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जीका वायरस रोग के लक्षण और बचाव

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 जीका वायरस रोग के लक्षण और बचाव--     एक साल पूर्व जीका वायरस का प्रकोप केरल और कुछ दक्षिणी भारत के राज्यों तक सुनने को मिल रहा था,आज 2021 में जीका वायरस के मरीज उत्तर भारत तक पैर पसार चुका है ,मध्यप्रदेश,गुजरात,राजस्थान  में कई जिलों में पैर पसार रहा है जीका वायरस  छोटे शहरों कस्बों तक भी फैल रहा है ,इस रोग के लक्षण वाले मरीज़ उत्तर प्रदेश के,इटावा ,कन्नौज,जालौन ,फतेहपुर में मिले हैं। उत्तर भारत और मध्य भारत तक इसके मरीज  बहुतायत में मिले हैं। कैसे फैलता है जीका वायरस-- जीका वायरस का संक्रमण मच्छरों के द्वारा होता है,वही मच्छर जिनसे डेंगू और चिकुनगुनिया होता है, यानी मच्छर काटने के बाद ही जीका वायरस फैलता है। थोड़ा सा अंतर भी है डेंगू वायरस और जीका वायरस में ,जीका वायरस  से यदि एक बार कोई संक्रमित हो जाता है ,और वह अपने साथी से शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे भी संक्रमित कर सकता है,साथ मे संक्रमित माता के पेट मे पल रहे गर्भस्थ शिशु भी संक्रमित हो सकता है, साथ मे  जीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति यदि कहीं ब्लड डोनेट करता है ,तो उस  ब्लड में भी जीका वायरस होता है। इस प्रकार ये खून जिसके श

Guru poornima in india

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Guru purnima:             सद्गुरु ने कहा है कि गुरु  वो व्यक्ति नही है जो मशाल लेकर आपको रास्ता दिखाने के लिए खड़ा है बल्कि गुरु स्वयं   मसाल है ,-सद्गुरु           गुरु का काम ग्रंथों या पुराणों  का व्याख्या करना नही है बल्कि  गुरु का काम आपको जीवन के एक आयाम से दुसरे आयाम तक ले जाना है-सद्गुरु         भारतीय संस्कृति  में गुरु का स्थान बहुत ऊँचा है ,,क्योंकि गुरु ही शिष्य को गलत रास्ते से सन्मार्ग की तरफ ले जा सकता है,जहां गुरुर्ब्रम्हा ,गुरुर्विष्णु ,गुरुर्साक्षात परंब्रम्हा तस्मै श्री गुरुवे नमः उच्चारित किया गया ,गुरु को ब्रम्हा विष्णु महेश तीनों का संयुक्त रूप कहा गया है, गुरु शिष्य परम्परा में ही वेद शिष्यों द्वारा सिर्फ सुनकर रटने पीढ़ी दर पीढ़ी पहुँचाया गया, इन्ही वेदों को चार रूप में संकलन महर्षि वेदव्यास ने ही किया।         पौराणिक काल से जुडी हुई बहुत सी कथाओं   में  ये  जानकारी मिलती  है कि हर प्रतापी राजा, या महान सन्त के पीछे उसका गुरु था ,जैसे अर्जुन के पीछे द्रोणाचार्य,   राम के पीछे  ऋषि    विश्वामित्र   कृष्ण  के पीछे  ऋषि संदीपनी आदि जिससे ये पता चलता है कि