अंध भक्ति किसे कहते हैं |जानिए कौन होते हैं अंधभक्त

 अंधभक्त किसे कहते हैं?

अंध भक्त का शाब्दिक अर्थ-

अंधभक्त का तात्पर्य हिन्दी शब्दावली के अनुसार वो भक्त जो आंख बंद कर दुसरों का अनुसरण करें। अनुयायी जो अपने नेता पर अधिक भरोसा करे । और अपने विवेक का इस्तेमाल
बिल्कुल न करे।
        इस प्रकार हम कह सकते है कि अंध भक्ति का अर्थ है बिना तर्क, सोच-विचार या प्रश्न किए किसी व्यक्ति, विचार, संस्था, या धर्म का आँख बंद करके अनुसरण करना। यह एक ऐसी स्थिति होती है जहाँ व्यक्ति किसी नेता, गुरु, या विचारधारा पर बिना किसी संदेह के विश्वास करता है, भले ही वह गलत ही क्यों न हो।

अंध भक्ति के लक्षण:

अंध भक्ति किसे कहते हैं जानिए कौन होते हैं अंधभक्त

     अंध शब्द के अन्य मिश्रित शब्द

अंध प्रेम-Blind love

अंध भक्त-Blind supporter

अंध विश्वास- Superstition,Blind Faith

अंध राष्ट्रवाद -Blind Patriotism

अंध-Blind

भक्त- Worshiper

भक्ति शब्द का प्रयोग ईश्वर भक्ति ,मातृ भक्ति,पितृ भक्ति,राष्ट्र भक्ति ,आदि

भक्त वो हैं जो भक्ति करते है जो  किसी में श्रद्धा और आस्था और  विश्वास रखतें हैं ,और अपने हर कार्य का प्रारंभ अपने आराध्य को ध्यान करते हुए शुरू करते है और उनके वचनों को आत्मसात करते हुए उसी पथ पर चलने का प्रयास करते हैं जो सत्य है।

 जैसे -शिव भक्त ,कृष्ण भक्त ,देवी भक्त ,राष्ट्र भक्त आदि हैं।

जो भक्ति करते है।

अंध भक्ति के लक्षण:

  1. बिना सवाल किए मानना – कोई भी बात तर्क या प्रमाण के बिना सच मान लेना।
  2. नेता या गुरु को सर्वशक्तिमान मानना – मानना कि उनका कोई निर्णय या विचार गलत नहीं हो सकता।
  3. तथ्यों को नजरअंदाज करना – जब सामने स्पष्ट प्रमाण हों, तब भी सच्चाई को न मानना।
  4. अन्य विचारों का विरोध करना – किसी अन्य विचारधारा या आलोचना को दुश्मनी मानना।
  5. भावनात्मक रूप से जुड़ जाना – केवल भावनाओं के आधार पर निर्णय लेना, तर्क की उपेक्षा करना।

अंध भक्ति के दुष्परिणाम:

  • समाज में कट्टरता और विभाजन बढ़ता है।
  • व्यक्ति अपनी सोचने-समझने की क्षमता खो देता है।
  • गलत नेतृत्व को समर्थन मिलता है, जिससे समाज को नुकसान हो सकता है।
  • विज्ञान और प्रगति में बाधा आती है।

कैसे बचें अंध भक्ति से?

  • हर चीज पर तर्क और प्रमाण के आधार पर विश्वास करें।
  • स्वतंत्र रूप से सोचें और सवाल पूछें।
  • विभिन्न स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें और तुलना करें।
  • अंधभक्त बनने की बजाय जागरूक नागरिक बनें।

अंध भक्ति और सच्ची श्रद्धा में फर्क होता है। श्रद्धा तर्क के साथ संतुलित होती है, जबकि अंध भक्ति तर्कहीन होती है।

अंधभक्त का तात्पर्य किसी भी व्यक्ति पर ऑंखमूँदकर विश्वास करने वाला अनुयायी। जिसमें व्यक्ति अपने विवर्क और तर्क का प्रयोग न करे।

निरीश्वरवादी बौद्ध अन्य धर्म अनुयाइयों के धर्म ग्रंथ में अकल्पनीय बातों का खंडन करते है ,वो हिन्दू ,मुस्लिम ,ईसाइयों के धर्म ग्रथों में दिए गए कई कथानकों का खंडन करते है और कपोल कल्पित कहते हैं  और इन धर्मों में आस्था रखने वालों को अंधभक्त भी कह देते हैं।

