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Showing posts from March 9, 2021

Review of fact history four बुक|किरण प्रकाशन|आर्य कॉप्टिशन| ज्ञान पुस्तक|महेश बरनवाल

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  Review of fact history four बुक: ज्ञान पुस्तक,महेश बरनवाल किरण प्रकाशन,आर्य कॉप्टिशन विषय प्रवेश--  यदि कोई छात्र इंटरमीडिट के एग्जाम पास करने के बाद कॉम्पटीशन लाइन में प्रवेश करता है तो उसे पुस्तको के चयन में बहुत कंफ्यूज़न होता है। इस review से इतिहास की सही बुक लेने में मदद मिलेगी। Review of four books  आज हम बाज़ार में उपलब्ध चार फैक्ट आधारित बुक्स का रिव्यु करता हूँ ।  क्योंकि ज़्यादातर वनडे एग्जाम रेलवे,एस एस सी, लेखपाल या पटवारी का एग्जाम ग्राम विकास अधिकारी ,कांस्टेबल का एग्जाम,SI का एग्जाम,असिस्टेन्स टीचर्स,DSSB आदि के एग्जाम में इतिहास के फैक्चुअल प्रश्न पूंछे जाते हैं हालांकि वो GS पर आधारित हैं पर उन प्रश्नों हल करने के लिए भी कुछ डीप स्टडी जरूरी है। इसके लिए आप या तो आप ख़ुद नोट्स तैयार करें या फ़िर इन बुक्स की मदद लेकर विभिन्न वनडे एग्जाम में हिस्ट्री के प्रश्नों को आसानी से सही कर पाने में सक्षम हो पाते हैं।  पहली पुस्तक की बात करते है जो इतिहास के फैक्ट पर आधारित है। ज्ञान इतिहास की । इस पुस्तक का संंपादन ज्ञान चंद यादव ने किया है।    इस बुक में इतिहास के बिन्दुओं को क्रमब

देवीप्रसाद रॉय चौधरी आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में|

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  देवीप्रसाद रॉय चौधरी आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में "कला किसी की बपौती नहीं कोई भी व्यक्ति इसे सीख सकता है" ये शब्द प्रसिद्ध कलाकार और मूर्तिकार देवीप्रसाद रायचौधरी के थे। (ट्राइंफ ऑफ लेबर) देवीप्रसाद राय चौधरी का बचपन व शिक्षा- देवीप्रसाद राय चौधरी का जन्म  14 जून1899 में जिला रंगपुर ताजहट  (आज बांग्लादेश में है)  में हुआ था।   देवीप्रसाद रॉय चौधरी का पालनपोषण जमींदार घराने में ठाठ बाट में हुआ ,जमींदार परिवार में जन्मे देवीप्रसाद  राय चौधरी का रुझान बचपन से ही कला की तरफ़ था,उनकी कला प्रतिभा को देखने पर उनके पिता उनको अवनींद्र नाथ टैगोर के पास ले गए।  आप कई कला विधाओं में दक्ष थे आप निशानेबाज, कुश्ती करने वाले पहलवान थे,संगीतज्ञ थे ,वंशीवादक थे,नाविक थे, कुशल शिल्पी भी थे  अवनींद्र नाथ टैगोर के मार्गदर्शन में उन्होंने हर विधा में कल दक्षता ग्रहण की,उन्होंने बंगाल शैली में ही खुद को नहीं बांध कर रखा बल्कि वो कला में नित नए प्रयोग करके अपनी एक अलग शैली प्रस्तुत की। देवी प्रसाद राय चौधरी के कला के प्रति लगन और मेहनत ने उन्हें अवनींद्र नाथ टैगोर के प्रमुख शिष्यों में शामिल कर दि