नीतीश कुमार का जीवन परिचय: सुशासन बाबू से 10 बार मुख्यमंत्री बनने तक का राजनीतिक सफर

 नीतीश कुमार का जीवन परिचय: सुशासन बाबू से 10 बार मुख्यमंत्री बनने तक का राजनीतिक सफर

राजनीति का गढ़ बिहार ,बिहार वो स्थान है जहां के बच्चे बच्चे राजनीति का ककहरा जानते हैं ,बिहार वो स्थान है जहां से भारत की प्राचीन राजनीति मगध से शुरू हुई और पूरे देश में प्राचीन काल में मगध से ही चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य ने निर्दयी निरंकुश आतताई शासक घनानंद को गद्दी से उतारकर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की ,आज भी बिहार भारत की राजनीति को अपने हिसाब से घुमाने का केंद्र है ,यहां के चीफ मिनिस्टर नीतीशकुमार को कौन नहीं जानता ,उनको लोग "पलटू राम" के नाम से भी संबोधित करते हैं क्योंकि उनको ज्ञान रहता है कि राजनीति का ऊंट किस करवट बैठने वाला है ,वो उसी अनुरूप अपना डिसीजन लेते है और फौरन दल बदल लेते हैं। वह कभी लालू की पार्टी का दामन थामकर मुख्यमंत्री बनते हैं तो कभी भाजपा का दामन थाम लेते है ,उनके लिए राजनीति में कोई मित्र शत्रु नहीं होता ।वैसे बिहार के चीफ मिनिस्टर का मुख्य उद्देश्य सत्ता में खुद को बनाए रखकर बिहार को सुशासन देना है इसीलिए इन्हें  लोग सुशासन बाबू के नाम से भी संबोधित करते है , 2025 में नीतीश कुमार भाजपा का दामन थामकर दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बने तो लगा  कि  नीतीशकुमार को जनता इतने लंबे समय तक लगातार मुख्यमंत्री बना रही तो निश्चित ही बिहार की जनता को उनसे बढ़िया व्यक्ति नहीं मिल रहा जो बिहार को सुशासन  दे सके नीतीशकुमार ने बिहार को गुंडाराज माफिया राज अपराधियों के चंगुल से बाहर  निकालने वाला यही ईमानदार  शासक साबित हुए है उन्होंने इतने वर्षों के शासन में बिहार से गुंडागर्दी तो खत्म की ही शराब बंदी करके महिलाओं को सुरक्षित किया उन्होंने महिलाओं को सशक्त करने के लिए पंचायतों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया। उन्होंने सड़कों की दशा सुधारी।​नीतीश कुमार की राजनीति को केवल सत्ता के आंकड़ों से नहीं तौला जा सकता। वे 'मौन क्रांति' के प्रणेता हैं। शराबबंदी, सात निश्चय योजना और न्याय के साथ विकास उनके शासन के मूल मंत्र रहे हैं। विपक्षी उन्हें 'पलटूराम' कहें या समर्थक 'चाणक्य', सत्य यही है कि समकालीन बिहार के इतिहास की किताब नीतीश कुमार के जिक्र के बिना अधूरी है।

नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में सुशासन और विकास के प्रतीक
                                                                         नीतीश कुमार


बिहार के शिल्पकार: नीतीश कुमार का जीवन और सफर

​बिहार की राजनीति में 'सुशासन बाबू' के नाम से अपनी पहचान बनाने वाले नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च, 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। गुरुवार के दिन जन्मे नीतीश की राशि मीन है। उनके बचपन का नाम 'मुन्ना' था, जो आज भी उनके करीबी हलकों में बड़े प्रेम से लिया जाता है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बख्तियारपुर के ही श्रीगणेश हाईस्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए पटना का रुख किया। पटना साइंस कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (जो अब NIT पटना के नाम से जाना जाता है) से साल 1972 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। वे शैक्षणिक रूप से अत्यंत मेधावी छात्र रहे, लेकिन नियति ने उनके लिए बिजली के तारों के बजाय राजनीति की जटिल राहें चुनी थीं।

