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FDI का full form kya hota hai

F D I का full form क्या होता है?  F D I का full form  -Foreign Direct Investment  प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए एफडीआई का मतलब है। यह एक देश में स्थित कंपनी द्वारा दूसरे देश में स्थित कंपनी में किया गया निवेश है। एक निवेश का प्रकार पोर्टफोलियो  निवेश भी होता है पर एफ डी आई  निवेश  पोर्टफोलियो   निवेश से अलग होता है जिसमें एक विदेशी कंपनी किसी देश के स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध इक्विटी में निवेश करती है।
इसे प्रत्यक्ष निवेश कहा जाता है क्योंकि निवेशक किसी देश की कंपनी या इकाई पर नियंत्रण या प्रभाव चाहता है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आमतौर पर उन देशों में किया जाता है जिनकी खुली अर्थव्यवस्थाएं, उच्च विकास की संभावनाएं और अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर कुशल कार्यबल हैं।
-- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)के लाभ-- एफडीआई के कई लाभ हैं; कुछ प्रमुख लाभ नीचे दिए गए हैं:
यह देश में रोजगार पैदा करता है। यह देश में नई पूंजी लाता है। यह देश की विदेशी मुद्रा की स्थिति में सुधार लाता है। यह एक देश में नए कौशल और प्रौद्योगिकियों को लाता है। यह निर्यात को बढ़ावा देता है और कर राजस्व में वृद्धि करता…

UNESCO का full form क्या है

UNESCO का full form क्या हैयूनाइटेड नेशन्स एजुकेशनल साइन्सटफिक एंड कल्चरल आर्गेनाइजेशन। United Nations Educational Scienctific and Cultural Organization। पेरिस फ्रांस में स्थित संयुक्त संघ की एक एजेंसी है,जिसके माध्यम से शिक्षा,विज्ञान,और संस्कृति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर शान्ति और सुरक्षा में योगदान  करना है।

I S O का full form क्या होता है

ISO का full form है --------Intrnational organaization  for standarization   हिंदी में इस संगठन को अतर्राष्ट्रीय मानक संगठन कहते हैं। संगठन की स्थापना --इस संगठन की स्थापना 20 फरवरी 1947 को की गई थी , इस संगठन का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में है। इस संगठन की आधिकारिक भाषाएं अंग्रेजी ,फ्रेंच,रुशी हैं।  संगठन के कार्य --इस संगठन को ग्रीक के शब्द  "आईसोस" से  लिया गया है ,इसका अर्थ है समान ,यानी यदि कोई दो वस्तुएं यदि कोई समान मानक पूरा करता है तो तो उन दो वस्तुओं को  प्रदान किया जाएगा, इस प्रक्रिया से किसी वस्तु या उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलती है कि वो वस्तु गुणवत्ता में बेहतर है ,और उन बाहरी देशों के मानक के अनुरूप है।   वर्तमान में इस संगठन से 164 देश लाभ ले रहे हैं। यानी किसी आई एस ओ उत्पाद की मोहर वाली वस्तु इन देशों में अपने बाज़ार को बना सकती है।     यह संगठन वर्तमान में प्रौद्योगिकी से लेकर खाद्य सुरक्षा कृषि और  स्वास्थ्य सेवा हर क्षेत्र में बीस हज़ार मानक तैयार किये हैं।

उत्तरवैदिक काल का इतिहास

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उत्तरवैदिक काल का इतिहास

उत्तर वैदिक काल 1000 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व तक का है ,इस काल में चार वेदों में तीन वेद यजुर्वेद, सामवेद,अथर्वेद की रचना हुई साथ में ब्राम्हण ग्रन्थ ,आरण्यक ,उपनिषद ग्रन्थ भी लिखे गये ,इन ग्रंथों में वर्णित तथ्यों के आधार पर तथा उत्खनन में चित्रित धूसर मृदभांड से,   लोहे के प्रयोग से जो अतरंजीखेड़ा ,नोह से   मिले हैं उसके आधार पर  उस समय की जानकारी  मिलती है जिसमें  ज्ञात होता है कि कबाइली तत्व कमजोर हो गए थे क्षेत्रीय  राज़्यों का उदय हुआ था ,कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था का जन्म हो चुका था ,वर्ण व्यवस्था में  जटिलता आ चुकी थी। धर्म में यज्ञ के कर्मकांड में जटिलता आ चुकी थी। साथ में उपनिषदों में यज्ञ को आडम्बर बताकार ज्ञान और ध्यान द्वारा ही ईश्वर से जुड़ने का सरल मार्ग प्रतिपादित किया गया था।
उत्तरवैदिक काल में सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था------उत्तरवैदिक काल मे  पंजाब से बाहर गंगा यमुना के दोआब तक आ गए ,उत्तरवैदिक साहित्य से जानकारी मिलती है कि आर्य क्रमिक रूप से पूरब की तऱफ बढ़ रहे थे ,तथा प्रसार होने से नवीन  राज्यों का निर्माण हो रहा था ,कुछ श्रेष्ठ जनों का वर्…

सुशांत सिंह राजपूत एक फ़िल्म अभिनेता- बायोग्राफी

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सुशांत सिंह राजपूत एक अभिनेता की जीवनी-


