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TGT, PGT, UGC NET कला: प्रमुख समकालीन चित्रकार एवं मूर्तिकार (1950-2024)
- TGT, PGT, UGC NET कला: प्रमुख समकालीन चित्रकार एवं मूर्तिकार (1950-2024)
TGT, PGT aur UGC NET ki taiyari ke liye 1950से 1980 तक के और 1980 के बाद के प्रमुख चित्रकार, समकालीन कलाकार,मूर्तिकार , इंस्टॉलेशन आर्टिस्ट की जानकारी हिंदी में।
(भारतीय समकालीन कला के स्तंभ: सुबोध गुप्ता के बर्तन शिल्प, भारती खेर का बिंदी आर्ट और अनीश कपूर की आधुनिक मूर्तिकला का एक अद्भुत संगम।)Image Credit: AI-generated conceptual art representing Contemporary Indian Masterpieces
- शिल्पा गुप्ता (जन्म 1976): ये मुंबई की 'न्यू मीडिया' आर्टिस्ट हैं। इनका काम डिजिटल वीडियो और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन पर आधारित होता है। इनका "In Our Tongues" और "100 Hand-drawn Maps" बहुत प्रसिद्ध है। ये राष्ट्रीय सीमाओं और पहचान पर सवाल उठाती हैं।
- रियास कोमू (जन्म 1971): ये केरल के कलाकार और कोच्चि-मुज़िरिस बिनाले के सह-संस्थापक हैं। इनके चित्रों में राजनीति और सामाजिक संघर्ष दिखता है। इनका "Karachi Series" काफी चर्चित है। ये अक्सर फुटबॉल और सिनेमा को विषय बनाते हैं।
- जितीश कल्लाट (जन्म 1974): मुंबई में जन्मे जितीश पेंटिंग और स्कल्प्टर दोनों में निपुण हैं। इनकी कृति "Public Notice" (3 भाग) पर NET में सवाल आ चुके हैं। इनका काम शहरी जीवन और इतिहास को दर्शाता है।
- भारती खेर (जन्म 1969): इन्हें 'बिंदी आर्टिस्ट' कहा जाता है क्योंकि ये बिंदी का उपयोग करके बड़े इंस्टॉलेशन बनाती हैं। इनका सबसे प्रसिद्ध स्कल्प्टर "The Skin Speaks a Language Not Its Own" (एक मरा हुआ हाथी) है।
- सुबोध गुप्ता (जन्म 1964): इन्हें 'स्टील मैन' कहा जाता है। ये बिहार के हैं और स्टील के बर्तनों से बड़े इंस्टॉलेशन बनाते हैं। इनका कार्य "Very Hungry God" (बर्तनों से बना खोपड़ी) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विख्यात है।
- टी.वी. संतोष (जन्म 1968): ये 'नियोन-लिट' (Neon-lit) इफेक्ट वाली पेंटिंग्स के लिए जाने जाते हैं। इनके चित्र अक्सर युद्ध, आतंकवाद और मीडिया की खबरों पर आधारित होते हैं। इनका काम "Efflorescence" सीरीज के लिए जाना जाता है।
- ठुकराल और टागरा (जितिन ठुकराल और सुमीर टागरा): इनका काम 'पॉप आर्ट' और 'ब्रांडिंग' से जुड़ा है। ये खेती, वैश्वीकरण और पंजाबी डायस्पोरा के विषयों पर रंगीन और आधुनिक चित्र बनाते हैं।
- रीना सैनी कल्लाट (जन्म 1973): इनका काम रबर स्टैम्प और कंटीले तारों (Barbed wire) के प्रयोग के लिए जाना जाता है। ये भौगोलिक सीमाओं और विभाजन के दर्द को दिखाती हैं। "Hyphenated Lives" इनकी प्रमुख सीरीज है।
- चिंतन उपाध्याय (जन्म 1972): राजस्थान के ये कलाकार अपने "Gauri Baby" सीरीज के लिए जाने जाते हैं। इनके चित्रों में बच्चों की आकृतियों पर बारीक चित्रकारी होती है, जो उपभोक्तावाद पर चोट करती है।
