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Showing posts from December 31, 2020

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की जीवनी हिंदी में Dheerendra Krishna Shastri Biography Hindi me

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  Dheerendra Krishna Shastri का नाम  सन 2023 में तब भारत मे और पूरे विश्व मे विख्यात हुआ जब  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के द्वारा नागपुर में कथावाचन का कार्यक्रम हो रहा था इस दौरान महाराष्ट्र की एक संस्था अंध श्रद्धा उन्मूलन समिति के श्याम मानव उनके द्वारा किये जाने वाले चमत्कारों को अंधविश्वास बताया और उनके कार्यो को समाज मे अंधविश्वास बढ़ाने का आरोप लगाया। लोग धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को बागेश्वर धाम सरकार के नाम से भी संबोधित करते हैं। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की चमत्कारी शक्तियों के कारण लोंगो के बीच ये बात प्रचलित है कि बाबा धीरेंद्र शास्त्री हनुमान जी के अवतार हैं। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बचपन (Childhood of Dhirendra Shastri)  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म मध्यप्रदेश के जिले छतरपुर के ग्राम गढ़ा में 4 जुलाई 1996 में हिन्दु  सरयूपारीण ब्राम्हण परिवार  में हुआ था , इनका गोत्र गर्ग है और ये सरयूपारीण ब्राम्हण है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पिता का नाम रामकृपाल गर्ग है व माता का नाम सरोज गर्ग है जो एक गृहणी है।धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक छोटा भाई भी है व एक छोटी बहन भी है।छोटे भाई का न

कांटिगेरी कृष्ण हैब्बार की जीवनी

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  कांटिगेरी कृष्ण हैब्बार की जीवनी---- ●के के हैब्बार●        कृष्ण हैब्बार का जन्म दक्षिण कन्नड़ के एक सुंदर गांव कांटिगेरी में   सन  15 जून 1912 को हुआ था ,इनका बाल्यकाल गांव में ही व्यतीत हुआ , औऱ गांव के उत्सवों ,नाटकों ,नृत्यों ,गीतों  आदि का हैब्बार पर प्रभाव पड़ा। ये गांव में होने वाले त्योहार पर जाते थे वहाँ पर अपनी चित्रकला का प्रदर्शन करते थे। किशोर अवस्था में ही हैब्बार ने' राजा रवि वर्मा 'और सरस्वती की प्रतिकृति अपने घर की दीवार पर चित्रित की,यहीं से उनके मन में कला को सीखने का विश्वास पैदा हुआ और उन्होंने अपना जीवन चित्रकला की तरफ़ बढ़ाने का निर्णय लिया और इसके बाद वो पीछे नहीं हटे। गाँव के त्योहार  के वैभव  तथा बहुरंगी  लोक संस्कृति  का हैब्बार की कला पर परिलक्षित होता है , इस वातावरण में उनके स्थायी संस्कार बन गए और उनकी कला में ग्राम सुलभ कल्पना अंत तक बनी रही।       मैट्रिक तक पढ़ने के बाद हैब्बार ने मैसूर के राजेन्द्र तकनीकी स्कूल में कला की शिक्षा ग्रहण की, 1937 में उन्होंने जे जे स्कूल ऑफ आर्ट्स  से डिप्लोमा के अंतिम वर्ष में प्रवेश किया  1938 में यहां से डिप्लो