध्ययन किया,सन 1876 में उसे सहायक प्रोफेसर का शेलर का सहायक बना और उनके साथ रहकर भूगर्भ विज्ञान और भूआकृति विज्ञान का अध्ययन करने लगा 1878 में अस्सिटेंट प्रोफ़ेसर बने और 1899 में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए  1890  विलियम डेविस ने सार्वजनिक  स्कूलों में भूगोल के मानकों को निर्धारित किया उनके अनुसार प्राथमिक विद्यालयों ,माध्यमिक विद्यालयों में भूगोल को विज्ञान की तरह शिक्षा देना चाहिए ,डेविस ने भूगोल को विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाये जाने के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम बनाने में सहायता प्रदान की। 1904 में वह अमेरिका के सारे प्रशिक्षित भूगोलवेत्ताओं से मुलाकात की ,और इन शिक्षाविदों का संगठन तैयार किया। 1904 में एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन जिओग

हनुमान जी की आरती| Hanuman ji ki Arti

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हनुमान जी की आरती- (पंचमुखी हनुमान जी) आरती: हनुमान जी की आरती कीजै हनुमान लला की,दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरिवर कांपै,रोग दोष जाके निकट न झाँपै। अंजनि पुत्र महा बलदाई,संतन के प्रभु सदा सहाई। दे बीरा रघुनाथ पठाये,लंका जारि सिय सुध लाये। लंका सो कोट समुद्र सी खाई ,जात पवनसुत बार न लाई। लंका जारि असुर संहारे,सियारामजी के काज सँवारे। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,आनि सजीवन प्राण उबारे। पैठि पताल तोरि जम-कारे, अहिरावन की भुजा उखारे। बाएं  भुजा असुर दल मारे,दाहिनी भुजा संतजन तारे। सुर नर मुनिजन आरती उतारें,जै जै जै हनुमान उचारें। कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई। जो हनुमान जी की आरती गावै ,बसि बैकुंठ परम पद पावै। लंक विध्वंस किये रघुराई।तुलसीदास स्वामी कीरत  गाई। आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।   Hanuman Aarti (English)  Aarti kije hanuman lala ki  dusht dalan ragunath kala ki  aarti kije hanuman lala ki  dusht dalan ragunath kala ki  aarti kije hanuman lala ki  jake bal se girivar kaanpe  rog dosh ja ke nikat na jhaanke  anjani putra maha baldaaee  santan k