- रकीब शॉ (जन्म 1974): कलकत्ता में जन्मे ये आर्टिस्ट लंदन में रहते हैं। इनका काम अत्यधिक बारीक और 'ज्वेल्ड' (Jewelled) होता है। इनकी पेंटिंग "Garden of Earthly Delights" बहुत महंगी बिकी है।
- एन.एस. हर्षा (जन्म 1969): मैसूर के ये आर्टिस्ट अपनी बड़ी पेंटिंग्स के लिए जाने जाते हैं जिसमें हजारों छोटे मानव फिगर होते हैं। इनका काम "Cosmos" और "Sky Gazers" भारतीय दर्शन का संगम है।
- मिथु सेन (जन्म 1971): ये दिल्ली की कॉन्सेप्चुअल आर्टिस्ट हैं। इनका काम शरीर की बनावट (Anatomy) और कामुकता पर आधारित होता है। इन्हें 2010 में पहला 'स्कोडा आर्ट प्राइज' मिला था।
- जगन्नाथ पांडा (जन्म 1970): ओडिशा के ये आर्टिस्ट शहरी और प्रकृति के बीच के संघर्ष को दिखाते हैं। इनके चित्रों में अक्सर कौआ और अन्य जानवर दिखते हैं। ये वस्त्र और कागज का भी प्रयोग करते हैं।
- मंजूनाथ कामथ (जन्म 1972): कर्नाटक के ये आर्टिस्ट अतियथार्थवाद (Surrealism) और टेराकोटा के लिए जाने जाते हैं। इनके चित्र इतिहास और वर्तमान की एक मिश्रित कहानी सुनाते हैं।
- सुदर्शन शेट्टी (जन्म 1961): ये मैकेनिकल और मूविंग इंस्टॉलेशन के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्हें 2016 के कोच्चि-मुज़िरिस बिनाले का क्यूरेटर बनाया गया था। इनका काम "Flying Bus" काफी चर्चित रहा है।
- जी.आर. इरिन्ना (जन्म 1970): इनका काम अक्सर ध्यान और हिंसा के बीच के विरोध को दिखाता है। ये राख और कपड़ों का उपयोग करते हैं। इनका चित्र "Buddhist Monks" काफी प्रभावशाली है।
- बोस कृष्णमाचारी (जन्म 1963): ये एक कलाकार और क्यूरेटर दोनों हैं। इनका एब्सट्रैक्ट आर्ट और जीवंत रंगों का प्रयोग इनकी पहचान है। कोच्चि बिनाले को शुरू करने में इनका बड़ा हाथ है।
- तल्लूर एल.एन. (जन्म 1971): ये पुरानी मूर्तियों को आधुनिक मशीनों के साथ जोड़कर अनोखे स्कल्प्टर बनाते हैं। इनका काम औद्योगिकीकरण पर व्यंग्य करता है।
- सुरेंद्रन नायर (जन्म 1956): इनकी पेंटिंग्स को 'Cuckoonebulopolis' कहा जाता है। ये पौराणिक कथाओं और थिएटर के तत्वों को आधुनिक ढंग से पेश करते हैं।
- अंजोली इला मेनन (जन्म 1940): इनकी 'विंडो सीरीज' और चेहरे की चमक (Glow) आज भी परीक्षाओं का पसंदीदा विषय है। ये म्यूरलिस्ट के रूप में भी जानी जाती हैं।
- हेमा उपाध्याय (1972-2015): इनका काम मुंबई की झुग्गियों और प्रवास पर आधारित था। ये छोटे घरों के मॉडल और फोटोग्राफिक वर्क्स बनाती थीं।
- प्रणीत सोई (जन्म 1971): ये मिनिएचर आर्ट और आधुनिक विषयों का मिश्रण करते हैं। इनका काम कश्मीर और अन्य संघर्षशील इलाकों की घटनाओं पर आधारित होता है।
- अपर्णा कौर (जन्म 1954): इनके चित्रों में सिख धर्म, मातृत्व और समय (Waqt) मुख्य विषय होते हैं। इनकी "धरती" और "सोहनी-महिवाल" सीरीज बहुत प्रसिद्ध हैं।
- गुलाम मोहम्मद शेख (जन्म 1937): ये चित्रकार और कवि दोनों हैं। इनका काम "City for Sale" सांप्रदायिकता पर एक कड़वा सच बयान करता है।
- सोमनाथ होरे (1921-2006): इनके 'Wounds' (जख्म) सीरीज के छापा-चित्र और ब्रोंज स्कल्प्टर परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। ये बंगाल के अकाल से बहुत प्रभावित थे।
