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Showing posts from March 5, 2020

असित कुमार हलदार आर्टिस्ट की biography

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 असित कुमार हाल्दार आर्टिस्ट की बायोग्राफी असित कुमार हाल्दार एक कल्पना शील, भावप्रवण चित्रकार के साथ साथ अच्छे साहित्यकार ,शिल्पकार, कला समालोचक,चिंतक,कवि,विचारक भी थे। असित कुमार हाल्दार का प्रारंभिक जीवन--- असित कुमार हलदार का जन्म सन 1890 पश्चिम बंगाल के जोड़ासांको नामक स्थल में  स्थित टैगोर भवन  के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इनकी नानी रवींद्र नाथ टैगोर की बहन थीं।   असित कुमार हलदार के बाबा  का नाम राखालदास हाल्दार था  जो उस समय लंदन विश्वविद्यालय में संस्कृत विषय के प्राध्यापक थे, और पिता सुकुमार हाल्दार भी कला में निपुण थे  ,उनकी प्रेरणा से असित कुमार हलदार को भी कला में अभिरुचि जगी। साथ मे वो बचपन से ही ग्रामीणों के बीच रहकर उनकी पटचित्र कला को गौर से देखा और समझा था।  15 वर्ष की आयु में हाल्दार को कलकत्ता के गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला मिल गया , यहां पर इनको गुरु के रूप में  अवनींद्र नाथ टैगोर का सानिध्य मिला। उनसे उन्होंने कला की बारीकियों को सीखा,  यहां पर इन्होंने जादू पाल और बकेश्वर पाल से मूर्तिकला सीखी।    यहां आपको पर असित कुमार हाल्दार को अपने कक्षा में अन्

पुनुरुत्थान कालीन (Renaissance) फ्लोरेन्स के चित्रकार ,मासाच्चीयो,फ्रा एंजेलिको, बोत्तीचेल्ली

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 पुनरुत्थान  कालीन  (Renaissance)  में फ्लोरेन्स के कलाकार मासच्चिओ, फ्रा एंजेलिको, पाउलो उच्चेलो। पंद्रहवीं शती की फ्लोरेंस की कला प्राकृतिकता वाद की ओर अग्रसर हो गई  ,इसका सूत्रपात जियोत्तो द्वारा किया गया , आगे  यह विचारधारा दो भागों में बट गई एक मनोवैज्ञानिक दूसरी भौतिकी ,द्वितीय भाग की कला में तीन बातों पर बल दिया गया ,1-परिप्रेक्ष्य का अध्ययन2-शरीर का स्थिर व गतिपूर्ण  स्थितियों का अध्ययन 3-जड़ और चेतन वस्तुओं के तथ्यों की विवरणात्मकता।  पुनरुथान शैली की चित्रकला का आरम्भकर्ता मासाच्चीयो था  मासाच्चिओ--- (Masaccio 1401-28) मासाच्चीयो का जन्म 1401 में हुआ था इसकी प्रारंभिक शिक्षा कहाँ हुई ये ज्ञात नहीं है, मासाच्चीयो ने ज्योत्तियो की कला प्रवृत्तियों में ज्योत्तो के कला कृतियों की तरह  की तरह है उसकी कलाकृतियों में जो  गढ़नशीलता और गठन  दिखाई देता है वो किसी समकालीन अन्य कलाकारों में नहीं है , मासाच्चीयो की विशाल भित्तिचित्र रचना ' द ट्रिनिटी'(The Trinity)  जो सांता मारिया नोवेल्ला के गिरिजाघर में  सुरक्षित है , इसी भित्ति चित्र से ये जानकारी मिलती है कि इसमें शास्त्री