योगी आदित्यनाथ की जीवनी: संन्यास से सत्ता तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का सफर
योगी आदित्यनाथ की जीवनी: संन्यास से सत्ता तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का सफर।Yogi Aditynath Biography
योगी आदित्यनाथ को आज पूरा भारत जानता है क्योंकि उन्होंने उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री पद में रहते हुए सुशासन का ऐसा मॉडल दिया है जिसकी प्रशंसा उत्तरप्रदेश के निवासी तो करते ही है पूरे भारत के हर स्टेट में गुंडा गर्दी और माफिया राज में में नकेल कसने के लिए योगी मॉडल की जरूरत बताई जा रही है ,आज उत्तर प्रदेश में गुंडा माफिया या तो सरेंडर कर चुके हैं या दूसरे प्रदेश में जाकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे, क्या मजाल कि वह दुबारा उत्तरप्रदेश की तरफ रुख करें,आज उत्तर प्रदेश में महिलाएं बेटियां निश्चिंत होकर मार्केट में खरीददारी करती है, महिलाएं जॉब कर रहीं है, लड़कियां शाम होने तक कोचिंग ट्यूशन पढ़ती हैं पर उनको गुंडों लफंगों का डर नहीं सताता।
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| योगी आदित्यनाथ |
सात भाइयों बहनों के पांचवें नंबर के ये भैया उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में 5 जून 1972 में फॉरेस्ट रेजर आनंद सिंह बिष्ट के यहां जन्में थे वह भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रांड नेता माने जाते हैं, उन्होंने सत्ता संभालते ही हिंदू धर्म के सनातन संस्कृति की रक्षा का बीड़ा उठाया, यद्यपि वह सर्वधर्म समभाव के हिसाब से सत्ता संचालित करते है कोई भेदभाव अन्य धर्मावलंबियों को नहीं चाहे किसी भी जाती धर्म की माता बहन बेटी हो यदि कोई गुंडा उन बहनों के साथ छेड़खानी या दुष्कर्म करने की कोशिश करता है योगी जी की पुलिस 24 घंटे में अपराधी को गिरफ्त में ले लेती है उस माफिया के अवैध कार्यों अतिक्रमण किए हुए घरों में बुलडोजर चलता है उसकी सारी संपत्ति ज़ब्त कर ली जाती है जो इन कार्यों को गिरोह बनाकर अंजाम देता है, या दंगा करता है , यदि कोई बड़ा दंगा करता है तो दंगाइयों के पोस्टर हर चौराहा पर लगाकर कार्यवाही होती है ,इस एक्शन की विशेषता के कारण उनके प्रशंसकों उन्हें "बुलडोजर बाबा" के नाम से पुकारते हैं।
शिक्षा दीक्षा ::
योगी आदित्यनाथ प्रारंभ से पढ़ने लिखने में होशियार थे। योगी आदित्यनाथ ने पहली कक्षा से कक्षा 10 तक की पढ़ाई शिक्षा टिहरी के गजा जूनियर स्कूल से की। इनका ' हाईस्कूल' ( क्लास 10th) 1987 में हुआ, सन् 1989 में ऋषिकेश के भारत माता मंदिर में ' इंटरमीडिएट' की परीक्षा पास की। सन् 1990 में जब वह ' स्नातक' कर रहे थे तो उन्होंने अखिल भारतीय। विद्यार्थी परिषद् की सदस्यता ली।
उन्होंने श्रीनगर के हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में फिजिक्स कैमिस्ट्री मैथ विषय से बी. एस.सी. में एडमिशन लिया और तीन वर्ष तक गहन अध्ययन किया वह एक बार छात्र संघ का चुनाव भी लड़े परंतु वह जीत नहीं पाए , 1992में BSc पूरा होने के बाद वह Msc फिजिक्स में एडमिशन लेकर पोस्टग्रेजुएट शिक्षा हासिल करने की तरफ बढ़ रहे थे ऋषिकेश में MSc (Math) के लिए फॉर्म भी भर दिया था परंतु इसी बीच जब भारत में राम मंदिर आंदोलन चरम पर था तो वह कट्टर सनातनी होने के कारण इस आंदोलन में कूद पड़े, एक दिन अचानक वह माता पिता को यह बताकर कि वह गोरखपुर एग्जाम देने जा रहे यह कहकर वह महंत अवैद्यनाथ के दर्शन के लिए गोरखपुर के गोरक्षपीठ में आ गए और वहां पर उन्होंने मात्र बाइस साल की उम्र में सन् 15 फरवरी 1994 में नाथपंथ संन्यास ग्रहण कर लिया, तब उनकी उम्र मात्र 22 वर्ष की थी इस दौरान उनका कर्णछेदन हुआ बाल मुंडवाए गए और संन्यासी होने के अन्य संस्कार किए गए और अजय सिंह बिष्ट से बदलकर योगी आदित्यनाथ बन गए।
योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवैद्यनाथ(1919- 2014)गोरक्षपीठ के मुख्य महंत और आध्यात्मिक संत थे साथ में वह गोरखपुर से लोकसभा सदस्य भी थे। वह गोरखपुर से 1970,1989,1991,1996 से लगातार सांसद निर्वाचित हुए। वह अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे थे उन्हें रामजन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति का अध्यक्ष बनाया गया उन्होंने अपने जीवन कल में गोरखपुर में छुआछूत के खिलाफ़ अभियान चलाया गोरखपुर में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई संस्थान की स्थापनाएं कर गोरखपुर के विकास में योगदान दिया।गोरखपुर के महंत अवैद्यनाथ जी की मृत्यु 12 सितंबर 2014 को हुई थी।उनका निधन 93 वर्ष की आयु में गोरखपुर में ही हुआ था। वे लंबे समय से बीमार थे और कुछ समय तक गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती रहने के बाद उन्हें वापस गोरखपुर लाया गया था, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली।
योगी आदित्यनाथ सांसद काल के समय हमले::
आजमगढ़ में योगी जी के काफ़िले पर हमला(2008)
7 सितंबर 2008 को आजमगढ़ के तक्किया क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ के काफिले पर जानलेवा हमला हुआ था। यह घटना तब हुई जब वे हिंदू युवा वाहिनी की 'आतंकवाद विरोधी रैली' को संबोधित करने जा रहे थे।
उनका काफिला जब तकिया इलाके से गुजर रहा था तब पत्थरों और पेट्रोल बम से उनपर हमला किया गया सैकड़ों की भीड़ ने योगी जी के काफिले चारों ओर से घेर लिया और पथराव करने लगे और गोलियां चलाई, हमला इतना भयानक था कि उनकी मुख्य गाड़ी SUV को निशाना बनाया गया यद्यपि इस हमले में योगी जी सुरक्षित बाहर निकल आए परंतु दुर्भाग्य से इस हमले में योगी जी के एक समर्थक अजित राय के गोली लगने से अस्पताल ले जाते समय मृत्यु हो गई। योगी जी के सुरक्षा कर्मी भी गंभीर रूप से घायल हुए।
गोरखपुर दंगा जनवरी (2007)
कारण: मुहर्रम के दौरान दौरान गोरखपुर के खोवा मंडी में एक हिंदू युवक का मुस्लिम समुदाय के बीच विवाद हुआ जिसमें हिंदू युवक की मृत्यु हो गई। तत्कालीन गोरखपुर के संसद योगी आदित्यनाथ दिल्ली से गोरखपुर पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे । योगी जी ने गोली लगने के बाद श्रंद्धाजलि सभा करने लगे और पीड़ित परिवार से मिलने की जिद ठानी चूंकि पूरे गोरखपुर शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था इसलिए उन्हें अनुमित नहीं मिली ,परंतु योगी जी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। इस दौरान योगी जी ने उग्र भाषण दिया और हत्यारों को चेतावनी दी। योगी जी को गिरफ्तार कर लिया गया भड़काऊ भाषण देने के आरोप में।
योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी की ख़बर आग की तरह गोरखपुर और आसपास के जिलों तक पहुंच गई , प्रशासन की पक्षपात पूर्ण कार्यवाही से लोग गुस्से में थे, उस समय समाजवादी पार्टी की सरकार उत्तरप्रदेश में थी और मुलायमसिंह चीफ मिनिस्टर थे ये माना जा रहा था ये घटना सपा के गुंडों ने जानबूझकर की और मुलायम सिंह उन मुस्लिम दंगाइयों का सपोर्ट कर रहे थे ।इस हिंसा की प्रतिक्रिया में गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में भारी तनाव फैल गया था। प्रदर्शनकारियों ने गोदान एक्सप्रेस (11056) के डिब्बों में आग लगा दी थी। उग्र भीड़ ने ट्रेन को निशाना बनाकर सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया था, जिसके कारण रेलवे प्रशासन को कई ट्रेनें रद्द करनी पड़ी थीं। इस मामले में प्रशासन ने उपद्रवियों के ऊपर आईपीसी की धारा 147,148,149, 506,307,302 में एफ.आई .आर .दर्ज हुई, कई दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया । योगी आदित्यनाथ इस समय पीछे नहीं हटे हिंदुवादी नेता के रूप में उभरे। इसी तरह जीवन की कई घटनाओं ने उन्हें हिंदूवादी नेता के रूप में प्रस्तुत किया।