- अनीश कपूर (जन्म 1954): ये अंतरराष्ट्रीय स्तर के मूर्तिकार हैं, जो 'स्टेनलेस स्टील' और परावर्तक सतहों (Reflective surfaces) के लिए प्रसिद्ध हैं। शिकागो का "Cloud Gate" और "Sky Mirror" इनकी महान कृतियाँ हैं। इनका काम शून्यता और अंतरिक्ष की अवधारणा पर आधारित होता है।
- नलनी मलिनी (जन्म 1946): ये भारत में 'वीडियो आर्ट' की अग्रदूत मानी जाती हैं। इनका काम विभाजन, विस्थापन और स्त्रीवाद पर केंद्रित है। इनके 'Shadow Plays' (छाया नाटक) और "Game Pieces" जैसे इंस्टॉलेशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए हैं।
- विवान सुंदरम (1945-2023): ये एक बहुआयामी कलाकार थे जिन्होंने 'फाउंड ऑब्जेक्ट्स' और कचरे से कलाकृतियाँ बनाईं। इनका इंस्टॉलेशन "Memorial" और "Trash" सीरीज बहुत प्रसिद्ध है। ये 'कसाउली आर्ट सेंटर' के संस्थापक भी थे।
- सुबोध केरकर (जन्म 1959): गोवा के ये कलाकार 'लैंड आर्ट' और इंस्टॉलेशन के लिए जाने जाते हैं। ये अक्सर समुद्र तटों पर विशाल कलाकृतियाँ बनाते हैं। "The Carpet" और "Ocean's Song" इनकी प्रकृति से जुड़ी प्रमुख कृतियाँ हैं।
- अतुल डोडिया (जन्म 1959): ये अपनी 'शटर पेंटिंग्स' के लिए प्रसिद्ध हैं। इनके चित्रों में अक्सर गांधी जी और मुंबई का शहरी जीवन दिखाई देता है। इनका काम भारतीय कला इतिहास और वैश्विक सिनेमा का अद्भुत मिश्रण है।
- पुष्पमाला एन. (जन्म 1956): ये एक 'फोटो-परफॉरमेंस' आर्टिस्ट हैं। ये खुद को विभिन्न ऐतिहासिक और पौराणिक पात्रों के रूप में चित्रित कर समाज में महिलाओं की स्थिति और रूढ़ियों पर सवाल उठाती हैं।
- सुदर्शन धीर (1934-2017): इन्हें भारत में 'ग्राफिक डिजाइन' का पितामह कहा जाता है। इन्होंने हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP), किसन और ICICI जैसे कई बड़े ब्रांड्स के लोगो (Logo) डिजाइन किए, जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
- ध्रुव मिस्त्री (जन्म 1957): ये एक प्रसिद्ध मूर्तिकार हैं। इनके काम में मानव आकृति और जानवरों का समावेश होता है। "Guardian" और "Floating Figure" इनके प्रमुख स्कल्प्टर हैं। ये वडोदरा के संकाय प्रमुख भी रहे हैं।
- लतिका कट्ट (जन्म 1948): ये अपनी मिट्टी और पत्थर की मूर्तियों के लिए विख्यात हैं। इनके काम में बनारस के घाटों और प्रकृति का गहरा प्रभाव दिखता है। इन्हें 'मूर्तिकला की जादूगरनी' कहा जाता है।
- मृणालिनी मुखर्जी (1949-2015): ये जूट और डोरी (Hemp) से बुनी हुई विशालकाय मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं। इनकी आकृतियाँ अक्सर कामुक और वनस्पति जैसी दिखती हैं। "Vanshree" इनकी एक कालजयी कृति है।
- के.एस. राधाकृष्णन (जन्म 1956): इनके स्कल्प्टर में 'मुसूइ' और 'मैया' नामक दो काल्पनिक पात्र हमेशा नजर आते हैं। ये कांस्य (Bronze) में लंबी और लचीली आकृतियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं।
- एन. पुश्पमाला (जन्म 1956): ये मूर्तिकला से शुरुआत कर फोटोग्राफी और वीडियो आर्ट की ओर मुड़ीं। इनका कार्य 'इंडियन लेडी' सीरीज और व्यंग्यात्मक चित्रण के लिए जाना जाता है।
