गणेश शंकर विद्यार्थी: कलम के सिपाही और सांप्रदायिक एकता के महानायक | हिंदी जीवनी
कलम के सिपाही और सांप्रदायिक एकता के महानायक: गणेश शंकर विद्यार्थी प्रस्तावना भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे योद्धा हुए जिन्होंने तलवार और बंदूकों से अंग्रेजों का मुकाबला किया, लेकिन एक ऐसा व्यक्तित्व भी था जिसने अपनी 'कलम' को सबसे शक्तिशाली हथियार बनाया। वह नाम है— गणेश शंकर विद्यार्थी । विद्यार्थी जी केवल एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि वे एक संस्था, एक विचारधारा और निर्भीकता के साक्षात प्रतीक थे। कानपुर की धरती को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले इस महामानव ने न केवल ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिलाया, बल्कि मानवता और सांप्रदायिक सद्भाव की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। आज के दौर में जब पत्रकारिता के मूल्यों पर सवाल उठते हैं, तब विद्यार्थी जी का जीवन और उनका 'प्रताप' एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ की तरह नजर आता है। “कलम को हथियार बनाकर अन्याय के विरुद्ध खड़े हुए गणेश शंकर विद्यार्थी—पत्रकारिता और मानवता का अमर प्रतीक।” जन्म, पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रारंभिक संघर्ष गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म 26 अक्टूबर 1890 को अपने ननिहाल प्रयागराज (इलाहाबाद) ...