​नीतीश कुमार के व्यक्तित्व पर उनके परिवार का गहरा प्रभाव रहा। उनके पिता, कविराज रामलखन सिंह, न केवल एक सम्मानित आयुर्वेद चिकित्सक थे, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के एक निडर क्रांतिकारी भी थे। उनकी माता परमेश्वरी देवी एक सरल और कुशल गृहिणी थीं। परिवार में उनके बड़े भाई सतीश कुमार और तीन बहनें—उषा देवी, इंदू देवी और प्रभा देवी—हैं, जिन्होंने सदैव उनके जीवन में एक सहायक स्तंभ की भूमिका निभाई। पारिवारिक जीवन की बात करें तो 22 फरवरी, 1973 को उनका विवाह मंजू कुमारी सिन्हा से हुआ, जो पेशे से एक शिक्षिका थीं। हालांकि, साल 2007 में बीमारी के कारण उनका देहावसान हो गया। उनका एक पुत्र है, निशांत कुमार, जिन्होंने बी.आई.टी. (BIT) से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। दिलचस्प बात यह है कि निशांत राजनीति की चमक-धमक से दूर आध्यात्मिक जीवन की ओर अधिक झुकाव रखते हैं और अपनी सादगी के बावजूद आर्थिक रूप से अपने पिता से कहीं अधिक संपन्न हैं।

​ नीतीश कुमार की राजनीति की शुरुआत  जे.पी. आंदोलन और 1974 के छात्र आंदोलन से हुई। लोहिया और जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो नीतीश कुमार को हमेशा एक साधारण और स्वच्छ छवि वाला नेता माना गया है, जिनके पास अपनी कोई निजी गाड़ी तक नहीं रही है, हालांकि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार उनके पुत्र की संपत्ति उनके मुकाबले काफी अधिक है। शौक के मामले में उन्हें पढ़ने और सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करने का बेहद लगाव है। वे बिहार की कला, संस्कृति और इतिहास के प्रति भी गहरा अनुराग रखते हैं। केंद्र में रेल मंत्री और कृषि मंत्री के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ने के बाद, उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सड़कों, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो बदलाव किए, वे आज उनके राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि माने जाते हैं

​विकास पुरुष का महासफर: नीतीश कुमार की राजनीति के पांच दशक

​भारतीय राजनीति के फलक पर नीतीश कुमार एक ऐसा व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने न केवल बिहार की दिशा बदली, बल्कि गठबंधन की राजनीति के सिद्धांतों को भी नए सिरे से परिभाषित किया। एक इंजीनियर से 'सुशासन बाबू' बनने तक का उनका सफर संघर्ष, वैचारिक दृढ़ता और रणनीतिक कौशल की एक अनूठी दास्तां है।

​संघर्ष की नींव और जेपी आंदोलन (1971 - 1980)

​नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन का अंकुरण समाजवादी विचारधारा की खाद से हुआ।

  • समाजवाद का पदार्पण: वर्ष 1971 में वे डॉ. राम मनोहर लोहिया की वैचारिक विरासत 'समाजवादी युवा जनसभा' से जुड़े। यहीं से उनके भीतर सामाजिक न्याय की लौ प्रज्वलित हुई।
  • क्रांति की ज्वाला: 1974 का वर्ष उनके जीवन का निर्णायक मोड़ था, जब वे जयप्रकाश नारायण (जेपी) के नेतृत्व वाले 'संपूर्ण क्रांति' आंदोलन का हिस्सा बने। इस दौरान उन्होंने दमन सहा, मीसा (MISA) एक्ट के तहत बंदी बनाए गए और 1975 के आपातकाल के काले दौर में भी जेल की सलाखों के पीछे रहकर लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया।

​विधायी राजनीति और राष्ट्रीय पहचान (1985 - 1995)

