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Showing posts from January 8, 2022

गणेश शंकर विद्यार्थी: कलम के सिपाही और सांप्रदायिक एकता के महानायक | हिंदी जीवनी

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  कलम के सिपाही और सांप्रदायिक एकता के महानायक: गणेश शंकर विद्यार्थी ​ प्रस्तावना ​भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे योद्धा हुए जिन्होंने तलवार और बंदूकों से अंग्रेजों का मुकाबला किया, लेकिन एक ऐसा व्यक्तित्व भी था जिसने अपनी 'कलम' को सबसे शक्तिशाली हथियार बनाया। वह नाम है— गणेश शंकर विद्यार्थी । विद्यार्थी जी केवल एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि वे एक संस्था, एक विचारधारा और निर्भीकता के साक्षात प्रतीक थे। कानपुर की धरती को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले इस महामानव ने न केवल ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिलाया, बल्कि मानवता और सांप्रदायिक सद्भाव की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। आज के दौर में जब पत्रकारिता के मूल्यों पर सवाल उठते हैं, तब विद्यार्थी जी का जीवन और उनका 'प्रताप' एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ की तरह नजर आता है। “कलम को हथियार बनाकर अन्याय के विरुद्ध खड़े हुए गणेश शंकर विद्यार्थी—पत्रकारिता और मानवता का अमर प्रतीक।” ​जन्म, पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रारंभिक संघर्ष ​गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म  26 अक्टूबर 1890  को अपने ननिहाल  प्रयागराज (इलाहाबाद) ...

सोमनाथ होर भारत के प्रिंटमकेर और मूर्तिकार की जीवनी

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सोमनाथ होर भारत के  प्रिंटमकेर और की जीवनी हिंदी में  Biography of Somnath Hore Indian Printmaker& Sculpturist सोमनाथ होरे प्रिंटमेकर की जीवनी--   सोमनाथ और भारत के मूर्तिकार तथा प्रिंटमेकर थे     इनके स्केच इनके द्वारा बनाए गए विभिन्न प्रिंट तथा अनेक मूर्तियाँ  जो इन्होंने बनाई है  इसमें  एक  बंगाल में बीसवीं शताब्दी में हुए ऐतिहासिक क्राइसिस को प्रदर्शित करती हैं जैसे 1943 हुए बंगाल का दुर्भिक्ष और बाद में हुए तेभागा आंदोलन  सोमनाथ होर जी को  प्रिंट मेकिंग तथा मूर्तिकला में अहम योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पदम विभूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया  है। सोमनाथ होर भारत के प्रिंटमकेर और मूर्तिकार की जीवनी प्रारंभिक जीवन--- सोमनाथ होर का जन्म 1921 में चटगांव बांग्लादेश में हुआ है और जब वह बहुत छोटे थे तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी और उनकी शिक्षा-दीक्षा उनके चाचा के द्वारा हुई जब वह युवा थे तभी वह कम्युनिस्ट पार्टी से प्रभावित हो गए और उस पार्टी के सदस्य बन गए उनकी प्रारंभिक कला में समाजवादी विचारधारा ...