जगदीश स्वामीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni

Image
जगदीश स्वमीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni जगदीश स्वामीनाथ( Jagdeesh Swaminathan ) भारतीय चित्रकला क्षेत्र के वो सितारे थे जिन्होंने अपनी एक अलग फक्कड़ जिंदगी व्यतीत किया ,उन्होंने अपने बहुआयामी व्यक्तित्व में जासूसी उपन्यास भी लिखे तो सिनेमा के टिकट भी बेचें।उन्होंने कभी भी अपनी सुख सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया ।   जगदीश स्वामीनाथन का बचपन -(Childhood of Jagdish Swminathan) जगदीश स्वामीनाथन का जन्म 21 जून 1928 को शिमला के एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ।इनके पिता एन. वी. जगदीश अय्यर एक परिश्रमी कृषक थे एवं उनकी माता जमींदार घराने की थी  और तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे। जगदीश स्वामीनाथन उनका प्रारंभिक जीवन शिमला में व्यतीत हुआ था ।शिमला में ही प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की यहां पर इनके बचपन के मित्र निर्मल वर्मा और रामकुमार भी थे। जगदीश स्वामीनाथन बचपन से बहुत जिद्दी स्वभाव के थे,उनकी चित्रकला में रुचि बचपन से थी पर अपनी जिद्द के कारण उन्होंने कला विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया। उन्होंने हाईस्कूल पास करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की PMT परीक्षा (प्री मेडिकल टेस्ट) में

Ramkumar रामकुमार Artist की जीवनी

 राम कुमार का जन्म 23 सितंबर 1924 को शिमला में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था।रामकुमार के पिता पंजाब के शहर पटियाला में ब्रिटिश सरकार में एक सरकारी प्रशासनिक पद में कार्यरत थे,रामकुमार के सात भाई और बहनें थीं।

रामकुमार ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज  से अर्थशास्त्र विषय मे M. A. किया ।

     उनका कला के प्रति रुझान तब प्रारम्भ हुआ जब एक बार वह अपने मित्र के साथ अपने कॉलेज सेंट स्टीफ़न से घर लौट रहे थे,उस समय उन्होंने रास्ते मे कनॉट प्लेस पर लगी एक कला प्रदर्शनी में घूमने का अवसर मिला।वह उस कला प्रदर्शनी से अत्यधिक आकृष्ट हुए और अपने अंदर छिपी कला प्रतिभा को भी निखारने का निर्णय लिया।

रामकुमार artist की जीवनी
[रामकुमार आर्टिस्ट]

      उन्होंने शारदा उकील स्कूल ऑफ आर्ट दिल्ली में कला शिक्षा प्राप्ति के लिए एडमिशन लिया,यहाँ पर कला शिक्षा शैलोज मुखर्जी के निर्देशन में ग्रहण की और कला को बारीकी से जाना।

इस दौरान उन्होंने कला की पूर्ण दक्षता प्राप्ति में बाधक अपने बैंक की  नौकरी से स्तीफा दे दिया।

कला के उच्च पिपासा को शांत करने के लिए  उन्होंने पेरिस जाने का निर्णय लिया और इसके लिए उन्होंने अपने पिता को रजामंद किया।

उन्होंने 1950 से1952 तक कला अध्ययन हेतु पेरिस में रहे ,यहाँ  पर आंद्रे लाहोत फर्नांड  लेजर के निर्देशन में भी काम सीखा सन 1970 और 1972 में जे. आर. डी. टाटा फैलोशिप  और रॉकफेलर फेलोशिप मिलने पर वह अमेरिका की यात्रा की 

 पेरिस में ही रामकुमार की मुलाक़ात एस एच रजा और एम एफ हुसैन जैसे दिग्गज़ आर्टिस्टों से हुई। 

रामकुमार ने अपनी चित्रण शैली में अमूर्तता की शुरुआत की ,उन्होंने अपनी अमूर्त चित्रण शैली में भी मूर्त रूप  (figurative)में कार्य किया।

रामकुमार के प्रारंभिक चित्रों में जनमानस और युवाओं के निराशा,उदासी,हताशा दिखाई देती है।

रामकुमार में वातावरण की उदासीनता और वातावरण के उल्लास और प्रसन्नता के भावों को ब्रश से अपने पोट्रेट में उतारने की अदभुत क्षमता थी।