​अस्सी के दशक ने उन्हें सड़क के संघर्ष से सदन की गरिमा तक पहुँचाया।

  • संसदीय यात्रा का प्रारंभ: 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य बनकर उन्होंने अपनी विधायी पारी शुरू की। जल्द ही उनके सांगठनिक कौशल को देखते हुए 1987 में उन्हें लोक दल (बिहार) का अध्यक्ष और 1989 में जनता दल का महासचिव नियुक्त किया गया।
  • केंद्र में पैठ: 1990 में राष्ट्रीय राजनीति में उनकी धमक तब सुनाई दी, जब वे केंद्रीय राज्य मंत्री (कृषि एवं सहकारिता) बने। यह उनके प्रशासनिक अनुभव की पहली बड़ी परीक्षा थी।

​समता पार्टी का उदय और दिल्ली की राजनीति (1995 - 2004)

​जब वैचारिक मतभेद बढ़े, तो नीतीश कुमार ने एक नई राह चुनी।

  • समता का संकल्प: 1995 में उन्होंने जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर 'समता पार्टी' की नींव रखी।
  • मंत्रिमंडल के स्तंभ: अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने भूतल परिवहन, कृषि और विशेषकर रेल मंत्री (2001) के रूप में अमिट छाप छोड़ी। उनके कार्यकाल में रेल सुरक्षा और तकनीक में व्यापक सुधार देखे गए।

​बिहार का सिंहासन और 'सुशासन' का दौर (2000 - 2015)

​नीतीश कुमार और बिहार का मुख्यमंत्री पद एक-दूसरे के पूरक बन गए।

  • अल्पकालिक शपथ और पूर्ण बहुमत: वर्ष 2000 में वे मात्र 8 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत के अभाव में त्यागपत्र देना पड़ा। हालांकि, 2005 में उन्होंने प्रचंड बहुमत के साथ वापसी की और 'जंगलराज' की छवि को मिटाकर 'सुशासन' की स्थापना की।
  • हैट्रिक का कीर्तिमान: 2010 में तीसरी बार सत्ता संभालते हुए उन्होंने महिला सशक्तिकरण और साइकिल योजना जैसे क्रांतिकारी कदम उठाए।

​गठबंधन की बिसात और निरंतरता (2015 - 2025)

​पिछले एक दशक में नीतीश कुमार की राजनीति गठबंधन बदलने और अपनी सत्ता को अक्षुण्ण रखने की कला के इर्द-गिर्द घूमती रही।

  • महागठबंधन से एनडीए तक: 2015 में धुर विरोधी आरजेडी के साथ मिलकर चुनाव जीता, लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते 2017 में पुन: भाजपा के साथ आए। 2020 में सातवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर उन्होंने साबित किया कि बिहार की राजनीति के केंद्र बिंदु वही हैं।
  • विरासत का सम्मान: 2022 का वर्ष भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा, जब उनके पिता और स्वतंत्रता सेनानी कविराज राम लखन सिंह की प्रतिमा का अनावरण हुआ। यह उनके पारिवारिक संस्कारों और राष्ट्रभक्ति के प्रति उनके जुड़ाव का प्रतीक था।
  • अजेय रथ: 2022 में आठवीं बार और फिर 2024 में राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए नौवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वर्तमान में, वर्ष 2025 में उन्होंने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल कर भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित कर दिया है।

नीतीश कुमार के शासनकाल की दो सबसे महत्वाकांक्षी और चर्चा में रहने वाली योजनाओं—जल-जीवन-हरियाली और शराबबंदी—का विस्तृत विवरण यहाँ प्रस्तुत है। आप इन्हें अपने लेख में शामिल कर सकते हैं:

​सुशासन के दो स्तंभ: सामाजिक सुधार और पर्यावरण संरक्षण

​नीतीश कुमार की राजनीति केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने सामाजिक चेतना और पर्यावरण संतुलन को भी अपने शासन का मुख्य केंद्र बनाया। इसके दो सबसे बड़े उदाहरण 'शराबबंदी' और 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान हैं।

