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Showing posts from January 4, 2021

अंध भक्ति किसे कहते हैं जानिए कौन होते हैं अंधभक्त

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  अंधभक्त किसे कहते हैं? अंध भक्त का शाब्दिक अर्थ- अंधभक्त का तात्पर्य हिन्दी शब्दावली के अनुसार वो भक्त जो आंख बंद कर दुसरों का अनुसरण करें। अनुयायी जो अपने नेता पर अधिक भरोसा करे । और  अपने विवेक का इस्तेमाल बिल्कुल न करे।     अन्ध शब्द के अन्य मिश्रित शब्द अंध प्रेम-Blind love अंध भक्त-Blind supporter अंध विश्वास-  Superstition ,Blind Faith अंध राष्ट्रवाद -Blind Patriotism अंध-Blind भक्त- Worshiper भक्ति शब्द  का प्रयोग ईश्वर भक्ति ,मातृ भक्ति,पितृ भक्ति ,राष्ट्र भक्ति ,  आदि भक्त वो हैं जो   जो भक्ति करते है जो  किसी में श्रद्धा और आस्था और  विश्वास रखतें हैं।  जैसे -शिव भक्त , कृष्ण भक्त ,देवी भक्त ,राष्ट्र भक्त आदि हैं। जो भक्ति करते है अंधभक्त का तात्पर्य किसी भी व्यक्ति पर ऑंखमूँदकर विश्वास करने वाला अनुयायी। जिसमें व्यक्ति अपने विवर्क और तर्क का प्रयोग न करे। निरीश्वरवादी बौद्ध अन्य धर्म अनुयाइयों के धर्म ग्रंथ में अकल्पनीय बातों का खंडन करते है ,वो हिन्दू ,मुस्लिम ,ईसाइयों के धर्म ग्रथों में दिए गए कई कथानकों का खंडन करते है और कपोल कल्पित कहते हैं  और इन धर्मों में आस्था रख

परमानंद चोयल (P. N. choyal) कलाकार की जीवनी

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    परमानंद चोयल , (PN choyal)कलाकार की जीवनी: (पी एन चोयल)   पी ए चोयल  ,राजस्थान के प्रसिद्ध कलाकारों में एक हैं,उनको उन्होंने अपने नवीन कला प्रयोगों से चित्रकला को नया आयाम दिया और क्षितिज को छुआ।     शिक्षा --      पी एन चोयल का जन्म राजस्थान के कोटा  में  5 जनवरी सन 1924 ईसवी को हुआ था।परमानंद चोयल केवल एक आर्टिस्ट ही नहीं थे बल्कि वो एक सफ़ल नाटक कार भी थे 1960 में "चलते फिरते बूत" नामक नाटक का मंचन भी किया ।       पी एन चोयल को प्रारंभिक कला शिक्षा जयपुर के परंपरागत कलाकार कानू राम शर्मा से मिली।1948 ईसवी से इन्होंने सीरियसली कला की तरफ़ रुझान किया।         जब वो इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण कर रहे थे उसी  समय उनके विद्यालय में हंगेरियन कलाकार मैडम वेलटनी कालेज के एक प्रदर्शनी को देखने आईं ,इसी प्रदर्शनी में वो परमानंद की कला से बहुत प्रभावित हुईं। उन्होंने चोयल को इंग्लैंड में कला शिक्षा प्राप्त करने के लिए शालीमार स्कालरशिप का प्रबंध भी किया पर उस समय चोयल की उम्र की बाधा से ये स्कालरशिप उन्हें नही मिल पाई।          जयपुर स्कूल ऑफ आर्ट्स में इनकी मुलाकात रामगोपाल विजयवर