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Showing posts from August 29, 2019

Satish Gujral Artist की जीवनी हिंदी में

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    सतीश गुजराल आर्टिस्ट की जीवनी--  Biography of  Satish Gujral Artist --   सतीश गुजराल बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार,मूर्तिकार वास्तुकार,लेखक हैं जिनका जन्म 25 दिसंबर 1925 को झेलम पंजाब (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था।इनको देश के दूसरे सर्वोच्च सिविलियन अवार्ड पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।इनके बड़े भाई इंद्रकुमार गुजराल 1997 से 1998 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे है।जो भारत के 13 वें प्रधानमंत्री थे। सतीश गुजराल का बचपन--    जब सतीश गुजराल मात्र 8 साल के थे तब उनके साथ एक दुर्घटना हो गई उनका पैर  एक नदी के पुल में फिसल गया वह जल धारा में पड़े हुए पत्थरो से गंभीर चोट लगी पर  उन्हें बचा लिए गया,इस दुर्घटना के  कारण उनकी टांग टूट गई तथा सिर में गंभीर चोट आई,सिर में गंभीर चोट के कारण उनको एक  सिमुलस नामक बीमारी ने घेर लिया जिससे  उनकी श्रवण शक्ति चली गई। उनकी श्रवण शक्ति खोने,पैर में चोट लगने के कारण उनको लोग लंगड़ा,बहरा गूंगा समझने लगे।वह पांच साल बिस्तर में ही लेटे रहे,यह समय उनके लिए बहुत ही संघर्ष पूर्ण था।इसलिए वह अकेले में खाली समय बैठकर रेखाचित्र बनाने लगे। 

Major dhyanchand- की जीवनी हिंदी में

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           मेजर ध्यान चन्द-हॉकी के जादूगर Major dhyanchnd का जन्म 29 अगस्त 1905 को ब्रिटिश भारत में हुआ था ,इनका पूरा नाम ध्यानचंद सिंह था, उनके भाई का नाम रूप सिंह था  वो भी हॉकी के कुशल खिलाडी थे , ध्यानचंद  के बाल्यकाल में खिलाड़ी के कोई लक्षण नहीं थे उनकी हाईट  5 फुट 7 इंच ,परंतु युवावस्था में जब वो 17 वर्ष की अवस्था  के थे तब उन्हें सन् 1922 को  सेना  में ब्राम्हण रेजीमेंट में भर्ती  होने का अवसर मिला ,कुछ समय बाद सेना में उनका परिचय  मेजर तिवारी से हुआ जो हाँकी के खिलाड़ी थे ,उनके सम्पर्क में आने के बाद उन्होंने हाँकी खेल की बारीकियाँ सीखी और ख़ुद को एक बेहतरीन खिलाड़ी बनाने के लिए जुनूनी ढंग से खेल खेलते थे वो रात को चाँदनी रात में भी हाँकी खेल में अभ्यास करते रहते थे ,सतत् अभ्यास से  उन्होंने सारी कमजोरियाँ दूर कर ली ,और वो प्रारम्भ में सेना के खेल की प्रतिस्पर्धा में भाग लेते थे 1922 से 1926 तक वो सेना के खेलों में ही हिस्सा लेते थे।उन्हें हॉकी में उम्दा प्रदर्शन से  ध्यानचंद को  लगातार प्रमोशन मिलता रहा ,1927 में ध्यानचंद को प्रमोट करके लांस नायक बना दिया गया। और जब वो 19