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Showing posts from July 12, 2019

जगदीश स्वामीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni

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जगदीश स्वमीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni जगदीश स्वामीनाथ( Jagdeesh Swaminathan ) भारतीय चित्रकला क्षेत्र के वो सितारे थे जिन्होंने अपनी एक अलग फक्कड़ जिंदगी व्यतीत किया ,उन्होंने अपने बहुआयामी व्यक्तित्व में जासूसी उपन्यास भी लिखे तो सिनेमा के टिकट भी बेचें।उन्होंने कभी भी अपनी सुख सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया ।   जगदीश स्वामीनाथन का बचपन -(Childhood of Jagdish Swminathan) जगदीश स्वामीनाथन का जन्म 21 जून 1928 को शिमला के एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ।इनके पिता एन. वी. जगदीश अय्यर एक परिश्रमी कृषक थे एवं उनकी माता जमींदार घराने की थी  और तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे। जगदीश स्वामीनाथन उनका प्रारंभिक जीवन शिमला में व्यतीत हुआ था ।शिमला में ही प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की यहां पर इनके बचपन के मित्र निर्मल वर्मा और रामकुमार भी थे। जगदीश स्वामीनाथन बचपन से बहुत जिद्दी स्वभाव के थे,उनकी चित्रकला में रुचि बचपन से थी पर अपनी जिद्द के कारण उन्होंने कला विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया। उन्होंने हाईस्कूल पास करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की PMT परीक्षा (प्री मेडिकल टेस्ट) में

Bio Diversity| जैव विविधता क्या होती है ।

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                    हमारे पृथ्वी में एक ही जाति के पौधे में ,जानवरों,जीव जन्तुओं में भारी विविधता  है, यदि हम गौर करें कृषि में तो हमें धान ,दाल और हर खाद्यान्न की कई वैराइटी मिलती है , जिनमे अपनी कुछ निजी विशेषतायें भी होती है,इसी तरह पक्षियों में देखिये उदाहरण तोता लेते है दुनिया भर में तोते अलग अलग चोंच ,रंग,पंख के रंग,उनके आकार ,उनके पंजो में अलग अलग बनावट मिलेगी घरों में पाले जाने वाले विभिन्न नस्ल के कुत्ते देखतें ही है हम सब ,पशुपालन में भैंस ,गाय की विविध नस्ल    की दुधारू  जानवरों को श्रेणीबद्ध करतें है ये विविधता "आनुवंशिक विविधता "कहलाती है क्योंकि एक जाति के जीव में जीन्स के बदलाव से एक नई नस्ल का जीव बनता है जो अपने पूर्वज से भिन्न गुण रखता है ,इसीतरह दुनिया भर में एक ही जीव की हजारों प्रजातियां पाई जाती है  सूक्ष्म जीव से लेकर विशाल हाँथी तक के अलग अलग किस्म की प्रजातियाँ  "प्रजाति विविधता "कहलाती है, हमारे पृथ्वी में इस समय 20 हजार चींटियों की जातियां,28 हजार मछलियों की जातियाँ,3 लाख भौंरों की जातियाँ पाई जातीं है,परंतु ये जाति गणना अभी भी पू