​1. शराबबंदी: एक साहसिक सामाजिक क्रांति

​अप्रैल 2016 में नीतीश कुमार ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू कर एक ऐतिहासिक और साहसिक कदम उठाया। यह निर्णय केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक सुधार आंदोलन था।

  • महिला सशक्तिकरण का प्रतीक: इस मांग की शुरुआत ग्रामीण महिलाओं के बीच से हुई थी। शराबबंदी के बाद घरेलू हिंसा में भारी कमी आई और गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखा गया।
  • स्वास्थ्य और सुरक्षा: सड़क दुर्घटनाओं में कमी और लोगों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार इस योजना के सकारात्मक परिणाम रहे।
  • मौन क्रांति: आलोचकों के बावजूद, नीतीश कुमार इस फैसले पर अडिग रहे, जिससे समाज के निचले तबके, विशेषकर महिलाओं के बीच उनकी लोकप्रियता और मजबूत हुई।

​2. जल-जीवन-हरियाली: भविष्य की सुरक्षा का संकल्प

​जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती को समझते हुए, नीतीश कुमार ने 2019 में 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान की शुरुआत की। यह योजना पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाती है।

  • जल संचयन और पुनर्जीवन: इस अभियान के तहत पारंपरिक जल स्रोतों (आहार-पाइन, पोखर और कुओं) को अतिक्रमण मुक्त कर उन्हें पुनर्जीवित किया गया।
  • हरियाली मिशन: बिहार के हरित आवरण (Green Cover) को बढ़ाने के लिए करोड़ों की संख्या में वृक्षारोपण किया गया। आज बिहार के कई हिस्सों में इसके सकारात्मक प्रभाव दिखाई देते हैं।
  • सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन: सरकारी भवनों पर सौर पैनल लगाना और खेती के लिए बिजली की व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाना इस मिशन का अहम हिस्सा है।
  • वैश्विक सराहना: इस योजना की गूँज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दी और संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे मंचों पर भी बिहार के इस मॉडल की चर्चा हुई।

नीतीश कुमार: सुशासन और विकास के शिल्पकार

​नीतीश कुमार का शासनकाल बिहार के इतिहास में 'जंगलराज' से 'सुशासन' की ओर संक्रमण का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने न केवल कानून-व्यवस्था को सुधारा, बल्कि सामाजिक और बुनियादी ढांचे में भी क्रांतिकारी बदलाव किए।

1. कानून का शासन और प्रशासनिक सुधार

​जैसा कि आपने उल्लेख किया, 2005 में सत्ता संभालने के बाद उनकी सबसे बड़ी चुनौती 'अपराध मुक्त बिहार' बनाना था।

  • स्पीडी ट्रायल: उन्होंने अपराधियों में कानून का भय पैदा करने के लिए विशेष अदालतों के माध्यम से 'स्पीडी ट्रायल' की शुरुआत की, जिससे रिकॉर्ड समय में हजारों अपराधियों को सजा मिली।
  • भ्रष्टाचार पर प्रहार: SVU (विशेष सतर्कता इकाई) का गठन और भ्रष्टाचार के आरोपी लोक सेवकों की संपत्ति जब्त कर उनमें स्कूल खोलने जैसे कड़े प्रावधानों ने प्रशासन में पारदर्शिता लाने का काम किया।
  • पुलिस सुधार: कार्बन कॉपी सिस्टम जैसी तकनीक अपनाकर उन्होंने सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित की, जिससे युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा।

2. महिला सशक्तिकरण: एक मूक क्रांति

​नीतीश कुमार के कार्यकाल का सबसे उज्ज्वल पक्ष महिलाओं का उत्थान रहा है-- 

  • पंचायती राज में आरक्षण: बिहार भारत का पहला राज्य बना जिसने 2006 में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया।
  • साइकिल और पोशाक योजना: छात्राओं के लिए मुख्यमंत्री साइकिल योजना ने स्कूल छोड़ने की दर (Drop-out rate) को नाटकीय रूप से कम किया और बिहार की सड़कों पर बेटियों के आत्मविश्वास की एक नई तस्वीर पेश की।
  • शराबबंदी: महिलाओं की मांग पर 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू करना एक साहसी सामाजिक सुधार था, जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा को कम करना और गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारना था।