योगी आदित्यनाथ: संघर्ष, संकल्प और गौरक्षा का पर्याय
गोरखपुर के गोरक्षपीठ से निकलकर उत्तर प्रदेश की सत्ता के शिखर तक पहुँचने वाले योगी आदित्यनाथ का सफर केवल राजनीति का नहीं, बल्कि कट्टर विचारधारा और अटूट संकल्प का रहा है। उनके जीवन की कई ऐसी घटनाएँ हैं जिन्होंने उन्हें एक प्रखर हिंदूवादी नेता के रूप में स्थापित किया।प्रेस की आगजनी जैसी घटनाओं ने उस समय के ध्रुवीकरण को और स्पष्ट कर दिया।
गौरक्षा: मात्र आस्था नहीं, एक अभियान
हिंदू संस्कृति में गाय को 'माता' माना गया है, लेकिन योगी जी के लिए गौरक्षा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक सामाजिक और वैज्ञानिक मिशन भी है। वे अक्सर गाय के पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र, गोबर) के महत्व पर जोर देते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 'अवैध बूचड़खानों' पर जिस तरह से नकेल कसी, वह उनके इसी संकल्प का हिस्सा था। आज उत्तर प्रदेश में निराश्रित गौवंश के लिए गौशालाओं का निर्माण और 'नंद बाबा मिशन' जैसे प्रयास इसी सेवा भाव को दर्शाते हैं।
धर्मांतरण और 'लव जिहाद' के विरुद्ध कड़े कदम
योगी आदित्यनाथ जबरन धर्मांतरण और 'लव जिहाद' जैसे मुद्दों पर हमेशा से मुखर रहे हैं। उनका मानना है कि छल-कपट से होने वाला धर्म परिवर्तन समाज की जनसांख्यिकी और सुरक्षा के लिए खतरा है। इसी विचारधारा को अमली जामा पहनाते हुए उन्होंने 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम' लागू किया। यह कानून न केवल जबरन धर्म परिवर्तन को रोकता है, बल्कि दोषी पाए जाने पर कठोर कारावास का प्रावधान भी करता है। एटा जिले में सन् 2005 में उन्होंने 1500 ईसाई बन चुके हिंदुओं की घर वापसी करवाओ थी।
योगी आदित्यनाथ का व्यक्तित्व उनके द्वारा स्थापित 'हिंदू युवा वाहिनी' से लेकर 'सत्ता के सिंहासन' तक एक समान रहा है। चाहे वह गौ-सेवा के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना हो या सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कड़े कानून बनाना, उनके हर निर्णय में एक स्पष्टता झलकती है।
योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक उत्थान::
उनके निधन के बाद योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के महंत पीठाधीश्वर की पदवी हासिल की। गोरखपुर से 1988 में योगी जी ने लोकसभा सदस्यता मात्र 26 साल की उम्र में गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र में जीत हासिल करके प्राप्त की। योगी जी उस समय की बारहवीं लोकसभा (1998- 1999) सबसे युवा सांसद थे।
2002 में योगी आदित्यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया,वह लगातार वर्ष 2004,2009,2014,2017 को लोकसभा सदस्य बने अपनी प्रतिद्वंदी को बड़े मार्जिन से हराया। 19 मार्च 2017 को उनको भाजपा के विधायक दल का नेता चुना गया, और उन्हें उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान सौंप दी गई,यद्यपि योगी जी के चीफ़ मिनिस्टर बनने से पहले कई अन्य नाम जो संभावित थे उनमें केशव प्रसाद मौर्य ,सुरेश खन्ना,और मनोज सिन्हा का नाम आगे आया था परंतु योगी जी ने सभी से आगे बढ़त बना ली थे।क्योंकि उनके सांसद कार्य में ऐसे कार्य हुए थे जिसके कारण वह हिंदुत्व रक्षक ,हिंदू धर्म उद्धारक नेता की छवि बना चुके थे।योगी जी ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बनते ही प्रारंभ में ही सभी पुलिस अधिकारियों को बैठाकर सख्त आदेश दिया कि किसी भी कॉलेज स्कूल के बाहर छेड़खानी करने वाले को तुरंत गिरफ्तार किया जाए उन्होंने रोमियो स्क्वॉड का गठन किया । उन्होंने अवैध बूचड़ खानों को प्रतिबंधित किया ,मांस की दुकानों को पब्लिक प्लेस से हटाया , पूरे प्रदेश में टूटी खस्ताहाल सड़कों को ठीक करने का निर्देश दिया।
योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल की बातें:
योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल (2017-2022) के कुछ महत्वपूर्ण कार्यों का विवरण इस प्रकार है
एंटी-रोमियो स्क्वाड का गठन
महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पदभार संभालते ही इस दस्ते का गठन किया। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं से होने वाली छेड़छाड़ को रोकना और सुरक्षा का माहौल बनाना था।
किसानों की कर्ज माफी
अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने सीमांत और लघु किसानों का ₹36,000 करोड़ का कर्ज माफ किया। इस ऐतिहासिक कदम से प्रदेश के लगभग 86 लाख किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुँचा और राहत मिली।
अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध
पर्यावरण और पशु संरक्षण के दृष्टिगत शासन ने पूरे प्रदेश में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों को बंद करने का सख्त निर्देश दिया। इससे कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ और मानक विहीन कार्यों पर रोक लगी।
सड़क और बुनियादी ढांचा (एक्सप्रेसवे)
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम शुरू हुआ। बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से प्रदेश के पिछड़े क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और निवेश लाने का प्रयास किया गया।
कुंभ मेला 2019 का भव्य आयोजन
प्रयागराज कुंभ को 'दिव्य कुंभ, भव्य कुंभ' के रूप में आयोजित कर वैश्विक पहचान दिलाई गई। स्वच्छता, सुरक्षा और आधुनिक प्रबंधन के मामले में इस आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए मानक स्थापित किए।
मिशन शक्ति अभियान
नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए यह विशेष अभियान चलाया गया। इसके तहत थानों में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना हुई और सरकारी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले चीफ मिनिस्टर रहते हुए कठोर निर्णय लिए उन्होंने माफिया गुंडों पर लगाम लगाने के लिए सुनियोजित निर्णय लिए हर शहर कस्बे के हिस्ट्रीशीटर की लिस्ट बनावा कर त्वरित कार्यवाही का आदेश दिया।
योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल (2017-2022) ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और शासन व्यवस्था में एक युगांतकारी परिवर्तन किया। उनके कार्यों ने न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था को सुधारा, बल्कि विकास के नए मानक भी स्थापित किए, जिससे जनता के बीच उनकी छवि एक सशक्त और निर्णायक नेता के रूप में उभरी।
कानून-व्यवस्था और 'जीरो टॉलरेंस' नीति
योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि कानून-व्यवस्था में सुधार रही। "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए संगठित अपराध और माफिया राज पर कड़ा प्रहार किया गया। अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा करने के लिए पुलिस को खुली छूट दी गई और अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई ने उन्हें "बुलडोजर बाबा" के रूप में लोकप्रिय बना दिया। इससे आम नागरिक, विशेषकर महिलाएं, खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करने लगीं।
इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की रफ्तार
विकास के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई:
- एक्सप्रेसवे का जाल: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स ने कनेक्टिविटी को सुधारा।
- औद्योगिक निवेश: 'डिजीटल इंडिया' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के तहत भारी निवेश आकर्षित किया गया।
- बिजली सुधार: जिला मुख्यालयों को 24 घंटे और गांवों को 18 घंटे बिजली देने का वादा पूरा किया गया।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और लोक कल्याण
