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Showing posts from December 31, 2020

Review of fact history four बुक|किरण प्रकाशन|आर्य कॉप्टिशन| ज्ञान पुस्तक|महेश बरनवाल

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  Review of fact history four बुक: ज्ञान पुस्तक,महेश बरनवाल किरण प्रकाशन,आर्य कॉप्टिशन विषय प्रवेश--  यदि कोई छात्र इंटरमीडिट के एग्जाम पास करने के बाद कॉम्पटीशन लाइन में प्रवेश करता है तो उसे पुस्तको के चयन में बहुत कंफ्यूज़न होता है। इस review से इतिहास की सही बुक लेने में मदद मिलेगी। Review of four books  आज हम बाज़ार में उपलब्ध चार फैक्ट आधारित बुक्स का रिव्यु करता हूँ ।  क्योंकि ज़्यादातर वनडे एग्जाम रेलवे,एस एस सी, लेखपाल या पटवारी का एग्जाम ग्राम विकास अधिकारी ,कांस्टेबल का एग्जाम,SI का एग्जाम,असिस्टेन्स टीचर्स,DSSB आदि के एग्जाम में इतिहास के फैक्चुअल प्रश्न पूंछे जाते हैं हालांकि वो GS पर आधारित हैं पर उन प्रश्नों हल करने के लिए भी कुछ डीप स्टडी जरूरी है। इसके लिए आप या तो आप ख़ुद नोट्स तैयार करें या फ़िर इन बुक्स की मदद लेकर विभिन्न वनडे एग्जाम में हिस्ट्री के प्रश्नों को आसानी से सही कर पाने में सक्षम हो पाते हैं।  पहली पुस्तक की बात करते है जो इतिहास के फैक्ट पर आधारित है। ज्ञान इतिहास की । इस पुस्तक का संंपादन ज्ञान चंद यादव ने किया है।    इस बुक में इतिहास के बिन्दुओं को क्रमब

कांटिगेरी कृष्ण हैब्बार की जीवनी

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  कांटिगेरी कृष्ण हैब्बार की जीवनी---- ●के के हैब्बार●        कृष्ण हैब्बार का जन्म दक्षिण कन्नड़ के एक सुंदर गांव कांटिगेरी में   सन  15 जून 1912 को हुआ था ,इनका बाल्यकाल गांव में ही व्यतीत हुआ , औऱ गांव के उत्सवों ,नाटकों ,नृत्यों ,गीतों  आदि का हैब्बार पर प्रभाव पड़ा। ये गांव में होने वाले त्योहार पर जाते थे वहाँ पर अपनी चित्रकला का प्रदर्शन करते थे। किशोर अवस्था में ही हैब्बार ने' राजा रवि वर्मा 'और सरस्वती की प्रतिकृति अपने घर की दीवार पर चित्रित की,यहीं से उनके मन में कला को सीखने का विश्वास पैदा हुआ और उन्होंने अपना जीवन चित्रकला की तरफ़ बढ़ाने का निर्णय लिया और इसके बाद वो पीछे नहीं हटे। गाँव के त्योहार  के वैभव  तथा बहुरंगी  लोक संस्कृति  का हैब्बार की कला पर परिलक्षित होता है , इस वातावरण में उनके स्थायी संस्कार बन गए और उनकी कला में ग्राम सुलभ कल्पना अंत तक बनी रही।       मैट्रिक तक पढ़ने के बाद हैब्बार ने मैसूर के राजेन्द्र तकनीकी स्कूल में कला की शिक्षा ग्रहण की, 1937 में उन्होंने जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स  से डिप्लोमा के अंतिम वर्ष में प्रवेश किया  1938 में यहां से डिप्लो