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Showing posts from October 29, 2019

विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी

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 विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी: मोरिस डेविस का प्रारंभिक जीवन विलियम मोरिस डेविस का जन्म फिलाडेल्फिया  यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में हुआ था । डेविस ने हारवर्ड  से1869 में स्नातक की उपाधि ग्रहण की,सन 1870 से 1873 तक वह अर्जेंटीना के कार्डोबा के मौसम विज्ञान वेधशाला में सहायक के रूप में काम किया , हार्वर्ड से वापस लौटने के बाद इन्होंने वह भूगर्भीय व भूआकृति विज्ञान का अध्ययन किया,सन 1876 में उसे सहायक प्रोफेसर का शेलर का सहायक बना और उनके साथ रहकर भूगर्भ विज्ञान और भूआकृति विज्ञान का अध्ययन करने लगा 1878 में अस्सिटेंट प्रोफ़ेसर बने और 1899 में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए  1890  विलियम डेविस ने सार्वजनिक  स्कूलों में भूगोल के मानकों को निर्धारित किया उनके अनुसार प्राथमिक विद्यालयों ,माध्यमिक विद्यालयों में भूगोल को विज्ञान की तरह शिक्षा देना चाहिए ,डेविस ने भूगोल को विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाये जाने के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम बनाने में सहायता प्रदान की। 1904 में वह अमेरिका के सारे प्रशिक्षित भूगोलवेत्ताओं से मुलाकात की ,और इन शिक्षाविदों का संगठन तैयार किया। 1904 में एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन जिओग

Tamra pashan kaal ताम्र पाषाण युग The Chalcolithic Age

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ताम्र पाषाण युग-  The Chalcolithic Age   नव पाषाण कालीन सभ्यता में उत्तरोत्तर विकास के बाद ताम्र पाषाण कालीन सभ्यता का विकास हुआ, इसका समय 5000 से 4000 साल पूर्व  था , इस सभ्यता में तांबे के हथियार सामान्यता प्रयोग में लाये गए , साथ मे कुछ पत्थर के हथियार भी प्रयोग में लाये जाते रहे , यद्यपि ताम्र पाषाण काल की अवधि बहुत ज्यादा नही थी जितनी आगे की सभ्यता लौह युग की परंतु इस सभ्यता के द्वारा किये जा रहे प्रयोगों से ही आगे की सभ्यता को नींव प्रदान की। ताम्र पाषाण काल के हथियार        ताम्र पाषाण युग---     जिस समय सिंधु सभ्यता अपने चरमोत्कर्ष पर थी  उस समय देश के अलग अलग भागों में तांबे को प्रयोग में लाने वाली कुछ कृषक बस्तियां तेजी से विकसित हो रहीं थीं, इन सभी बस्तियों में अपनी अपनी कुछ क्षेत्रीय विशेषतायें भी दिखतीं है,इसलिए क्षेत्रवार इन बस्तियों को अलग अलग स्थल नामों से जाना जाता है।      ताम्र पाषाण कालीन संस्कृति की कुछ सामान्य         विशेषतायें   पाई जातीं थी,ये अधिकांसता ग्रामीण बस्तियां थीं और कृषि पर इनकी आर्थिक स्थिति निर्भर थी,ये गोल तथा आयताकार  झोपड़ियों म