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Showing posts from July 1, 2019

राम वी. सुतार मूर्तिकार की जीवनी

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 राम वी सुतार मूर्तिकार की जीवनी---- राम वी सुतार का प्रारंभिक जीवन ---राम वी सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को जिला धूलिया  ग्राम गुंदूर महाराष्ट्र में हुआ था राम जी सुतार भारत के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार है इनका पूरा नाम राम वन जी सुतार है ,इनके पिता गाँव मे ग़रीब परिवार से थे ,इनका विवाह 1957 में प्रमिला से हुआ ,इनके पुत्र का नाम अनिल रामसुतार है जो पेशे से वास्तुकार हैं और नोयडा में रहते हैं।   शिक्षा -- इनकी शिक्षा इनके गुरु रामकृष्ण जोशी से प्रेरणा लेकर जे जे स्कूल ऑफ आर्ट में हुआ,1953 में इनको इसी कॉलेज से मोडलिंग विधा में गोल्ड मेडल मिला। कार्य - 1958 में आप सूचना प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के दृश्य श्रव्य विभाग में तकनीकी सहायक भी रहे 1959 में आपने स्वेच्छा से सरकारी नौकरी त्याग दी और पेशेवर मूर्तिकार बन गए  मोडलर के रूप में औरंगाबाद  आर्कियोलॉजी मे  रहते हुए 1954 से 1958 तक आपने अजंता और एलोरा की प्राचीन  मूर्तियों की पुनर्स्थापन का काम किया।   आप द्वारा निर्मित कुछ मूर्तियां इस प्रकार है -- आपने 150 से अधिक देशों में गांधी जी की मूर्तियां को बनाया --आपने 45 फुट ऊंची चंबल नदी मूर्

Ek पेड़ (tree)se kitni oxygen nikalti hai?

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एक पेड़ से कितनी ऑक्सीजन प्राप्त होती है?               पेंड़ से ऑक्सीजन निर्माण ::  पेंड़ हमें ऑक्सीजन देतें हैं और हमारी साँस से छोड़ी गई कार्बन डाई ऑक्साइड को लेतें है ये बात हम बचपन से पढ़तें आ रहे है, वर्तमान समय में अत्यधिक वाहनों के चलने और उद्योगों की स्थापना से लगातार वातावरण में CO2 का स्राव हो रहा है ,जिसके प्रदूषण से मानव में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, जैसे  साँस के रोग बढ़ रहे हैं, अब लोंगों को लग रहा है कि उनको अधिक से अधिक पेंड़ लगाना चाहिए इन रोंगो से बचने के लिए।                        आख़िर पेंड़ ऑक्सीजन कैसे बनाते है,और कार्बन डाई  ऑक्साइड क्यों लेते है , क्या प्रकृति ने ये व्यवस्था  मानव जाति ,और जीवों के लिए किया है ,ऐसे प्रश्न उठतें हैं! पेंड़ में पत्तियां होती हैं ,इन पत्तियों की त्वचा में  छोटे छोटे छिद्र होतें है जिन्हें स्टोमेटा (रंध्र)कहते  है,ये पत्ती के निचले सतह में होते है,इन छिद्रों में C O 2 गैस वातावरण से प्रवेश करती है, पौधे इनका प्रयोग श्वसन में में करते हैं  दूसरी तरफ पौधे की जड़ें ज़मीन से पानी ओसमोसिस विधि द्वारा लेतीं है और नलिकाओं के माध्यम से पत्