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Bitcoin क्या है|कैसे काम करता है| कैसे कमाया जा सकता है?

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  Bitcoin क्या है|कैसे काम करता हैऔर कैसे कमाया जा सकता है? बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है जिसे अंग्रेजी भाषा मे क्रिप्टो करेंसी कहते है क्रिप्टो करेंसी कई एक हैं उनमें से एक का नाम बिटकॉइन है , बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है  जिसे आप  छुकर या टटोल कर नहीं देख सकते हो। बिटकॉइन का न तो   नोटों के रूप में या सिक्कों के रूप में लेन देन होता है  न ही  आप  बिटकॉइन को अपने रुपये रखने वॉलेट या पर्स या बटुआ  में  रख सकते हो जैसे  दूसरे नोट और सिक्के को पर्स में रखते हो ।       Bitcoin सिर्फ कम्यूटर  नेटवर्किंग  से बने  एक  डिजिटल वॉलेट में रखे जा सकते हैं जिसमे बिटकॉइन मूल्यों के रूप में रखे जाते हैं जब बिटकॉइन को किसी दूसरे के पास भेजा जाता है तो भेजने जाने वाले व्यक्ति की अन्य जानकारी कोई चुरा नहीं पाता क्योंकि यह peer to peer ट्रांसेक्शन होता है हर लेन देन में एक नए ब्लॉक का निर्माण होता है जो पूरे कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़े रहते है।  बिटकॉइन का कोई एक मालिक नहीं है।यानी किसी एक व्यक्ति का स्वामित्व नहीं है। बिटकॉइन को कंट्रोल करने के लिए कोई सेंट्रलाइज अथॉरिटी नहीं है। कई अर्थ शास्त्रियों ने त

शंखों चौधरी मूर्तिकार की जीवनी|shankho chaudhari sculpture biography

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 शंखों चौधरी मूर्तिकार की जीवनी | शंखो चौधरी मूर्तिकार की जीवनी  (25 फरवरी 1916 - 28 अगस्त 2006) जन्म --शंखों चौधरी का जन्म 25 फरवरी 1916 को संथाल परगना  बिहार में हुआ था। मृत्यु- -28 अगस्त 2006 को नई दिल्ली में (शंखों चौधरी)     शंखों चौधरी    एक भारतीय मूर्तिकार थे, जो भारत के कला परिदृश्य में एक प्रसिद्ध व्यक्ति थे।  (यद्यपि  उनका वास्तविक में उनका नाम नर नारायण रखा गया था, वे अपने घरेलू-नाम शंखो से अधिक व्यापक रूप से जाने जाते थे।    आपने  प्रसिद्ध मूर्तिकार राम किंकर बैज से  शिक्षा ग्रहण की ।  जिससे वह पेरिस में मिला था।      शंखों चौधरी के मूर्तिशिल्प के विषयों में महिला आकृति और वन्य जीवन शामिल हैं।      उन्होंने मीडिया की एक विस्तृत श्रृंखला में काम किया था और बड़े पैमाने पर राहत और मोबाइल दोनों का निर्माण किया है।     आपने लकड़ी,धातु ,टेराकोटा ,प्रस्तर (काला और सफेद संगमरमर)।का प्रयोग किया है ,आपकी मूर्तिशिल्प में वक्राकार रूप प्रदान कर उनको जीवंत बनाने की। कोशिश हुई है।     आपने पिजन ,पिकॉक,बर्ड,हैंड ऑफ द गर्ल,राय लिट्,खड़ी आकृतियां ,कर्व आकृतियां,शीर्षक हीन आकृतियां बनाई। टॉय

SSC का full form क्या है|

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SSC का full form क्या है| SSC की तैयारी कैसे करें-- आज हम  सरकारी नौकरी देने वाली संस्था SSC के बारे में चर्चा करेंगे। जो किसी न किसी कारण से स्टूडेंट के बीच ट्रेंड करती रहती है।  मीडिया में सुर्खियों में बनी रहती है क्योंकि देश भर के कई विभाग की भर्ती एक साथ एक ही एग्जाम कन्डक्ट  करती है।  आज का होनहार युवा इंटरमीडिएट  की परीक्षा या 12th पास करने के बाद सरकारी नौकरी के लिए रूख़ करता है , सरकारी नौकरी के ऐशो आराम और सामाजिक इज़्ज़त के कारण वह जल्द उसकी तरफ़ आकर्षित ( attract ) हो जाता है। और सरकारी नौकरी प्राप्त करने के लिए वह कोचिंग संस्थानों में प्रवेश लेता है जिससे वह उस पाठ्यक्रम को अच्छी तरह समझ सके और अभ्यास कर सके जो विभिन्न एग्जाम में आता है, वह इसके लिए जी तोड़ तैयारी करता है ,क्योंकि सरकारी नौकरी में दस हज़ार प्रतिस्पर्धी में सिर्फ एक सफल हो पाता है।   अब सरकारी नौकरी भी दो प्रकार की होती हैं एक केंद्र सरकार के विभिन्न विभाग के कर्मचारी और दूसरे अलग अलग प्रदेशों के कर्मचारी ।  इसमें लेबोरियस स्टूडेंट केन्द्रीय सेवा में जाना अधिक पसंद करते हैं क्योंकि सरकारी नौकरी में केंद्रीय नौकरी