योगी जी ने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को विकास के साथ जोड़ा। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू होना, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का कायाकल्प और प्रयागराज कुंभ का भव्य आयोजन उनकी सांस्कृतिक दूरदर्शिता के प्रतीक बने। इसके साथ ही, सरकारी योजनाओं (जैसे उज्ज्वला, पीएम आवास और मुफ्त राशन) का पारदर्शी वितरण सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाया गया, जिसने गरीब तबके के बीच उनकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया।
योगी आदित्यनाथ का पहला कार्यकाल अनुशासन, विकास और सांस्कृतिक गौरव का संगम रहा। भ्रष्टाचार पर लगाम और कड़े फैसलों ने जनता को यह विश्वास दिलाया कि राज्य अब सही हाथों में है। यही कारण था कि दशकों बाद उत्तर प्रदेश में किसी मुख्यमंत्री ने पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में वापसी कर एक नया इतिहास रचा।
कोरोना काल में योगी आदित्यनाथ का यूपी मॉडल आपदा प्रबंधन :
जब चीन के वायरस ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचाया हर देश में लाखों लोग कोविंद संक्रमण के बाद जान दे रहे थे पूरे दुनिया के लिए मुश्किल के हालत थे क्योंकि इस वायरस को खत्म करने के लिए कोई दवा काम नहीं कर रही थी जिसकी इम्युनिटी कमजोर थी वह तुरन्त संक्रमित हो रहा था , टीवी में दिन रात हर देश में लोगों को दफनाने एक साथ डेड बॉडी को गड्डीढों में फेंकने , अस्पतालों में मरीजों की भीड़ डॉक्टर सिर से पैर तक PPE किट (Personal Protective Equipment) पहने रहते थे इसके बावजूद दुनिया भर में कई डॉक्टर्स ने मरीजों की सेवा करते जान दे दिया। देश भर में लॉकडाउन था लोग घरों के अंदर डर के कारण दुबके थे केंद्र सरकार ने आरोग्य सेतु नामक एक ऐप लांच किया था जो बताता था कि आपके घर के आसपास कितनी दूरी पर कोविड संक्रमित मरीज़ है। लोग दिन रात सेनाइटजर से हाथ साफ़ करते थे और मास्क लगाकर ही बाहर निकलते थे। इस गंभीर सिचुएशन में lockdown में सभी फैक्ट्री ऑफिसेज बंद थे और मजदूर बेरोजगार थे और पैदल ही मुंबई से उत्तरप्रदेश के सुदूर गांवों तक अपने माता पिता पति पत्नी बच्चो सहित आ रहे थे , क्योंकि ट्रेन भी बंद थीं और बसें भी बंद थी लोग इस आस में थे कि कम से कम योगी जी उत्तरप्रदेश के बॉर्डर में बसों का इंतजाम कर दें ,योगी जी ने इस चुनौती को स्वीकार किया और प्रवासियों के लिए बस हर जिला से जिला चलवा दिया।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोरोना काल में 'ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट' की रणनीति अपनाकर उत्तर प्रदेश को संभाला। सरकार ने गांवों के लिए विशेष निगरानी समितियां बनाईं, जो घर-घर जाकर मरीजों की पहचान करती थीं और उन्हें तुरंत मेडिकल किट उपलब्ध कराती थीं।
प्रमुख कदम इस प्रकार थे:
- प्रवासी सहायता: मुंबई और अन्य राज्यों से लौटे लगभग 40 लाख प्रवासियों के लिए बसें चलाईं, उनके रहने के लिए क्वारंटीन सेंटर बनाए और उन्हें भरण-पोषण भत्ता व राशन दिया।
- गाँव-स्तर पर कार्य: 'मेरा गांव, कोरोना मुक्त गांव' अभियान के तहत आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने संदिग्ध रोगियों की जांच कर उन्हें आइसोलेट किया। गांव गांव करोना संक्रमित मरीजों की पहचान की गई उन्हें क्वारनटाइन किया गया उनके लिए स्पेशल करोना किट दी गई। गांव गांव में कैंप लगाए गएकरोना संदिग्ध की पहचान के लिए।
- केंद्र से समन्वय: प्रधानमंत्री मोदी के 'दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी' मंत्र को लागू करने के लिए केंद्र के साथ मिलकर लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया और मुफ्त टीकाकरण अभियान को गति दी।
- टीम-11 का गठन: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की विशेष 'टीम-11' बनाई, जो रोजाना स्थिति की समीक्षा कर तत्काल निर्णय लेती थी।