3. बुनियादी ढांचा और बिजली सुधार

​नीतीश कुमार ने 'सड़क, बिजली और पानी' को अपनी प्राथमिकता बनाया:

  • सड़क नेटवर्क: उन्होंने सुदूर गांवों को जिला मुख्यालयों से जोड़ने के लिए सड़कों और पुलों का जाल बिछाया।
  • बिजली की उपलब्धता: 2005 में बिहार में बिजली की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। उन्होंने न केवल बिजली उत्पादन और वितरण में सुधार किया, बल्कि हर गांव और हर घर तक बिजली पहुँचाने का लक्ष्य समय से पहले पूरा किया।

4. सामाजिक न्याय और EBC/महादलित राजनीति

​राजनीतिक रूप से नीतीश कुमार ने 'अति पिछड़ी जातियों' (EBC) और 'महादलितों' के लिए अलग श्रेणी बनाकर उन्हें मुख्यधारा में लाने का काम किया। इससे बिहार की राजनीति का लोकतांत्रिकरण हुआ और समाज के सबसे निचले तबके को सत्ता में भागीदारी मिली।

5. शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश

  • चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की स्थापना के साथ-साथ 'नालंदा विश्वविद्यालय' के पुनरुद्धार में उनकी अहम भूमिका रही।
  • ​स्वास्थ्य क्षेत्र में, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को सक्रिय किया और मुफ्त दवाओं के वितरण की योजना शुरू की, जिससे गरीब जनता को राहत मिली।

6. जल-जीवन-हरियाली और सात निश्चय

​नीतीश कुमार ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए 'सात निश्चय' योजना शुरू की, जिसमें हर घर नल का जल, पक्की गली-नालियां और युवाओं के लिए आर्थिक हल जैसे लक्ष्य शामिल हैं। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण के लिए 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है।

व्यक्तिगत जीवन और साहित्य

​उनकी पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा का निधन उनके लिए एक बड़ी व्यक्तिगत क्षति थी।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा के निधन से जुड़े कुछ प्रमुख तथ्य नीचे दिए गए हैं:

  • निधन की तिथि: उनका निधन 14 मई 2007 को हुआ था।
  • कारण: उन्हें गंभीर निमोनिया और श्वसन संबंधी समस्या (Respiratory failure) थी।
  • स्थान: उनका इलाज दिल्ली के मैक्स अस्पताल में चल रहा था, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली।
  • पेशा: वह पटना के कमला नेहरू सरकारी कन्या उच्च विद्यालय में एक शिक्षिका थीं।
  • सादा जीवन: मुख्यमंत्री की पत्नी होने के बावजूद वह बेहद सादगी से रहती थीं और अक्सर स्कूल जाने के लिए सार्वजनिक वाहन या पैदल यात्रा करती थीं।
  • अंतिम संस्कार: उनका अंतिम संस्कार पटना के गुलाबी घाट पर किया गया था। नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत के साथ उन्हें मुखाग्नि दी थी।

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नीतीश कुमार: प्रमुख सम्मान और उपलब्धियां 

