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Showing posts from January 1, 2021

Squat व्यायाम क्या है,SQUAT पांच फ़ायदे।

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 SQUAT व्यायाम क्या है -  आप squat व्यायाम से शरीर को फिट रख सकतें हैं वैसे तो शरीर को फिट रखने के लिए बहुत सी exercise करते है , जो आपको चुस्त दुरुस्त रखतीं है, आपकी मसल्स को मजबूती प्रदान करता है ,परंतु सारी एक्सरसाइज के बाद भी आपने अपने दैनिक अभ्यास में squat को सम्मिलित नहीं किया तो आप बहुत कुछ छोड़ रहे हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप आज से ही sqaut को अपने रोज के एक्सरसाइज में सम्मिलित करें । यह अभ्यास महिला और पुरुष दोनों के लिए फायदेमंद है। इस एक्सरसाइज में प्रारम्भ में आपको समस्या आ सकती है परंतु धीरे धीरे रोज़ाना अभ्यास से ये बहुत सरल लगने लगता है। प्रारम्भ में आप इसको करने में किसी चीज का सहारा लेकर कर सकते हैं ,परंतु बाद में आप धीरे धीरे बिना सहारे का अभ्यास कर सकते हैं। इस एक्सरसाइज की विशेषता यह है कि इसे कहीं भी बिना इक्विपमेंट के  भी किया जा सकता है। यह एक्सरसाइज केवल  शरीर के एक भाग को ही मजबूत नही करता बल्कि पूरे शरीर को संतुलित रूप से मजबूत करता है,साधारण तौर पर ऐसा लगता है कि इस एक्सरसाइज से केवल टाँगों(legs)को मज़बूती मिलती है परंतु ऐसी बात नहीं है इस एक्सरसाइज से पूरा शर

के सी एस पणिक्कर आर्टिस्ट की जीवनी

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के. सी. एस. पणिक्कर आर्टिस्ट की जीवनी के सी एस पंनिकर का जन्म 30 मई सन1911 को केरल के कोयंबटूर नामक स्थान पर हुआ था ,इनके पिता चिकित्सक थे और इनको भी चिकित्सा के क्षेत्र से जोड़ना चाहते थे,परंतु पणिकर डॉक्टरी पेशे में नहीं आना चाहते थे  उनका मन कलाकार एक आर्टिस्ट बनना चाहता था,बचपन से ही उनकी प्राकृतिक दृश्यों में रुचि थी पांच वर्ष तक इन्होंने एक बीमा कम्पनी में तथा तार विभाग में भी कार्य किया ,परंतु अपने अंदर कलाकार बनने की चाहत ने उनको उस कार्य को छोड़ना पड़ा तब 1936 में उन्होंने कला की शिक्षा प्राप्त करने के लिए मद्रास स्कूल ऑफ आर्ट्स में प्रवेश लिया यहां पर उनके कला में विशेष प्रवीणता के कारण छै वर्षीय पाठ्यक्रम में सीधे तीसरे साल में प्रवेश दे दिया गया ,इस समय मद्रास स्कूल ऑफ आर्ट्स में देवी प्रसाद राय चौधरी प्रिंसिपल थे ,उनके ही निर्देशन में पणिकर ने दक्षता के साथ डिप्लोमा प्राप्त किया  । उन्होंने डिप्लोमा परीक्षा में सर्वप्रथम स्थान प्राप्त किया डिप्लोमा लेने के बाद यहीं पढ़ाने भी लगे यहां पर धीरे धीरे प्रमोट होते गए पहले अध्यापक बने फिर 1955 में उपप्राचार्य बने बाद में 1957 में प्र