- ऑक्सीजन प्रबंध - केंद्र सरकार से मिलकर हर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक ऑक्सीजन की सप्लाई की गई। जिससे कोविड पेशेंट को त्वरित ऑक्सीजन दी जा सके यदि उसकी आवश्यकता इमरजेंसी में पड़े तो।
योगी आदित्यनाथ का दूसरा मुख्यमंत्री का समय और कार्य:
योगी आदित्यनाथ के दूसरे कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों का विस्तृत विवरण आपके ब्लॉक के लिए यहाँ दिया गया है:
इंफ्रास्ट्रक्चर और एक्सप्रेसवे क्रांति:
उत्तर प्रदेश ने कनेक्टिविटी में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। केंद्र के सहयोग से गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है, जो पश्चिमी और पूर्वी यूपी को जोड़ेगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का सफल संचालन और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का विस्तार आर्थिक गलियारों को मजबूती दे रहा है। इसके साथ ही, जेवर (नोएडा) और अयोध्या में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों का विकास यूपी को पांच इंटरनेशनल एयरपोर्ट वाला पहला राज्य बना रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और पर्यटन के द्वार खुले हैं।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और पर्यटन:
अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा इस कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धि है। केंद्र और राज्य के साझा प्रयासों से काशी, मथुरा और अयोध्या को आधुनिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया गया है। विंध्य कॉरिडोर और नैमिषारण्य जैसे तीर्थों का सौंदर्यीकरण न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेज रहा है, बल्कि स्थानीय रोजगार के लाखों अवसर भी पैदा कर रहा है। 'होटल और होमस्टे' नीति ने पर्यटन को एक व्यवस्थित उद्योग का दर्जा दिया है।
निवेश और आर्थिक समृद्धि:
सरकार ने उत्तर प्रदेश को $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है। Global Investors Summit 2023 के माध्यम से ₹40 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। 'एक जनपद-एक उत्पाद' (ODOP) योजना ने हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार दिया है। कानून-व्यवस्था में सुधार और 'जीरो टॉलरेंस' नीति के कारण निवेशक अब यूपी को सुरक्षित मान रहे हैं। डेटा सेंटर पार्क और सेमीकंडक्टर यूनिट्स की स्थापना राज्य को 'डिजिटल हब' बना रही है।
कानून-व्यवस्था और सुरक्षा मॉडल:
योगी सरकार का 'उत्तर प्रदेश मॉडल' आज सुरक्षा के मानक के रूप में देखा जाता है। संगठित अपराध पर लगाम और महिला सुरक्षा के लिए 'मिशन शक्ति' का प्रभावी संचालन किया गया। केंद्र के सहयोग से हर जिले में आधुनिक पुलिस नियंत्रण केंद्र और फॉरेंसिक लैब की स्थापना की गई है। माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई ने राज्य में व्यापारिक माहौल को सुधारा है और सामान्य नागरिक में सुरक्षा का भाव पैदा किया है। आप लोगों को योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल के दौरान कानपुर के विकास दुबे के एनकाउंटर जिसमें गाड़ी पलट गई थी याद होगा इसमें कानपुर देहात के शिवली क्षेत्र के बदमाश ने जब पुलिस ने उसके घर दबिश दी थी इस दौरान विकास दुबे ने कई पुलिस वालों को छिपकर जान से मार दिया था और बाद में यही कुख्यात विकास दुबे को उत्तरप्रदेश पुलिस ने मध्यप्रदेश के उज्जैन में महाकाल मंदिर से पकड़कर कानपुर का रही थी रास्ते में जब विकास दुबे कानपुर आते समय हमला करने की कोशिश की तो मुठभेड़ में मारा गया। अब उत्तरप्रदेश के सारे माफिया डरे सहमे थे ,इसी दौरान उत्तर प्रदेश का प्रयागराज ( इलाहाबाद) का कुख्यात माफिया और मुख्यत अंसारी मऊ का माफिया इन दोनों ने कई अपराधों को अंजाम दिया था ये संगीन धाराओं में सजा काट रहे थे , अतीक अहमद ने राजू पाल विधायक् की हत्या करवाई थी तो 24 फरवरी 2023 में उमेश पाल नामक हाइकोर्ट के अधिवक्ता की हत्या दिनदहाड़े करवा दी गई ,अतीक अहमद ने साबरमती जेल में बंद रहते हुए सुनियोजित ढंग से ये हत्या करवाई थी ।उमेशपाल अधिवक्ता राजू पाल हत्याकांड के वकील थे।