सुशांत सिंह राजपूत एक ऐसे अभिनेता थे जो बिना किसी  गॉड फादर के  फ़िल्म इंडस्ट्री में अपना मुक़ाम हासिल किया ,जबकि फ़िल्म इंडस्ट्री में सफलता के लिए कोई न कोई गॉडफ़ादर होना चाहिए या फ़िर इस इंडस्ट्री में भाई भतीजा वाद भी बहुत चलता है यदि कोई खास रिश्तेदार है तो सफ़लता जल्द  मिल सकती है वरना बिना किसी गॉड फादर के यहां पर प्रवेश करने के लिए लंबे समय तक पापड़ बेलने पड़ते हैं, इन सब के बावजूद सुशांत का एक भी रिश्तेदार फ़िल्म इंडस्ट्री में नहीं है उन्होंने मात्र सात सालों में ख़ुद को बुलन्दियों पर पहुंचाया ,उन्होंने 13 हिट फिल्म कीं और अपने अभिनय की ऐसी छाप छोड़ी की मात्र  34 साल की उम्र में ही दर्शकों के चहेते बन गए। सुशांत सिंह का बचपन-    का जन्म 21 जनवरी 1986 को पटना(बिहार) में हुआ था,इनके पिता के के सिंह  सरकारी अधिकारी थे,  माता उषा सिंह  गृहणी थीं इनकी चार बहनें भी थीं ,एक बहन मीतू सिंह बिहार रणजी क्रिकेट टीम में खिलाड़ी थी ,सन 2002 में  सुशांत सिंह राजपूत जब 16 वर्ष के थे तब इनकी माता का देहांत हो गया , उस समय सुशांत बहुत विचलित हुए क्योंकि वो अपनी माता को …

ऋग्वैदिक काल का इतिहास और संस्कृति

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ऋग्वैदिक  काल का इतिहास और संस्कृति  ऋग्वैदिक  काल मे आर्यजन कितने क्षेत्र में फैले थे ,उनका राजनीतिक, सामाजिक,धार्मिक जीवन कैसा था ,उन्होंने प्रारम्भ में वेदों की रचना किन स्थानों के की वो किसको पवित्र मानते थे ,वो अपने जीवन निर्वाह के लिए क्या क्या उपाय करते थे ,ये सब जानने के लिए उस समय के रचित वैदिक ग्रन्थ ऋग्वेद का अध्ययन करना होगा क्योंकि उसके सूक्तों और श्लोकों में ही हर बात का वर्णन मिलता है।

ऋग्वैदिक आर्यों  का  भौगोलिक  विस्तार :  आर्य का प्रारंभिक निवास स्थल आज  के  अफगानिस्तान  के पूर्वी भाग आधुनिक पाकिस्तान और पश्चिमी राजस्थान के आसपास पंजाब तक सीमित था क्योंकि ऋग्वैदिक काल मे हमे जिन नदियों का उल्लेख इस ग्रंथ में मिलता है उनमें से काबुल की  क्रमू(कुर्रम), कुभा(काबुल),सुवास्तु(स्वात) और गोमती(गोमल) का उल्लेख है ये सभी अफगानिस्तान में है इसी तरह दृषद्वती (घग्घर),विपाशा(व्यास), शतुद्री(सतलज), परूषनी (रावी), अस्किनी(चेनाब),वितस्ता(झेलम), नदियों का उल्लेख किया गया है। सिंधु और सरस्वती नदियों का सबसे अधिक वर्णन है और इनकी सबसे अधिक महिमा बताई गई है,इस प्रकार सप्तसैंधव प्रदेश था य…

अजंता की चित्रकला ..मेरी अजंता यात्रा और उनके गुफाओं के चित्र

अजंता की यात्रा ::
अजंता की चित्रकला
अजंता भ्रमण और अजंता की गुफाओं के विश्व प्रसिद्ध चित्र.
 सह्याद्रि पर्वतों के उत्तुंग शिखर जो आज भी हरियाली को समेटे है , चारो तरफ पहाड़ ही पहाड़ दिखाई देते है इस मनोरम स्थल को देखते निहारते हुए जब मैं टैक्सी में बैठे बैठे सोंच रहा था इस रमणीक स्थल में 2000 पहले से मौर्य,सातवाहन, वाकाटक ,राष्ट्रकूट जैसे राजवंशों ने अपनी शौर्य  गाथाएं लिखीं ,  मध्य काल में छत्रपति शिवाजी  के पराक्रम और शौर्य की ये वादियां गवाह है ,  एक नाथ तुकाराम और रामदेव जैसे महान संतो के भजन जिनसे समाज में नई चेतना मिली , मेरा मन प्रफुल्लित था इस वीर भूमि और  शांत भूमि में आकर प्रकृति के साथ अठखेलियां खेलते खेलते औरंगाबाद जिले के गांव फरदारपुर में अजंता के पास पहुंचा, टैक्सी वाले ने मुझे एक होटल में पहुँचाया वो बहुत सुविधाजनक तो नही था पर मैंने एक रात बिताने के लिए ठीक ही समझा , अगले दिन हमने एक टैक्सी ली जिसने दो घण्टे के बाद हमे उस तलहटी में पहुँचाया जहां से ऊपर जाना था अजंता गुफ़ा देखने के लिए ,  टैक्सी के ड्राईवर हमे ऊपर तो ले गए पर   चार किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया क्योंकि महाराष…