  • वर्ष 2007: 'स्टेट ऑफ द नेशन' पोल (CNN-IBN और हिंदुस्तान टाइम्स) के माध्यम से उन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री के गौरव से नवाजा गया।
  • वर्ष 2008: राजनीति के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए CNN-IBN द्वारा 'ग्रेट इंडियन ऑफ द ईयर' पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • वर्ष 2009: बिहार में पोलियो उन्मूलन की दिशा में सफल प्रयासों के लिए रोटरी इंटरनेशनल ने उन्हें 'पोलियो इरेडिकेशन चैंपियनशिप अवार्ड' दिया।
  • वर्ष 2009: आर्थिक सुधारों को गति देने के कारण इकोनॉमिक टाइम्स ने उन्हें 'बिजनेस रिफॉर्मर ऑफ द ईयर' के रूप में सम्मानित किया।
  • वर्ष 2009 व 2010: लगातार दो वर्षों तक NDTV द्वारा उन्हें 'इंडियन पॉलिटिशियन ऑफ द ईयर' चुना गया।
  • वर्ष 2010: प्रतिष्ठित फोर्ब्स इंडिया ने उन्हें अपनी सूची में 'पर्सन ऑफ द ईयर' का स्थान दिया।
  • वर्ष 2010: जन-लोकप्रियता के आधार पर उन्हें 'MSN इंडियन ऑफ द ईयर' के खिताब से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 2011: औद्योगिक विकास और सामाजिक सद्भाव के लिए XLRI जमशेदपुर द्वारा 'सर जहांगीर घांदी मेडल' प्रदान किया गया।
  • वर्ष 2012: 'फॉरेन पॉलिसी' पत्रिका ने उन्हें दुनिया के 'टॉप 100 ग्लोबल थिंकर्स' की सूची में 77वें स्थान पर रखा।
  • वर्ष 2013: सार्वजनिक जीवन में सुशासन के लिए उन्हें 'जे.पी. मेमोरियल अवार्ड' और नागपुर का 'मानवमंदिर सम्मान' मिला।
  • वर्ष 2017: बिहार में पूर्ण नशामुक्ति और शराबबंदी लागू करने के साहसिक निर्णय के लिए उन्हें 'अनुव्रत पुष्कर सम्मान' से सम्मानित किया गया।

नवीनतम उपलब्धियां और सम्मान (2018 - 2025)

  • वर्ष 2018: ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुँचाने के संकल्प को पूरा करने पर उन्हें 'पावर ऑफ नेशन' सम्मान से संबंधित मंचों पर सराहा गया।
  • वर्ष 2020: जलवायु परिवर्तन के खिलाफ 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान शुरू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) के जलवायु गोलमेज सम्मेलन में उन्हें विशेष वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया।
  • वर्ष 2022: देश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने और रिकॉर्ड 9वीं बार शपथ लेने का गौरव प्राप्त किया।
  • वर्ष 2023-24: जाति आधारित गणना (Caste Survey) को सफलतापूर्वक संपन्न कराकर सामाजिक न्याय की दिशा में देश के लिए एक नया मॉडल पेश किया।
  • वर्ष 2024: केंद्र की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हुए देश के सशक्त गठबंधन निर्माता के रूप में उभरे।
  • वर्ष 2025: कृषि रोडमैप और महिला सशक्तिकरण (जीविका दीदी) के सफल क्रियान्वयन के लिए उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय विकास मंचों पर 'विकास पुरुष' के रूप में पुन: मान्यता मिली।

निष्कर्ष

नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन किसी एक दल, एक गठबंधन या एक कार्यकाल की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सतत संघर्ष और प्रयोग की गाथा है, जिसने बिहार की राजनीति को नए सिरे से परिभाषित किया। जेपी आंदोलन की कोख से जन्मा यह नेता सत्ता को साध्य नहीं, बल्कि साधन मानता रहा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई से निकला एक साधारण युवक जब सामाजिक न्याय, प्रशासनिक अनुशासन और सुशासन को अपना जीवन मंत्र बना ले, तो परिणाम केवल सरकारें नहीं, बल्कि समाज की दिशा बदलने के रूप में सामने आते हैं।

