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ऋग्वैदिक काल का इतिहास और संस्कृति

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ऋग्वैदिक  काल का इतिहास और संस्कृति  ऋग्वैदिक  काल मे आर्यजन कितने क्षेत्र में फैले थे ,उनका राजनीतिक, सामाजिक,धार्मिक जीवन कैसा था ,उन्होंने प्रारम्भ में वेदों की रचना किन स्थानों के की वो किसको पवित्र मानते थे ,वो अपने जीवन निर्वाह के लिए क्या क्या उपाय करते थे ,ये सब जानने के लिए उस समय के रचित वैदिक ग्रन्थ ऋग्वेद का अध्ययन करना होगा क्योंकि उसके सूक्तों और श्लोकों में ही हर बात का वर्णन मिलता है। ऋग्वैदिक आर्यों  का  भौगोलिक  विस्तार :  आर्य का प्रारंभिक निवास स्थल आज  के  अफगानिस्तान  के पूर्वी भाग आधुनिक पाकिस्तान और पश्चिमी राजस्थान के आसपास पंजाब तक सीमित था क्योंकि ऋग्वैदिक काल मे हमे जिन नदियों का उल्लेख इस ग्रंथ में मिलता है उनमें से काबुल की  क्रमू(कुर्रम), कुभा(काबुल),सुवास्तु(स्वात) और गोमती(गोमल) का उल्लेख है ये सभी अफगानिस्तान में है इसी तरह दृषद्वती (घग्घर),विपाशा(व्यास), शतुद्री(सतलज), परूषनी (रावी), अस्किनी(चेनाब),वितस्ता(झेलम), नदियों का उल्लेख किया गया है। सिंधु और सरस्वती नदियों का सबसे अधिक वर्णन है और इनकी सबसे अधिक महिमा बताई गई है,इस प्रकार सप्तसैंधव प्रदेश था