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विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी

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 विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी: मोरिस डेविस का प्रारंभिक जीवन विलियम मोरिस डेविस का जन्म फिलाडेल्फिया  यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में हुआ था । डेविस ने हारवर्ड  से1869 में स्नातक की उपाधि ग्रहण की,सन 1870 से 1873 तक वह अर्जेंटीना के कार्डोबा के मौसम विज्ञान वेधशाला में सहायक के रूप में काम किया , हार्वर्ड से वापस लौटने के बाद इन्होंने वह भूगर्भीय व भूआकृति विज्ञान का अध्ययन किया,सन 1876 में उसे सहायक प्रोफेसर का शेलर का सहायक बना और उनके साथ रहकर भूगर्भ विज्ञान और भूआकृति विज्ञान का अध्ययन करने लगा 1878 में अस्सिटेंट प्रोफ़ेसर बने और 1899 में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए  1890  विलियम डेविस ने सार्वजनिक  स्कूलों में भूगोल के मानकों को निर्धारित किया उनके अनुसार प्राथमिक विद्यालयों ,माध्यमिक विद्यालयों में भूगोल को विज्ञान की तरह शिक्षा देना चाहिए ,डेविस ने भूगोल को विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाये जाने के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम बनाने में सहायता प्रदान की। 1904 में वह अमेरिका के सारे प्रशिक्षित भूगोलवेत्ताओं से मुलाकात की ,और इन शिक्षाविदों का संगठन तैयार किया। 1904 में एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन जिओग

Bio Diversity| जैव विविधता क्या होती है ।

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                    हमारे पृथ्वी में एक ही जाति के पौधे में ,जानवरों,जीव जन्तुओं में भारी विविधता  है, यदि हम गौर करें कृषि में तो हमें धान ,दाल और हर खाद्यान्न की कई वैराइटी मिलती है , जिनमे अपनी कुछ निजी विशेषतायें भी होती है,इसी तरह पक्षियों में देखिये उदाहरण तोता लेते है दुनिया भर में तोते अलग अलग चोंच ,रंग,पंख के रंग,उनके आकार ,उनके पंजो में अलग अलग बनावट मिलेगी घरों में पाले जाने वाले विभिन्न नस्ल के कुत्ते देखतें ही है हम सब ,पशुपालन में भैंस ,गाय की विविध नस्ल    की दुधारू  जानवरों को श्रेणीबद्ध करतें है ये विविधता "आनुवंशिक विविधता "कहलाती है क्योंकि एक जाति के जीव में जीन्स के बदलाव से एक नई नस्ल का जीव बनता है जो अपने पूर्वज से भिन्न गुण रखता है ,इसीतरह दुनिया भर में एक ही जीव की हजारों प्रजातियां पाई जाती है  सूक्ष्म जीव से लेकर विशाल हाँथी तक के अलग अलग किस्म की प्रजातियाँ  "प्रजाति विविधता "कहलाती है, हमारे पृथ्वी में इस समय 20 हजार चींटियों की जातियां,28 हजार मछलियों की जातियाँ,3 लाख भौंरों की जातियाँ पाई जातीं है,परंतु ये जाति गणना अभी भी पू