‘जंगलराज’ से ‘सुशासन’ तक की यात्रा आसान नहीं थी। अपराध, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अराजकता और सामाजिक अविश्वास—इन सबके बीच नीतीश कुमार ने धैर्य, दृढ़ता और निर्णय क्षमता के साथ बिहार को एक नई पहचान दी। सड़कों, शिक्षा और कानून-व्यवस्था में सुधार से लेकर महिलाओं को सार्वजनिक जीवन के केंद्र में लाने तक, उनका शासन मूक लेकिन गहरे असर वाली क्रांति का उदाहरण रहा है। साइकिल योजना हो या पंचायती राज में 50 प्रतिशत आरक्षण, शराबबंदी हो या जल-जीवन-हरियाली अभियान—इन सभी नीतियों के केंद्र में समाज का सबसे कमजोर वर्ग रहा है।

गठबंधन राजनीति को लेकर उन पर भले ही अवसरवाद के आरोप लगाए गए हों, लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि बदलते राजनीतिक हालात में सत्ता को स्थिर रखकर विकास की निरंतरता बनाए रखना आसान काम नहीं होता। नीतीश कुमार की सबसे बड़ी राजनीतिक विशेषता यही रही है कि वे विचारधारा और व्यवहार के बीच संतुलन साधते हुए बिहार को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बनाए रखने में सफल रहे।

आज जब वे कई बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं, तब नीतीश कुमार केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक दौर का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सादगी, ईमानदारी और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के सहारे भी भारतीय राजनीति में लंबे समय तक टिके रहकर बदलाव किया जा सकता है। इतिहास नीतीश कुमार को केवल सत्ता के आंकड़ों से नहीं, बल्कि बिहार को भय और पिछड़ेपन से निकालकर उम्मीद और सुशासन की राह पर लाने वाले नेता के रूप में याद रखेगा।

नीतीश कुमार: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. नीतीश कुमार का शुरुआती जीवन और शिक्षा क्या है?

​नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को बिहार के बख्तियारपुर में हुआ था। उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब NIT पटना) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की है। राजनीति में आने से पहले वे कुछ समय तक बिहार राज्य बिजली बोर्ड में कार्यरत थे।

2. नीतीश कुमार को 'सुशासन बाबू' क्यों कहा जाता है?

​2005 में जब नीतीश कुमार सत्ता में आए, तो उन्होंने बिहार की चरमराई कानून-व्यवस्था को सुधारने और बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली, शिक्षा) पर विशेष ध्यान दिया। उनके शासनकाल में राज्य की विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और न्याय के साथ विकास के उनके मॉडल के कारण उन्हें 'सुशासन बाबू' का नाम मिला।

3. वे कितनी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं?

​नीतीश कुमार ने अब तक रिकॉर्ड 9 बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। उन्होंने पहली बार मार्च 2000 में शपथ ली थी, हालांकि वह सरकार केवल सात दिनों तक चली थी।

4.नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बिहार किस जाति के हैं ?

उत्तर - कुर्मी जाति के

5.नीतीश कुमार के पुत्र का क्या नाम है?

उत्तर - निशांत कुमार

​6. नीतीश कुमार के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियां क्या हैं?

​उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

  • साइकिल योजना: स्कूली छात्राओं के लिए साइकिल वितरण, जिससे महिला शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आया।
  • शराबबंदी: 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू करना।
  • महिला आरक्षण: पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण देना।
  • हर घर नल का जल: बुनियादी सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुँचाना।

​7.नीतीश कुमार किस राजनीतिक दल से संबंधित हैं?

​वे जनता दल (यूनाइटेड) यानी JD(U) के सर्वमान्य नेता हैं। इससे पहले वे समता पार्टी का हिस्सा थे, जिसका बाद में जदयू में विलय हो गया।

​8.नीतीश कुमार की 'सात निश्चय' योजना क्या है?

​यह बिहार के विकास के लिए उनके द्वारा शुरू किया गया एक व्यापक एजेंडा है। इसमें युवाओं को कौशल विकास, महिलाओं को रोजगार, बिजली, स्वच्छ पानी, पक्की गलियाँ और शौचालयों का निर्माण जैसे सात मुख्य लक्ष्य शामिल हैं।

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