बेरोजगार,स्नातक,पीड़ा,विस्मय,कौतूहल,निराश्रित आदि शीर्षकों में रामकुमार ने चित्र  बनाये,इन चित्रों में उन्होंने व्यक्तियों के चेहरे में परेशानी के भाव ,और दुःख ,त्रासदी को सामाजिक परिवेश में दिखाया है।आपके चित्रों में मानवीय संवेदना भलीभांति दिखाई  देती है।

 चित्रकार रामकुमार ने अपने चित्रों की रचना से एक अलग दुनिया की रचना की है इसलिए उन्हें 'मनुष्य की सभ्यता 'का चित्रकार भी कहा जाता है।

1960 और 1970 के बीच के समय रामकुमार ने अमूर्त चित्रण कला शुरुआत की,उन्होंने बनारस के आसपास के दृष्यचित्र बनाये जिसमें पूरी तरह अमूर्त चित्रकारी थी। उन्होंने बनारस के घाटों के अमूर्त चित्र,बनारस के गंगा नदी के किनारे बालू के टीलों के अमूर्त चित्र,गंगा की लहरों के अमूर्त चित्र,बनारस के मकानों की अमूर्त दृष्यचित्र बनाये। बनारस चित्र  श्रृंखला में उन्होंने जापानी इंक और  वैक्स पद्धति का प्रयोग किया था।

खंडहर,बनारस के घाट,धूप छाव के बीच,परिजन,स्वप्न,दो बहने, शहर,नदी जैसे कई चित्र बनाये।

1970 के दशक में रामकुमार ने ग्रीक की यात्रा की यहाँ पर उन्होंने प्राचीन,अर्वाचीन और ग्रीक कला शैली को देखा।रामकुमार अपने गुरु फर्नानन्द लीजेंड के क्यूबिस्ट शैली के आधार पर नालीवादी(Cubist) चित्र रचनाएं की।

कुछ प्रसिद्ध चित्र रचनाएं--

1954 में परिवार

1957 में दो बहनें(लिथोग्राफ)

1958 सपना(तैल माध्यम)

1965 श्रद्धांजलि(तैल)

1965 नगर दृश्य

1982 उड़ान(तैल)

1966बसंत(तैल)

 बैगाबॉण्ड

रामकुमार एक चित्रकार के साथ एक साहित्यकार भी थे ,उन्होंने आठ पुस्तकें लिखीं जिसमे दो उपन्यास थे तथा कुछ यात्रा संस्मरण थे।

    रामकुमार को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उत्तरप्रदेश सरकार ने सन1975 में  सर्वश्रेठ हिंदी कहानीकार के रूप में सम्मानित किया ।

     रामकुमार के बड़े भाई प्रसिद्ध साहित्यकार थे उनका नाम  निर्मल वर्मा था। इन्ही भाई से प्रभावित होकर उन्होंने साहित्य में भी रचनाएं की थी ,पर वस्तुतः वह एक चित्रकार ही थे।

प्रदर्शनियां--

रामकुमार ने अपने चित्रों की पहली एकल प्रदर्शनी शिमला में 1948 में लगाई।

1980 में कलकत्ता में एकल प्रदर्शनी

1984 में दिल्ली में एकल प्रदर्शनी

1986 में मुम्बई में एकल प्रदर्शनी।

विदेश की प्रदर्शनियां--

1950 पेरिस में

1955 प्राग में

1957 कोलंबो में

1958 पोलैंड

1959 अमेरिका में

1966 लंदन में

पुरुस्कार---

आपको अपनी श्रेष्ठ रचनाओं के कारण 1956 और 1958 में ललित कला अकादमी पुरस्कार मिला।

1958 में एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट से सम्मानित किया गया।

1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

1986 में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा कालिदास सम्मान से सम्मानित किया गया।

2010 में पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत किया गया।

   नोट-रामकुमार की एक पेंटिंग द बैगाबॉण्ड क्रिस्टी आर्ट गैलरी में 11 लाख मूल्य में बिकी।

मृत्यु -

रामकुमार की मृत्यु 93 साल की उम्र में 14 अप्रैल 2018 को हुई।


Comments

Popular posts from this blog

नव पाषाण काल का इतिहास Neolithic age-nav pashan kaal

Gupt kaal ki samajik arthik vyavastha,, गुप्त काल की सामाजिक आर्थिक व्यवस्था

मध्य पाषाण काल| The Mesolithic age, middle Stone age ,madhya pashan kaal