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Showing posts from January 3, 2020

विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी

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 विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी: मोरिस डेविस का प्रारंभिक जीवन विलियम मोरिस डेविस का जन्म फिलाडेल्फिया  यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में हुआ था । डेविस ने हारवर्ड  से1869 में स्नातक की उपाधि ग्रहण की,सन 1870 से 1873 तक वह अर्जेंटीना के कार्डोबा के मौसम विज्ञान वेधशाला में सहायक के रूप में काम किया , हार्वर्ड से वापस लौटने के बाद इन्होंने वह भूगर्भीय व भूआकृति विज्ञान का अध्ययन किया,सन 1876 में उसे सहायक प्रोफेसर का शेलर का सहायक बना और उनके साथ रहकर भूगर्भ विज्ञान और भूआकृति विज्ञान का अध्ययन करने लगा 1878 में अस्सिटेंट प्रोफ़ेसर बने और 1899 में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए  1890  विलियम डेविस ने सार्वजनिक  स्कूलों में भूगोल के मानकों को निर्धारित किया उनके अनुसार प्राथमिक विद्यालयों ,माध्यमिक विद्यालयों में भूगोल को विज्ञान की तरह शिक्षा देना चाहिए ,डेविस ने भूगोल को विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाये जाने के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम बनाने में सहायता प्रदान की। 1904 में वह अमेरिका के सारे प्रशिक्षित भूगोलवेत्ताओं से मुलाकात की ,और इन शिक्षाविदों का संगठन तैयार किया। 1904 में एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन जिओग

महात्मा गाँधी और उनका जीवन दर्शन,mahatma gandhi and his philoshphy

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महात्मा गाँधी और उनका जीवन दर्शन महात्मा गांधी का नाम आते ही हमारे मस्तिष्क में एक छवि का निर्माण हो जाता है वह है एक हाँथ में लाठी ह्रदय में सत्य अहिंसा का सम्बल लिए हुए परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ी हुई भारत मां को  अंग्रेजों के अत्याचारों से मुक्त कराते हुए एक व्यक्ति की  तस्वीर उभरती है ,परंतु गांधी जी को किसी एक विधा से नहीं बाँधा जा सकता जहाँ उन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के लिए राजनीतिक विचारधारा दी और संघर्ष किया ,वहीं उन्होंने  धर्म और नीति और आर्थिक दृष्टिकोण  भी प्रस्तुत करते हुए अपने सपनों के भारत का मार्ग प्रशस्त किया।  जीवन परिचय--- गांधी जी का पूरा नाम मोहन दास  करम चन्द गांधी था उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबन्दर गुजरात में  एक कुलीन घराने में हुआ था ,उनके पिता करम चन्द गांधी एक दीवान थे और माता पुतली बाई बहुत सीधी साधी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं ,गांधी जी का 13 वर्ष की आयु में विवाह हुआ,19 वर्ष की आयु में 4 सितम्बर 1888 को गांधी जी बम्बई  से इंग्लैंड वकालत की शिक्षा ग्रहण करने को गए,बैरिस्टरी की परीक्षा पास करने के बाद 12 जून 1891 को भारत लौट आये,और भा