अब्राहम लिंकन की जीवनी हिंदी में | Abraham Lincoln Biography in hindi

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     अब्राहम लिंकन की जीवनी हिंदी में  Abraham Lincoln Biography in hindi   अब्राहम लिंकन के बचपन का जीवन       थॉमस के पिता एक अंग्रेज सैमुअल लिंकन के वंशज थे,जो 1858 में हिंगम मास्साचुसेट्स में आकर बस गए।        लिंकन के बाबा कैप्टन अब्राहम लिंकन थे और उनकी दादी का नाम बाथशेमा था,अब्राहम लिंकन के बाबा वर्जिनिया से आकर जेफरसन काउंटी में आकर बस गए, अब्राहम लिंकन के बाबा की मृत्यु एक भारतीयों के टोली से झड़प के दौरान हो गई,ये झड़प जब हुई उस समय लिंकन आठ साल के थे और ये घटना उन्ही के आंखों के सामने घटित हुई। [अब्राहम लिंकन Abraham Lincoln ]       थॉमस ने अथक परिश्रम किया वो पहले केंटुकी और टेनेसी में काम करते रहे पर बाद में 1800 ईसवी के आसपास केंटुकी में आकर बस गए।       अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी 1809 में केंटुकी के  हार्डिन काउंटी में सिंकिंग स्प्रिंगफॉर्म  नामक जगह में एक गरीब अश्वेत परिवार में हुआ था।      जहां उनका जन्म हुआ था वो लकड़ी की एक झोपड़ी थी ,अब्राहम लिंकन के माता पिता का नाम थॉमस और नैंसी हैक्सस लिंकन था।       लिंकन का जन्म बेहद गरीब परिवार में हुआ था अब्राहम के पिता थॉ

श्री राम स्तुति|Sri Ram Stuti

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श्री राम : Sri Ram Stuti : : श्री  राम स्तुति: श्रीरामचन्द्र कृपालु भजमन  हरणभवभयदारुणं।  नवकंजलोचन कंजमुख करकंज पदकंजारुणं ॥१॥ कन्दर्प अगणित अमित छवि नवनीलनीरदसुन्दरं।  पटपीतमानहु तडित रूचिशुचि नौमिजनकसुतावरं ॥२॥ भजदीनबन्धु दिनेश दानवदैत्यवंशनिकन्दनं।  रघुनन्द आनन्दकन्द कोशलचन्द्र दशरथनन्दनं ॥३॥ शिरमुकुटकुण्डल तिलकचारू उदारुअंगविभूषणं।  आजानुभुज शरचापधर संग्रामजितखरदूषणं ॥४॥ इति वदति तुलसीदास शङकरशेषमुनिमनरंजनं।  ममहृदयकंजनिवासकुरु कामादिखलदलगञजनं ॥५॥ मनु जाहि राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुन्दर सावरो।  करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो ॥६ एही भाँति गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषींअली।  तुलसी भवानी पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥ जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।  मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे ॥८॥                 Sri RAM stuti in English                               |Doha| Shri Ramachandra Kripalu Bhajuman, Harana Bhavabhaya Daarunam । Navakanja Lochana Kanja Mukhakara, Kanja Pada Kanjaarunam ॥ Kandarpa Aganita Amita Chhav Nava, Neela Neerara Sundaram । Patapita Maa

कोरोना दूसरी लहर |एक आर्टिकल

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      कोरोना की दूसरी लहर -एक लेख भारत मे कोरोना की दूसरी लहर का आगाज़  साल 2021  में होली के समय  मार्च महीने  से होना शुरु को हुआ सबसे पहले पूरे महाराष्ट्र को गिरफ़्त में ले लिया,फिर धीरे धीरे  दिल्ली ,मध्यप्रदेश,गुजरात बंगाल ,उत्तरप्रदेश, बिहार ,कर्नाटक आदि में कोरोना ने अपना विस्तार कर लिया,दिल्ली में तो चौथी लहर है ,वहां पर रोज एक 800 रोगी मरने लगे। शहर में हाहाकर मच गया ,अस्पताल में जगह नहीं थी, लोग बाहर ही मर रहे थे अस्पताल जाते जाते या अस्पताल में ऑक्सीजन के आभाव में या फिर एक दो दिन भर्ती होने के बाद सारे ऑर्गन फेल होने पर  रोगी की मृत्यु हो जा रही थी ,लोगों के मरने के बाद रत्ती भर जगह नहीं बच रही थी श्मशान घरों में मृतक के शरीर को जलाने के लिए । एक चिता ठंढी नहीं हो पाती थी कि दूसरे डेड बॉडी को भी उसी जगह जला दिया जाता था , लगातार जलती चिताओं को देख कर सारी दिल्ली और सारा देश कांप उठा था कि हे भगवान! कैसी विपदा आ गई इस देश में।  दिल्ली के आसपास सैकड़ों गांव हैं जो समृद्धिशाली हैं  जहां अस्पतालों के आभाव है वहां के लोगों ने खुद को घरों में बंद कर लिया। इन दिल्ली के गांव की तस्वीर