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Showing posts from July 16, 2019

Bitcoin क्या है|कैसे काम करता है| कैसे कमाया जा सकता है?

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  Bitcoin क्या है|कैसे काम करता हैऔर कैसे कमाया जा सकता है? बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है जिसे अंग्रेजी भाषा मे क्रिप्टो करेंसी कहते है क्रिप्टो करेंसी कई एक हैं उनमें से एक का नाम बिटकॉइन है , बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है  जिसे आप  छुकर या टटोल कर नहीं देख सकते हो। बिटकॉइन का न तो   नोटों के रूप में या सिक्कों के रूप में लेन देन होता है  न ही  आप  बिटकॉइन को अपने रुपये रखने वॉलेट या पर्स या बटुआ  में  रख सकते हो जैसे  दूसरे नोट और सिक्के को पर्स में रखते हो ।       Bitcoin सिर्फ कम्यूटर  नेटवर्किंग  से बने  एक  डिजिटल वॉलेट में रखे जा सकते हैं जिसमे बिटकॉइन मूल्यों के रूप में रखे जाते हैं जब बिटकॉइन को किसी दूसरे के पास भेजा जाता है तो भेजने जाने वाले व्यक्ति की अन्य जानकारी कोई चुरा नहीं पाता क्योंकि यह peer to peer ट्रांसेक्शन होता है हर लेन देन में एक नए ब्लॉक का निर्माण होता है जो पूरे कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़े रहते है।  बिटकॉइन का कोई एक मालिक नहीं है।यानी किसी एक व्यक्ति का स्वामित्व नहीं है। बिटकॉइन को कंट्रोल करने के लिए कोई सेंट्रलाइज अथॉरिटी नहीं है। कई अर्थ शास्त्रियों ने त

Guru poornima in india

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Guru purnima:             सद्गुरु ने कहा है कि गुरु  वो व्यक्ति नही है जो मशाल लेकर आपको रास्ता दिखाने के लिए खड़ा है बल्कि गुरु स्वयं   मसाल है ,-सद्गुरु           गुरु का काम ग्रंथों या पुराणों  का व्याख्या करना नही है बल्कि  गुरु का काम आपको जीवन के एक आयाम से दुसरे आयाम तक ले जाना है-सद्गुरु         भारतीय संस्कृति  में गुरु का स्थान बहुत ऊँचा है ,,क्योंकि गुरु ही शिष्य को गलत रास्ते से सन्मार्ग की तरफ ले जा सकता है,जहां गुरुर्ब्रम्हा ,गुरुर्विष्णु ,गुरुर्साक्षात परंब्रम्हा तस्मै श्री गुरुवे नमः उच्चारित किया गया ,गुरु को ब्रम्हा विष्णु महेश तीनों का संयुक्त रूप कहा गया है, गुरु शिष्य परम्परा में ही वेद शिष्यों द्वारा सिर्फ सुनकर रटने पीढ़ी दर पीढ़ी पहुँचाया गया, इन्ही वेदों को चार रूप में संकलन महर्षि वेदव्यास ने ही किया।         पौराणिक काल से जुडी हुई बहुत सी कथाओं   में  ये  जानकारी मिलती  है कि हर प्रतापी राजा, या महान सन्त के पीछे उसका गुरु था ,जैसे अर्जुन के पीछे द्रोणाचार्य,   राम के पीछे  ऋषि    विश्वामित्र   कृष्ण  के पीछे  ऋषि संदीपनी आदि जिससे ये पता चलता है कि