- अतीक अहमद (प्रयागराज): 15 अप्रैल, 2023 को पुलिस कस्टडी के दौरान प्रयागराज में अतीक और उसके भाई अशरफ की रात 10:30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ दिन पहले ही उसका बेटा असद एनकाउंटर में मारा गया था।
- मुख्तार अंसारी (मऊ): 28 मार्च, 2024 को बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी की दिल का दौरा (cardiac arrest) पड़ने से अस्पताल में मृत्यु हो गई थी।
- सख्त सजा: छल, कपट, प्रलोभन या जबरन धर्मांतरण कराने पर 1 से 10 वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
- गैर-जमानती अपराध: इस कानून के तहत दर्ज मामले संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) होते हैं।
- पंजीकरण अनिवार्य: यदि कोई अपनी इच्छा से शादी के लिए धर्म बदलना चाहता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट (DM) को 60 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य है।
- सामूहिक धर्मांतरण: सामूहिक रूप से अवैध धर्मांतरण कराने पर सजा और जुर्माना और भी अधिक सख्त है।
जन कल्याण और ग्रामीण विकास:
केंद्र की योजनाओं को जमीन पर उतारने में यूपी प्रथम रहा है। 'पीएम आवास योजना' के तहत लाखों गरीबों को छत मिली और 'हर घर नल योजना' से बुंदेलखंड जैसे सूखे क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल पहुँचाया गया। निःशुल्क राशन योजना और उज्ज्वला योजना के विस्तार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल दिया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए 'एक जिला-एक मेडिकल कॉलेज' का लक्ष्य अंतिम चरण में है, जिससे चिकित्सा सुविधाएं सुलभ हुई हैं।उत्तर प्रदेश में 'एक जिला एक मेडिकल कॉलेज' योजना के तहत कुल 75 जिलों में मेडिकल कॉलेज का लक्ष्य रखा गया है।
वर्तमान स्थिति:
- निर्मित/संचालित: अब तक प्रदेश में 65 मेडिकल कॉलेज क्रियाशील हो चुके हैं।
- निर्माणाधीन: शेष 10 जिलों में पीपीपी (PPP) मॉडल या सरकारी स्तर पर कार्य चल रहा है।
- अस्पताल: प्रत्येक मेडिकल कॉलेज के साथ एक जिला अस्पताल को संबद्ध (Attach) किया गया है या नया संबद्ध अस्पताल बनाया गया है, जिससे राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का बड़ा नेटवर्क तैयार हुआ है।
भव्य महाकुंभ आयोजन:2025
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रयागराज कुंभ ने प्रबंधन और भव्यता के वैश्विक मानक स्थापित किए। प्रशासन ने 'एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र' (ICCC) जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग कर करोड़ों की भीड़ को सुव्यवस्थित किया, जबकि 'स्वच्छ कुंभ' अभियान के तहत लाखों शौचालयों और निरंतर सफाई से इसे अब तक का सबसे साफ आयोजन बनाया। बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व सुधार करते हुए रिकॉर्ड समय में पक्की सड़कें, पुल और भव्य टेंट सिटी तैयार की गई। साथ ही, सुरक्षा के लिए जल पुलिस, ड्रोन निगरानी और पुख्ता सुरक्षा चक्र लागू किया गया, जिससे बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के यह 'दिव्य और भव्य' आयोजन संपन्न हुआ। 2025 के महाकुंभ में लगभग 40 करोड़ लोगों ने स्नान किया और मौनी अमावस्या को करीब 8 करोड़ लोगों ने स्नान किया ,पूरे देश के हर जिला गांव से व्यक्ति स्नान के लिए आए।यद्यपि मौनी अमावस्या के दिन अधीन भीड़ के दबाव के कारण संगम नोज में स्नान के बाद शुभ मुहूर्त में दुबारा स्नान की प्रतिक्षा में श्रद्धालु बैठे थे उस समय अखाड़ा मार्ग की बल्लियों को तोड़कर भीड़ प्रवेश कर गई और भीड़ में करीब चालीस लोगों की दुखद मृत्यु हो गई।बाद में प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रण करने के लिए संगम नोज से पंद्रह किलोमीटर से ही वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया।
