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Showing posts from March 9, 2021

Satish Gujral Artist की जीवनी हिंदी में

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    सतीश गुजराल आर्टिस्ट की जीवनी--  Biography of  Satish Gujral Artist --   सतीश गुजराल बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार,मूर्तिकार वास्तुकार,लेखक हैं जिनका जन्म 25 दिसंबर 1925 को झेलम पंजाब (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था।इनको देश के दूसरे सर्वोच्च सिविलियन अवार्ड पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।इनके बड़े भाई इंद्रकुमार गुजराल 1997 से 1998 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे है।जो भारत के 13 वें प्रधानमंत्री थे। सतीश गुजराल का बचपन--    जब सतीश गुजराल मात्र 8 साल के थे तब उनके साथ एक दुर्घटना हो गई उनका पैर  एक नदी के पुल में फिसल गया वह जल धारा में पड़े हुए पत्थरो से गंभीर चोट लगी पर  उन्हें बचा लिए गया,इस दुर्घटना के  कारण उनकी टांग टूट गई तथा सिर में गंभीर चोट आई,सिर में गंभीर चोट के कारण उनको एक  सिमुलस नामक बीमारी ने घेर लिया जिससे  उनकी श्रवण शक्ति चली गई। उनकी श्रवण शक्ति खोने,पैर में चोट लगने के कारण उनको लोग लंगड़ा,बहरा गूंगा समझने लगे।वह पांच साल बिस्तर में ही लेटे रहे,यह समय उनके लिए बहुत ही संघर्ष पूर्ण था।इसलिए वह अकेले में खाली समय बैठकर रेखाचित्र बनाने लगे। 

देवीप्रसाद रॉय चौधरी आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में|

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  देवीप्रसाद रॉय चौधरी आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में "कला किसी की बपौती नहीं कोई भी व्यक्ति इसे सीख सकता है" ये शब्द प्रसिद्ध कलाकार और मूर्तिकार देवीप्रसाद रायचौधरी के थे। (ट्राइंफ ऑफ लेबर) देवीप्रसाद राय चौधरी का बचपन व शिक्षा- देवीप्रसाद राय चौधरी का जन्म  14 जून1899 में जिला रंगपुर ताजहट  (आज बांग्लादेश में है)  में हुआ था।   देवीप्रसाद रॉय चौधरी का पालनपोषण जमींदार घराने में ठाठ बाट में हुआ ,जमींदार परिवार में जन्मे देवीप्रसाद  राय चौधरी का रुझान बचपन से ही कला की तरफ़ था,उनकी कला प्रतिभा को देखने पर उनके पिता उनको अवनींद्र नाथ टैगोर के पास ले गए।  आप कई कला विधाओं में दक्ष थे आप निशानेबाज, कुश्ती करने वाले पहलवान थे,संगीतज्ञ थे ,वंशीवादक थे,नाविक थे, कुशल शिल्पी भी थे  अवनींद्र नाथ टैगोर के मार्गदर्शन में उन्होंने हर विधा में कल दक्षता ग्रहण की,उन्होंने बंगाल शैली में ही खुद को नहीं बांध कर रखा बल्कि वो कला में नित नए प्रयोग करके अपनी एक अलग शैली प्रस्तुत की। देवी प्रसाद राय चौधरी के कला के प्रति लगन और मेहनत ने उन्हें अवनींद्र नाथ टैगोर के प्रमुख शिष्यों में शामिल कर दि