Posts

Showing posts from June 12, 2019

विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी

Image
 विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी: मोरिस डेविस का प्रारंभिक जीवन विलियम मोरिस डेविस का जन्म फिलाडेल्फिया  यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में हुआ था । डेविस ने हारवर्ड  से1869 में स्नातक की उपाधि ग्रहण की,सन 1870 से 1873 तक वह अर्जेंटीना के कार्डोबा के मौसम विज्ञान वेधशाला में सहायक के रूप में काम किया , हार्वर्ड से वापस लौटने के बाद इन्होंने वह भूगर्भीय व भूआकृति विज्ञान का अध्ययन किया,सन 1876 में उसे सहायक प्रोफेसर का शेलर का सहायक बना और उनके साथ रहकर भूगर्भ विज्ञान और भूआकृति विज्ञान का अध्ययन करने लगा 1878 में अस्सिटेंट प्रोफ़ेसर बने और 1899 में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए  1890  विलियम डेविस ने सार्वजनिक  स्कूलों में भूगोल के मानकों को निर्धारित किया उनके अनुसार प्राथमिक विद्यालयों ,माध्यमिक विद्यालयों में भूगोल को विज्ञान की तरह शिक्षा देना चाहिए ,डेविस ने भूगोल को विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाये जाने के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम बनाने में सहायता प्रदान की। 1904 में वह अमेरिका के सारे प्रशिक्षित भूगोलवेत्ताओं से मुलाकात की ,और इन शिक्षाविदों का संगठन तैयार किया। 1904 में एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन जिओग

Mahadev govind ranade ,atmaram pandurang social reformer

Image
महादेव गोविन्द रानाडे-- रानाडे का जन्म महाराष्ट्र के नासिक के एक क़स्बे निफाड़ में हुआ था,ये चितपावन ब्राम्हण थे ,इनके पिता मंत्री पद में थे, इनकी प्रारंभिक शिक्षा एलफ़िन्स्टन कॉलेज में हुई इसके बाद उच्च शिक्षा बम्बई विश्विद्यालय से किया यहां से इन्होंने स्नातकोत्तर और एल. एल .बी .की शिक्षा अर्जित  रानाडे ने ब्रम्हसमाज से प्रेरित होकर  प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग के सहयोग से किया ,रानाडे ने सामाजिक सम्मेलन आंदोलन भी प्रारम्भ किया, साथ में इन्होंने पूना सार्वजनिक सभा नामक राजनैतिक संगठन बनाया।  इन्होंने बाल विवाह,विधवा मुंडन का विरोध किया ,शादी के अवसर पर की जाने वाली फ़िजूलख़र्च को ग़लत बताया , साथ में विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा पर जोर दिया।       :दक्षिण भारत में धर्म सुधार आंदोलन: यदि हम दक्षिण भारत और पश्चिमी भारत की तरफ नजर दौड़ातें हैं तो वहां पर भी उसी समय हिन्दू धर्म में आई कुरीतियों आडंबरों का विरोध सांगठनिक रूप से होता है,यदि पश्चिमी भारत के साथ दक्षिण भारत में मद्रास तक रुख़ करतें है तो वहां भी उसी समय समाज मे व्याप्त बुराइयों के खिलाफ एक जन जागरूक