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Showing posts from July 12, 2019

जीका वायरस रोग के लक्षण और बचाव

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 जीका वायरस रोग के लक्षण और बचाव--     एक साल पूर्व जीका वायरस का प्रकोप केरल और कुछ दक्षिणी भारत के राज्यों तक सुनने को मिल रहा था,आज 2021 में जीका वायरस के मरीज उत्तर भारत तक पैर पसार चुका है ,मध्यप्रदेश,गुजरात,राजस्थान  में कई जिलों में पैर पसार रहा है जीका वायरस  छोटे शहरों कस्बों तक भी फैल रहा है ,इस रोग के लक्षण वाले मरीज़ उत्तर प्रदेश के,इटावा ,कन्नौज,जालौन ,फतेहपुर में मिले हैं। उत्तर भारत और मध्य भारत तक इसके मरीज  बहुतायत में मिले हैं। कैसे फैलता है जीका वायरस-- जीका वायरस का संक्रमण मच्छरों के द्वारा होता है,वही मच्छर जिनसे डेंगू और चिकुनगुनिया होता है, यानी मच्छर काटने के बाद ही जीका वायरस फैलता है। थोड़ा सा अंतर भी है डेंगू वायरस और जीका वायरस में ,जीका वायरस  से यदि एक बार कोई संक्रमित हो जाता है ,और वह अपने साथी से शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे भी संक्रमित कर सकता है,साथ मे संक्रमित माता के पेट मे पल रहे गर्भस्थ शिशु भी संक्रमित हो सकता है, साथ मे  जीका वायरस से संक्रमित व्यक्ति यदि कहीं ब्लड डोनेट करता है ,तो उस  ब्लड में भी जीका वायरस होता है। इस प्रकार ये खून जिसके श

Bio Diversity| जैव विविधता क्या होती है ।

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                    हमारे पृथ्वी में एक ही जाति के पौधे में ,जानवरों,जीव जन्तुओं में भारी विविधता  है, यदि हम गौर करें कृषि में तो हमें धान ,दाल और हर खाद्यान्न की कई वैराइटी मिलती है , जिनमे अपनी कुछ निजी विशेषतायें भी होती है,इसी तरह पक्षियों में देखिये उदाहरण तोता लेते है दुनिया भर में तोते अलग अलग चोंच ,रंग,पंख के रंग,उनके आकार ,उनके पंजो में अलग अलग बनावट मिलेगी घरों में पाले जाने वाले विभिन्न नस्ल के कुत्ते देखतें ही है हम सब ,पशुपालन में भैंस ,गाय की विविध नस्ल    की दुधारू  जानवरों को श्रेणीबद्ध करतें है ये विविधता "आनुवंशिक विविधता "कहलाती है क्योंकि एक जाति के जीव में जीन्स के बदलाव से एक नई नस्ल का जीव बनता है जो अपने पूर्वज से भिन्न गुण रखता है ,इसीतरह दुनिया भर में एक ही जीव की हजारों प्रजातियां पाई जाती है  सूक्ष्म जीव से लेकर विशाल हाँथी तक के अलग अलग किस्म की प्रजातियाँ  "प्रजाति विविधता "कहलाती है, हमारे पृथ्वी में इस समय 20 हजार चींटियों की जातियां,28 हजार मछलियों की जातियाँ,3 लाख भौंरों की जातियाँ पाई जातीं है,परंतु ये जाति गणना अभी भी पू