अंध भक्ति के प्रकार--

1- नेता के भक्त

2-पार्टी के भक्त

3-किसी मंत्री के भक्त

3-किसी अधिकारी के भक्त

4-किसी  कम्पनी के भक्त

5-किसी  निजी संगठन के भक्त

अंध भक्त शब्द की शुरुआत भारत में-:

अंधभक्त कांग्रेस पार्टी के सदस्य के बारे में 1977-78  से कहा जाना शुरू हुआ,जब इंदिरा जी ने विपक्षियों को आपातकाल में जेल में डाल दिया और हर कांग्रेस समर्थक उस समय इंदिरा जी का गुणगान करता रहा जबकि देश मे लोकतंत्र खत्म कर दिया गया चारो तरफ हाहाकार था हर विपक्ष के सदस्य को जेल में डाल दिया गया था।

 उसके बाद कांग्रेस में राजीव गांधी सोनिया गांधी के समय जिनकी पकड़ दस जनपद तक होती थी ।उनको अंधभक्त कहा गया जो बिना सोनिया गांधी के समर्थन के कोई कार्य नहीं करते थे।

राहुल गांधी के प्रति कांग्रेस नेता कमलनाथ का वो कथन बहुत ही चर्चा में था जब कमल नाथ यूपीए में कैबिनेट मंत्री थे,2009 में इशरत जहां मामले में दो हलफनामे अदालत ने प्रस्तुत किए गए थे,आर. वी. एस. मणि (R. V. S. Mani) भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) के आंतरिक सुरक्षा विभाग में पूर्व अवर सचिव (Under Secretary) थे। बाद में उन्होंने बताया कि सरकार बार बार दबाव डाल रही थी ,जिसमें ये कहा जा रहा था कि वो दूसरे हलफनामे में इशरत जहां को निर्दोष दिखाए, और मोदी को दोषी बताए , जब आर वी एस मणि ने ऐसा बदलाव करने से मना किया तो इस दौरान ऐसा उन्होंने बताया कि कमलनाथ ने कहा कि" बड़े बड़े DM, SDM, राहुल का मूत्र लेने के लिए लाइन में लगे रहते है और तुम ये काम कैसे नहीं करोगे"। ये कमलनाथ की गांधी नेहरू परिवार के प्रति अंधभक्ति की पराकाष्ठा थी।

   कुछ धार्मिक नेता अपने कथा से अपने परिधान से कुछ मनोवैज्ञानिक कार्य करके एक राजा की तरह व्यवहार करते है उनके फॉलोअर उनको भगवान समझने  लगते है, बाबा लोगों के चमत्कार उनकी आंखे बंद कर देते है ,फॉलोअर अंध श्रद्धा में कई बार खुद अपराध में फंस जाते है। 

    इनमें आंध्र प्रदेश के एक आध्यात्मिक गुरु थे सत्य साईं बाबा ,यद्यपि उन्होंने कई अस्पताल आदि बनवाए पर उनके चमत्कार​ जैसे हवा में विभूति प्रकट करना , सोने की वस्तुएं प्रकट करना इनका निधन 2011 में हुआ था।

     इसी तरह एक बाबा  हैं संत रामपाल 2014 में उनके बरवाला स्थित आश्रम में पुलिस और समर्थकों के बीच हिंसक टकराव और गोलीबारी हुई थी, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। ये उनके समर्थकों की अंधभक्ति ही थी। 

     एक और बाबा  जिनका आश्रम मैनपुरी जिले में है नारायण साकार हरि उर्फ सूरजपाल उर्फ भोले बाबा इनके कथा में बेतहाशा भीड़ होती थीपरंतु 2 जुलाई 2024 के दोपहर में सत्संग के बाद हुआ यद्यपि पुलिस ने उन्हें मुख्य आरोपी नहीं बनाया परंतु उनके सुनने वाले अंध भक्ति के कहलाएंगे जो उनके पैरों की नीचे की मिट्टी पाने के लिए अचानक भागे । 

    इसी तरह डेरा सच्चा सेवा के प्रमुख बाबा राम रहीम जो ऐश की जिंदगी जीते थे उनके फॉलोअर उनको भगवान मानते थे पर जब यौन शोषण के आरोप में जेल में बंद हुए तब उनके फॉलोअर का धीरे धीरे उनके प्रति अंध भक्ति समाप्त हुई।