- यूसुफ (जन्म 1952): ग्वालियर के ये कलाकार अपनी 'एब्सट्रैक्ट' (अमूर्त) रेखाओं और ग्राफिक्स के लिए जाने जाते हैं। भारत भवन, भोपाल से इनका गहरा जुड़ाव रहा है। इनके चित्रों में न्यूनतम रेखाओं का जादू होता है।
- जयश्री चक्रवर्ती (जन्म 1956): ये अपनी विशाल पेपर-रोल पेंटिंग्स के लिए प्रसिद्ध हैं। ये कागज, पत्तों और गोंद का प्रयोग कर 'पर्यावरण और शहरीकरण' के बीच के संबंध को दिखाती हैं।
- वासुदेव अक्कीथम (जन्म 1958): वडोदरा स्थित ये कलाकार अपनी कथात्मक (Narrative) पेंटिंग्स के लिए जाने जाते हैं। इनके चित्रों में अक्सर मिथक और रोजमर्रा की जिंदगी का संगम होता है।
- शकीला (1969-2022): ये एक 'कोलाज' कलाकार थीं। बिना किसी औपचारिक शिक्षा के, इन्होंने अखबार के टुकड़ों से अद्भुत कलाकृतियाँ बनाईं। इनके काम में ग्रामीण जीवन और सूफीवाद झलकता है।
- ज्योति भट्ट (जन्म 1934): ये चित्रकार, छापाकार (Printmaker) और फोटोग्राफर हैं। इन्होंने सौराष्ट्र के ग्रामीण जीवन और लोक कलाओं का प्रलेखन (Documentation) किया है। इनका 'Self Portrait' बहुत प्रसिद्ध है।
- के. लक्ष्मण गौड़ (जन्म 1940): ये नक्काशी (Etching) और रेखाचित्रों के माहिर हैं। इनके चित्रों में ग्रामीण तेलंगाना का जीवन, कामुकता और लोक तत्वों का प्रबल प्रभाव रहता है।
- अनुपम सूद (जन्म 1944): ये भारत की बेहतरीन 'ग्राफिक कलाकार' हैं। इनका काम मानव संबंधों और सामाजिक विद्रूपताओं को डार्क टोन में दिखाता है। "Dialogue" इनकी प्रसिद्ध सीरीज है।
- नंदलाल ठाकुर (जन्म 1970): ये समकालीन दृश्य कला और डिजिटल माध्यमों के प्रयोग के लिए जाने जाते हैं। इनके कार्यों में अक्सर उत्तर-आधुनिक समाज की जटिलताओं को दिखाया जाता है।
- रवींद्र रेड्डी (जन्म 1956): ये टेराकोटा और फाइबर ग्लास से विशाल 'महिला सिर' (Head) बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं। इन मूर्तियों पर चमकीले रंग और सोने का वर्क इनकी पहचान है।
- एन.एन. रिमजोन (जन्म 1957): ये केरल के मूर्तिकार हैं। इनका काम "The Inner Voice" बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें एक ध्यानमग्न आकृति और चारों ओर औजार दिखाए गए हैं।
- पवित्र मोहन (जन्म 1972): ये अपनी समकालीन कला में पारंपरिक ओडिया तत्वों का प्रयोग करते हैं। इनके इंस्टॉलेशन अक्सर सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर चोट करते हैं।
- वीर मुंशी (जन्म 1955): कश्मीर से संबंध रखने वाले इस कलाकार का पूरा काम विस्थापन, दर्द और घाटी की त्रासदी पर आधारित है। इनकी कला में 'घर' एक प्रमुख प्रतीक होता है।
- सुब्रत गांगुली (जन्म 1959): ये 'रियलिस्टिक' और 'अकादमिक' चित्रण के लिए जाने जाते हैं। कोलकाता के इस कलाकार की पेंटिंग्स में प्रकाश और छाया का ही
महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर (Important Q&A for Fine Arts Exams)
प्रश्न 1: भारतीय कला में 'स्टील मैन ऑफ इंडिया' के नाम से किसे जाना जाता है?
