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Showing posts from March 11, 2021

राम वी. सुतार मूर्तिकार की जीवनी

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 राम वी सुतार मूर्तिकार की जीवनी---- राम वी सुतार का प्रारंभिक जीवन ---राम वी सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को जिला धूलिया  ग्राम गुंदूर महाराष्ट्र में हुआ था राम जी सुतार भारत के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार है इनका पूरा नाम राम वन जी सुतार है ,इनके पिता गाँव मे ग़रीब परिवार से थे ,इनका विवाह 1957 में प्रमिला से हुआ ,इनके पुत्र का नाम अनिल रामसुतार है जो पेशे से वास्तुकार हैं और नोयडा में रहते हैं।   शिक्षा -- इनकी शिक्षा इनके गुरु रामकृष्ण जोशी से प्रेरणा लेकर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में हुआ,1953 में इनको इसी कॉलेज से मोडलिंग विधा में गोल्ड मेडल मिला। कार्य - 1958 में आप सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के दृश्य श्रव्य विभाग में तकनीकी सहायक भी रहे 1959 में आपने स्वेच्छा से सरकारी नौकरी त्याग दी और पेशेवर मूर्तिकार बन गए  मोडलर के रूप में औरंगाबाद  आर्कियोलॉजी मे  रहते हुए 1954 से 1958 तक आपने अजंता और एलोरा की प्राचीन  मूर्तियों की पुनर्स्थापन का काम किया।   आप द्वारा निर्मित कुछ मूर्तियां इस प्रकार है -- आपने 150 से अधिक देशों में गांधी जी की मूर्तियां को बनाया --आपने 45 फुट ऊंची चंबल नदी मूर्

शारदा चरण उकील आर्टिस्ट की जीवनी।

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  शारदा चरण उकील आर्टिस्ट की जीवनी:- शारदा चरण उकील  का जन्म  आज के  बांग्लादेश की वर्तमान  राजधानी ढाका में विक्रमपुर नामक स्थान पर  14 नवंबर 1888 को हुआ था । (शारदा चरण उकील प्रेम सन्यास फ़िल्म में राजा शुद्धोधन के रूप में)      आपके दो अन्य भाई थे उनमें आप सबसे बड़े थे दो अन्य भाइयों का नाम बरादा और रानादा था। आप का परिवार 1988 में ढाका से दिल्ली  स्थान्तरित हो गया, आप  बंगाली अभिनेता(actor)थे ,साथ मे आर्टिस्ट भी थे।  एक्टिंग की बात की जाय तो आपने जर्मन डायरेक्टर फ्रांज ऑस्टेन तथा असिस्टेंट डायरेक्टर हिमांशु रॉय के निर्देशन बनी फिल्म " प्रेम सन्यास " थी इस फ़िल्म में इन्होंंने  राजा  बुद्ध के पिता राजा शुधोधन का रोल प्ले किया था। यह फ़िल्म  " लाइट  ऑफ एशिया"  क़िताब पर आधारित थी जिसको अर्विन ओरनाल्ड नामक प्रसिद्ध लेखक ने लिखा था। शारदा चरण उकील की शिक्षा /दीक्षा- शारदा चरण उकील   की कला शिक्षा अवनींद्र नाथ टैगोर के मार्गदर्शन में गवर्नमेंट स्कूल ऑफ आर्ट कोलकाता में हुई। शारदा चरण उकील उन कलाकारों में थे जिन्होंने समय की नब्ज़ को पहचान लिया और अपनी कला में विविधता का सम