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अजंता की चित्रकला ..मेरी अजंता यात्रा और उनके गुफाओं के चित्र

अजंता की यात्रा ::
अजंता की चित्रकला
अजंता भ्रमण और अजंता की गुफाओं के विश्व प्रसिद्ध चित्र.
 सह्याद्रि पर्वतों के उत्तुंग शिखर जो आज भी हरियाली को समेटे है , चारो तरफ पहाड़ ही पहाड़ दिखाई देते है इस मनोरम स्थल को देखते निहारते हुए जब मैं टैक्सी में बैठे बैठे सोंच रहा था इस रमणीक स्थल में 2000 पहले से मौर्य,सातवाहन, वाकाटक ,राष्ट्रकूट जैसे राजवंशों ने अपनी शौर्य  गाथाएं लिखीं ,  मध्य काल में छत्रपति शिवाजी  के पराक्रम और शौर्य की ये वादियां गवाह है ,  एक नाथ तुकाराम और रामदेव जैसे महान संतो के भजन जिनसे समाज में नई चेतना मिली , मेरा मन प्रफुल्लित था इस वीर भूमि और  शांत भूमि में आकर प्रकृति के साथ अठखेलियां खेलते खेलते औरंगाबाद जिले के गांव फरदारपुर में अजंता के पास पहुंचा, टैक्सी वाले ने मुझे एक होटल में पहुँचाया वो बहुत सुविधाजनक तो नही था पर मैंने एक रात बिताने के लिए ठीक ही समझा , अगले दिन हमने एक टैक्सी ली जिसने दो घण्टे के बाद हमे उस तलहटी में पहुँचाया जहां से ऊपर जाना था अजंता गुफ़ा देखने के लिए ,  टैक्सी के ड्राईवर हमे ऊपर तो ले गए पर   चार किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया क्योंकि महाराष…

Dayanand Sarashvati , social reformer founder of Ary samaj &writer of styarth prakash

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**   महर्षि दयानंद सरस्वती**


दयानंद सरस्वती का जीवन--    हिन्दू धर्म मे व्याप्त बुराइयां 19वीं सदी के ब्रिटिश भारत मे दिखाईं देती थीं, इन्ही बुराइयों को बताकर ईसाई मिशनरियों ने धर्मांतरण का जरिया बना रखा था,इस बीच हिन्दू समाज मे सुधार के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना 1875 में बम्बई ने की थी,ये आंदोलन उस समय के अन्य समाज आंदोलनों से ज्यादा लोकप्रिय और भिन्न था।

               दयानंद सरस्वती जी का जन्म 1824 में गुजरात के काठियावाड़ के मौरवी राज्य के  औदिच्य ब्राम्हण परिवार में  महाशिवरात्रि के दिन  हुआ था, इनके पूर्वज लगभग एक हजार साल पूर्व मूलराज सोलंकी नामक गुजरात नरेश के शासन काल में उदीच् (उत्तर) दिशा से आकर गुजरात में बसे थे ,उदीच् दिशा से आने के कारण इन ब्राम्हणो को औदिच्य कहा जाता है , इनकी माता का नाम अमृतबेन(अमूबा) था ,कहीं कहीं माता का नाम यशोदा भी बताया जाता है ,    इनके पिता वेदों के विद्वान और उन्होंने ही उनको वैदिक वांग्मय तथा न्याय दर्शन की दीक्षा दी थी, मूल नक्षत्र में पैदा होने के कारण इनका  बचपन का नाम मूलशंकर  था, स्वामी जी भाई बहनों मे…