    इसी तरह आशा राम बापू खुद को कृष्ण का अवतार घोषित कर महिलाओं लड़कियों के साथ यौन शोषण को पवित्र रूप बताते थे उन लड़कियों , ऐसे बाबा जो क्षद्म वेश धारण करके गुमराह करते हैं। उनके प्रति उनके followers की अंध भक्ति ही है कि उनको वो आज भी एक संत मानते हैं।

      अब यहां अजमेर शरीफ़ दरगाह  1992 के चर्चित अजमेर सेक्स स्कैंडल का जिक्र कर रहे हैं। इस मामले में अजमेर शरीफ दरगाह से जुड़े खादिम परिवार के प्रभावशाली लोगों, जैसे फारूक चिश्ती, नफीस चिश्ती, और सलीम चिश्ती सहित 18 मुख्य आरोपी शामिल थे।इन लोगों ने दर्जनों छात्राओं और लड़कियों को अश्लील तस्वीरों और ब्लैकमेलिंग के जरिए शिकार बनाया था। इस ऐतिहासिक मामले में अगस्त 2024 में पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने 6 मुख्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।अजमेर शरीफ़ दरगाह के सेवादार चिश्तियों को देवदूत समझना बहुत ज्यादा आसक्ति  रखना ये समझकर कि उनकी मनौती पूरी होगी एक तरह से अंधभक्ति ही है। 

 अंध भक्त का वाक्य प्रयोग-

 आज राहुल गांधी के फॉलोवर उनकी हर बात को सही ठहराते हैं ,उनको भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखते है ।

जबकि उनके लीडरशिप में हुए अधिकांश चुनाव में कांग्रेस की हार हुई  और उनके द्वारा दिए गए मीडिया में कमेंट पर हास्य में  मीम्स बनाए जाते है या अन्य दलों द्वारा जब राहुल पर टिप्पणी की जाती है तो उनके अनुसरण करने वाले अंध भक्तों को बुरा लगता है।

आज विपक्ष ने मोदी के सत्ता में आने के बाद वार करने के लिए मोदी समर्थकों को चिढ़ाने और परेशान करने के लिए अंधभक्त का प्रयोग करने लगे। ये शब्द सोशल मीडिया में भी ट्रेंड करता रहता हैं।

 कुछ भाजपा के कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी को भगवान की तरह पूजने लगे हैं कई अवसरों में ये देख गया है कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता मोदी को भगवान राम और शिव से तुलना करते हुए असाधारण  अलौकिक शक्ति वाला लीडर बताया है

उन पर हर हर मोदी घर घर मोदी जैसे नारे मोदी  के प्रति आसक्ति और अंध भक्ति के कारण बना नारा था ,

  प्रधान मंत्री मोदी पर एक भी कटाक्ष सुनने पर तिलमिला जाने वाले कार्यकर्ता,परंतु नरेंद्र मोदी के तरह के मेहनतकश ,क्रिया शील,उनके राजनीतिक टैक्टिक्स का अनुसरण न करके सिर्फ मोदी मोदी करते है गुणगान करते हैं धरातल पर ये नहीं दिखते ये भी एक प्रकार की अंधभक्ति ही है।

 आज भारत मे  सोशल मीडिया में "चमचे" शब्द का भी प्रचलन है जो सोनिया गांधी और नेहरू गांधी खानदान की चाटुकारिता करते है। उनके लिए ये शब्द इस समय ट्रेंड कर रहा है । परंतु चमचे शब्द का प्रयोग नौकरशाही में भी खूब हुआ है जिसमे कोई  आफिस का बाबू   अपने किसी अधिकारी की खुशामद करता रहता है।जिससे उसके काम मे कोई रुकावट न आये।

निष्कर्ष-- 

इस प्रकार अन्ध भक्त शब्द एक प्रकार के नेता के अनुयायी हैं। जो अपने विवेक का प्रयोग नहीं करते और अपने नेता के गलत निर्णय पर या तो चुप रहते है या फिर सही ठहराते है।

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2 Comments

  1. Bhai apne theme konsi use ki hai . Or ye ads kon sa auto ad ya manual hai.

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    1. ब्लॉगर की थीम है ,और ऑटो ad ही हैं।

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