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गणेश शंकर विद्यार्थी: कलम के सिपाही और सांप्रदायिक एकता के महानायक | हिंदी जीवनी

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  कलम के सिपाही और सांप्रदायिक एकता के महानायक: गणेश शंकर विद्यार्थी ​ प्रस्तावना ​भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे योद्धा हुए जिन्होंने तलवार और बंदूकों से अंग्रेजों का मुकाबला किया, लेकिन एक ऐसा व्यक्तित्व भी था जिसने अपनी 'कलम' को सबसे शक्तिशाली हथियार बनाया। वह नाम है— गणेश शंकर विद्यार्थी । विद्यार्थी जी केवल एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि वे एक संस्था, एक विचारधारा और निर्भीकता के साक्षात प्रतीक थे। कानपुर की धरती को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले इस महामानव ने न केवल ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिलाया, बल्कि मानवता और सांप्रदायिक सद्भाव की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। आज के दौर में जब पत्रकारिता के मूल्यों पर सवाल उठते हैं, तब विद्यार्थी जी का जीवन और उनका 'प्रताप' एक मार्गदर्शक प्रकाश स्तंभ की तरह नजर आता है। “कलम को हथियार बनाकर अन्याय के विरुद्ध खड़े हुए गणेश शंकर विद्यार्थी—पत्रकारिता और मानवता का अमर प्रतीक।” ​जन्म, पारिवारिक पृष्ठभूमि और प्रारंभिक संघर्ष ​गणेश शंकर विद्यार्थी का जन्म  26 अक्टूबर 1890  को अपने ननिहाल  प्रयागराज (इलाहाबाद) ...

Pashan kaal ka itihas

  पाषाण काल वह काल है जब मनुष्य ने अपना जीवन प्रस्तरों के मध्य में ही गुजारा , उसने अपने भोजन की व्यवस्था भी पाषाणों के माध्यम से ही की , पाषाण काल की बात करेंगे तो  बहुत पहले जाना पड़ेगा ,पृथ्वी की उत्पत्ति 4 अरब साल पहले हुई ,धीरे धीरे पृथ्वी ठंढी हुई  ,पृथ्वी  में क्रमशः एक कोशकीय से बहुकोशकीय जीव बने , बाद में जलीय प्राणी से उभयचर , बने , सरीसृप उभयचर से सरीसृप ,सरीसृप से पक्षी ,  पक्षी से स्तन धारी, स्तनधारी के उद्विकास से  गिलहरी , बन्दर होते हुए  आदि मानव बना,आदिमानव की उत्पत्ति 20 लाख वर्ष पूर्व हुई, इस काल में पृथ्वी में बर्फ़ जमी थी ,इस काल में मनुष्य को जीवित रहने के लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ा ।          पाषाण युग में भी उत्तरोत्तर विकास हुआ , पहले उसने बड़े बड़े प्रस्तर को काटकर नुकीला  बनाया ,फिर उनको नुकीला बनाया ,उनको हथियार के रूप में प्रयोग करके  जानवरों का शिकार किया , धीरे धीरे प्रस्तर का आकर छोटा हुआ , और  नुकीला हुआ ,जिससे तेजी से जानवरों को मारा जा सके।        इस युग में...