उत्तर प्रदेश पर्यटन का कायाकल्प: अयोध्या, ब्रज और बुंदेलखंड का नया स्वरूप
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए 'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र पर कार्य किया है। पर्यटन को आर्थिक इंजन बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व निवेश किया गया है।
1. अयोध्या: नव्य अयोध्या का उदय
अयोध्या अब केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि एक आधुनिक 'स्मार्ट सिटी' के रूप में उभर रही है।
- राम मंदिर एवं कॉरिडोर: श्री राम जन्मभूमि मंदिर के साथ-साथ राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ का निर्माण।
- कनेक्टिविटी: महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशन की स्थापना।
- सौंदर्यीकरण: सरयू रिवर फ्रंट का विकास और डिजिटल म्यूजियम के जरिए रामायण संस्कृति का प्रसार।
2. ब्रज क्षेत्र: सांस्कृतिक पुनरुत्थान
मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन के विकास के लिए 'ब्रज तीर्थ विकास परिषद' सक्रियता से कार्य कर रही है।
- बांके बिहारी कॉरिडोर: वाराणसी की तर्ज पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भव्य कॉरिडोर की योजना।
- कुंडों का जीर्णोद्धार: ब्रज के प्राचीन कुंडों और वनों का पुनरुद्धार कर उन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना।
- उत्सव पर्यटन: लठमार होली और कृष्ण जन्मोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना।
3. बुंदेलखंड: किलों और जल पर्यटन का संगम
बुंदेलखंड को 'हेरिगेज और एडवेंचर टूरिज्म' के केंद्र के रूप में प्रमोट किया जा रहा है।
- किलों का संरक्षण: झांसी, कालिंजर और बरुआ सागर जैसे ऐतिहासिक किलों का संरक्षण और वहां लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत।
- बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे: इस एक्सप्रेसवे ने दिल्ली और लखनऊ से बुंदेलखंड की दूरी कम कर पर्यटन को गति दी है।
- वॉटर टूरिज्म: चंदेलकालीन बांधों और झीलों में जल क्रीड़ा गतिविधियों को बढ़ावा देना।
निष्कर्ष: 'नये उत्तर प्रदेश' का उदय
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी पुरानी पहचान को पीछे छोड़कर एक 'सक्षम और सुरक्षित प्रदेश' के रूप में अपनी नई पहचान बनाई है। यह लेख स्पष्ट करता है कि कैसे एक मजबूत इच्छाशक्ति वाली सरकार 'विरासत' और 'विकास' को एक साथ लेकर चल सकती है।
जहाँ एक ओर अयोध्या, काशी और ब्रज का पुनरुद्धार राज्य के सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर एक्सप्रेसवे का जाल, जेवर एयरपोर्ट और 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट' जैसे कदम यूपी को $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने की ओर अग्रसर कर रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव राज्य की कानून-व्यवस्था में आया है, जिसने न केवल आम नागरिक के मन में सुरक्षा का भाव पैदा किया, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी जीता।
संक्षेप में कहें तो, योगी आदित्यनाथ का 'यूपी मॉडल' आज सुशासन, आपदा प्रबंधन और कड़े फैसलों का एक ऐसा उदाहरण बन चुका है, जिसकी चर्चा न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। उत्तर प्रदेश अब 'बीमारू राज्य' की श्रेणी से बाहर निकलकर देश के विकास का 'ग्रोथ इंजन' बनने की राह पर तेजी से दौड़ रहा है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन और मुख्यमंत्री योगी के मिशन ने मिलकर उत्तर प्रदेश के सुनहरे भविष्य की नींव रख दी है।
आपको योगी सरकार की कौन सी उपलब्धि सबसे बड़ी लगती है नीचे कमेंट में अपनी राय अवश्य दीजिए ।
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