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Showing posts from September 15, 2019

Pashan kaal ka itihas

 पाषाण काल वह काल है जब मनुष्य ने अपना जीवन प्रस्तरों के मध्य में ही गुजारा , उसने अपने भोजन की व्यवस्था भी पाषाणों के माध्यम से ही की , पाषाण काल की बात करेंगे तो  बहुत पहले जाना पड़ेगा ,पृथ्वी की उत्पत्ति 4 अरब साल पहले हुई ,धीरे धीरे पृथ्वी ठंढी हुई , पृथिवी में क्रमशः एक कोशकीय से बहुकोशकीय जीव बने , बाद में  जलीय प्राणी से उभयचर , बने ,  सरीसृप उभयचर से सरीसृप ,सरीसृप से पक्षी ,  पक्षी से स्तन धारी,  स्तनधारी के उद्विकास से  गिलहरी , बन्दर होते हुए  आदि मानव बना ,आदिमानव की उत्पत्ति 20 लाख वर्ष पूर्व हुई, इस काल में पृथ्वी में बर्फ़ जमी थी ,इस काल में मनुष्य को जीवित रहने के लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ा ।          पाषाण युग में भी उत्तरोत्तर विकास हुआ , पहले उसने बड़े बड़े प्रस्तर को काटकर नुकीला  बनाया ,फिर उनको नुकीला बनाया ,उनको हथियार के रूप में प्रयोग करके  जानवरों का शिकार किया ,  धीरे धीरे प्रस्तर का आकर छोटा हुआ , और  नुकीला हुआ  , जिससे तेजी से जानवरों को मारा जा सके,।        इस युग में मानव ने अपना आवास गुफाओं में  बनाया , वह धीरे धीरे अग्नि को प्रज्वलित करना सीखा।