- उत्तर: सुबोध गुप्ता को। वे स्टील के बर्तनों से विशाल इंस्टॉलेशन बनाने के लिए प्रसिद्ध हैं।
प्रश्न 2: प्रसिद्ध मूर्तिकला 'The Skin Speaks a Language Not Its Own' (एक मरा हुआ हाथी) किस कलाकार की कृति है?
- उत्तर: भारती खेर की। उन्होंने इसे हजारों बिंदियों का उपयोग करके बनाया है।
प्रश्न 3: 'Cloud Gate' और 'Sky Mirror' जैसी प्रसिद्ध सार्वजनिक मूर्तियों के निर्माता कौन हैं?
- उत्तर: अनीश कपूर। ये अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध भारतीय मूल के मूर्तिकार हैं।
प्रश्न 4: 'Public Notice' (तीन भागों में) प्रसिद्ध कृति किस समकालीन कलाकार की है?
- उत्तर: जितीश कल्लाट की। यह कृति अक्सर UGC NET की परीक्षाओं में पूछी जाती है।
प्रश्न 5: भारत में 'वीडियो आर्ट' और 'न्यू मीडिया' की शुरुआत करने वाली प्रमुख महिला कलाकार कौन हैं?
- उत्तर: नलनी मलिनी। वे अपने 'शैडो प्ले' (Shadow Play) के लिए भी जानी जाती हैं।
प्रश्न 6: 'Wounds' (जख्म) सीरीज के छापा-चित्रों के लिए कौन प्रसिद्ध है?
- उत्तर: सोमनाथ होरे। इन्होंने बंगाल के अकाल के दर्द को अपनी कला में उतारा है।
प्रश्न 7: किस कलाकार को 'मूर्तिकला की जादूगरनी' कहा जाता है?
- उत्तर: लतिका कट्ट को। वे बनारस की मिट्टी और प्रकृति से प्रभावित मूर्तियां बनाती हैं।
प्रश्न 8: 'मुसूइ' और 'मैया' नामक पात्रों का प्रयोग अपने शिल्पों में कौन करता है?
- उत्तर: के.एस. राधाकृष्णन। वे लंबी और लचीली कांस्य (Bronze) मूर्तियों के लिए मशहूर हैं।
प्रश्न 9: 'शटर पेंटिंग्स' के लिए प्रसिद्ध कलाकार कौन है?
- उत्तर: अतुल डोडिया। उनके चित्रों में अक्सर महात्मा गांधी के संदर्भ मिलते हैं।
प्रश्न 10: भारत में 'ग्राफिक डिजाइन' का जनक या पितामह किसे माना जाता है?
- उत्तर: सुदर्शन धीर को। उन्होंने HP और ICICI जैसे प्रसिद्ध लोगो (Logo) डिजाइन किए हैं।
चूंकि आप UGC NET और TGT/PGT के लिए यह आर्टिकल लिख रहे हैं, तो अपने ब्लॉग के अंत में यह जरूर लिखें:
"यह जानकारी कला के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से भारती खेर की बिंदी आर्ट और सुबोध गुप्ता के इंस्टॉलेशन से जुड़े प्रश्न अक्सर नेट (NET) परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।"
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परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए ऊपर दिए गए 50 कलाकारों की सूची को PDF में प्राप्त करें।
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