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Showing posts from January 3, 2020

असित कुमार हलदार आर्टिस्ट की biography

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 असित कुमार हाल्दार आर्टिस्ट की बायोग्राफी असित कुमार हाल्दार एक कल्पना शील, भावप्रवण चित्रकार के साथ साथ अच्छे साहित्यकार ,शिल्पकार, कला समालोचक,चिंतक,कवि,विचारक भी थे। असित कुमार हाल्दार का प्रारंभिक जीवन--- असित कुमार हलदार का जन्म सन 1890 पश्चिम बंगाल के जोड़ासांको नामक स्थल में  स्थित टैगोर भवन  के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इनकी नानी रवींद्र नाथ टैगोर की बहन थीं।   असित कुमार हलदार के बाबा  का नाम राखालदास हाल्दार था  जो उस समय लंदन विश्वविद्यालय में संस्कृत विषय के प्राध्यापक थे, और पिता सुकुमार हाल्दार भी कला में निपुण थे  ,उनकी प्रेरणा से असित कुमार हलदार को भी कला में अभिरुचि जगी। साथ मे वो बचपन से ही ग्रामीणों के बीच रहकर उनकी पटचित्र कला को गौर से देखा और समझा था।  15 वर्ष की आयु में हाल्दार को कलकत्ता के गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला मिल गया , यहां पर इनको गुरु के रूप में  अवनींद्र नाथ टैगोर का सानिध्य मिला। उनसे उन्होंने कला की बारीकियों को सीखा,  यहां पर इन्होंने जादू पाल और बकेश्वर पाल से मूर्तिकला सीखी।    यहां आपको पर असित कुमार हाल्दार को अपने कक्षा में अन्

महात्मा गाँधी और उनका जीवन दर्शन,mahatma gandhi and his philoshphy

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महात्मा गाँधी और उनका जीवन दर्शन महात्मा गांधी का नाम आते ही हमारे मस्तिष्क में एक छवि का निर्माण हो जाता है वह है एक हाँथ में लाठी ह्रदय में सत्य अहिंसा का सम्बल लिए हुए परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ी हुई भारत मां को  अंग्रेजों के अत्याचारों से मुक्त कराते हुए एक व्यक्ति की  तस्वीर उभरती है ,परंतु गांधी जी को किसी एक विधा से नहीं बाँधा जा सकता जहाँ उन्होंने देश को स्वतंत्र कराने के लिए राजनीतिक विचारधारा दी और संघर्ष किया ,वहीं उन्होंने  धर्म और नीति और आर्थिक दृष्टिकोण  भी प्रस्तुत करते हुए अपने सपनों के भारत का मार्ग प्रशस्त किया।  जीवन परिचय--- गांधी जी का पूरा नाम मोहन दास  करम चन्द गांधी था उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबन्दर गुजरात में  एक कुलीन घराने में हुआ था ,उनके पिता करम चन्द गांधी एक दीवान थे और माता पुतली बाई बहुत सीधी साधी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं ,गांधी जी का 13 वर्ष की आयु में विवाह हुआ,19 वर्ष की आयु में 4 सितम्बर 1888 को गांधी जी बम्बई  से इंग्लैंड वकालत की शिक्षा ग्रहण करने को गए,बैरिस्टरी की परीक्षा पास करने के बाद 12 जून 1891 को भारत लौट आये,और भा