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Showing posts from November 8, 2019

Squat व्यायाम क्या है,SQUAT पांच फ़ायदे।

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 SQUAT व्यायाम क्या है -  आप squat व्यायाम से शरीर को फिट रख सकतें हैं वैसे तो शरीर को फिट रखने के लिए बहुत सी exercise करते है , जो आपको चुस्त दुरुस्त रखतीं है, आपकी मसल्स को मजबूती प्रदान करता है ,परंतु सारी एक्सरसाइज के बाद भी आपने अपने दैनिक अभ्यास में squat को सम्मिलित नहीं किया तो आप बहुत कुछ छोड़ रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप आज से ही sqaut को अपने रोज के एक्सरसाइज में सम्मिलित करें । यह अभ्यास महिला और पुरुष दोनों के लिए फायदेमंद है। इस एक्सरसाइज में प्रारम्भ में आपको समस्या आ सकती है परंतु धीरे धीरे रोज़ाना अभ्यास से ये बहुत सरल लगने लगता है। प्रारम्भ में आप इसको करने में किसी चीज का सहारा लेकर कर सकते हैं ,परंतु बाद में आप धीरे धीरे बिना सहारे का अभ्यास कर सकते हैं। इस एक्सरसाइज की विशेषता यह है कि इसे कहीं भी बिना इक्विपमेंट के  भी किया जा सकता है। यह एक्सरसाइज केवल  शरीर के एक भाग को ही मजबूत नही करता बल्कि पूरे शरीर को संतुलित रूप से मजबूत करता है,साधारण तौर पर ऐसा लगता है कि इस एक्सरसाइज से केवल टाँगों(legs)को मज़बूती मिलती है परंतु ऐसी बात नहीं है इस एक्सरसाइज से पूरा शर

Sindhu ghati sabhyata utpatti aur vistaar,सिंधु घाटी सभ्यता :उत्पत्ति और विस्तार

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:सिन्धु घाटी से प्राप्त मुहर:    सिन्धु घाटी सभ्यता :उत्पत्ति और विस्तार विश्व की प्राचीन सभ्यताएं नदी घाटियों में विकसित हुईं, मिस्र की सभ्यता  जो नील नदी के किनारे थी ,मेसोपोटामिया की सभ्यता जो दजला फ़रात नदियों के संगम में थी,भारत मे विकसित नदी घाटी सभ्यता जो क़रीब ईशा पूर्व 3 हजार साल पहले पूर्णतया विकसित हुई थी , हालांकि   विद्वानों में  इसके समय काल के लेकर अलग अलग राय है  और रेडियो कार्बन  विधि द्वारा  इसकी  समय सीमा 2300-1750 ईसा पूर्व निर्धारित की गई है ,ये सभ्यता सिन्धु नदी के किनारे पल्लवित हुई सभ्यता पूर्णतयः मिट्टी में दबी थी , आम लोगों के प्रकाश में तब आई जब चार्ल्स मेस्सन ने 1826 इस ऊंचे टीले को का उल्लेख किया, इसी प्रकार रेल पथ निर्माण के समय जब इस जगह से कुछ प्राचीन सामाग्रियां मिलीं  , तब अलेक्जेंडर  कनिंघम जो पुरातत्व वेत्ता थे ,उनको 1875  में एक  लिपिबद्ध मुहर भी प्राप्त हुई  , इसके बाद भी ये क्षेत्र कई साल उपेक्षित रहा। 1921 में सर जान मार्शल जब पुरातत्व विभाग के महानिदेशक थे , राय बहादुर दयाराम साहनी ने इस स्थल का पुनः 1923-24 और 1924-25 के दौरान उत्खनन