कश्मीर और राजनीतिक उठापटक!
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:गृहमन्त्री अमितशाह: |
कश्मीर समस्या क्या है? क्या ये समय की देन थी या नेहरू के गलत निर्णय और महत्वाकांक्षा का परिणाम थी? कैसे पैदा हुई, ? सत्तर साल में क्यों खत्म नही हुई? समस्या बनाई गई राजनीति करके या इस समस्या को ख़त्म करने की। हिम्मत नही दिखाई ,पूर्व सरकारों ने ? इस मसले को सुलगाते रहो ,मुद्दा बना रहे ? जिससे। राजनीतिक रोटियां सेकते रहो ? भारत के नेता और पाकिस्तानी सिर्फ़ बयानबाजी करतें है क्यों कोई सकारात्मक पहल नही करते ? क्या ये समस्या विश्व में संकट पैदा कर सकती है ? ये प्रश्न आम जनता के बीच उठते रहते है । अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद क्या होगा ,क्या कर्फ्यू हटने के बाद कश्मीरी जनता या अलगाववादी कोई बड़ा उपद्रव करेंगे ,आख़िर 370 हटने के बाद कांग्रेस ,सपा, तृणमूल ,CPM ने विरोध क्यों किया ,अमेरिका क्या चाहेगा, चीन क्या चाहेगा ,अब पाकिस्तान क्या करेगा ये प्रश्न जनता के दिमाग़ में जेहन में कौंधते हैं।
कश्मीर issue और भारत के नेता::
धारा 370 एक ऐसा मुद्दा बन गया था जिससे जनता बहुत ही परेशांन थी ,पूरे देश की जनता चाहती थी की धारा 370 से निज़ात मिले , भाजपा ने 370 हटाने की बात हर बार अपने मैनीफेस्टो में रखा ,जबकि कांग्रेस ने 2019 के घोषणा पत्र में इसको सहेजने की बात की, अन्य क्षेत्रीय दलों की अपनी अपनी राय रही ।
जब भाजपा ने दुबारा सरकार 2019 में बनाई तो विपक्षी उस पर तंज कसते थे कि वो धारा 370 कब हटा रही है कब मन्दिर बना रही है ,भाजपा सिर्फ चुनावी शिगूफ़े के लिए दोनों मुद्दों को भुना रही है , जब सत्ता में भाजपा आ जाती है तो इन मुद्दों को ठंढे बस्ते में डाल देती है ,और जब चुनाव आ जाता है तो इन मुद्दों को अपने पिटारे से निकाल कर जनता को भावनात्मक रूप से उकसाती है और वोट लेती है , जनता के आधे आबादी के लोग भी उनका समर्थन करते थे , परंतु कुछ को विश्वास था कि बीजेपी पूर्ण बहुमत के आने के बाद जर्रूर इनका हल निकालेगी।
लोंगों को मोदी के विराट व्यक्तित्व ,उनके वैदेशिक संबधों को जिसमे भारत ने अपना गरिमामय स्थान बनाया है , अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य (international perspective) में ,जब आज सभी विकसित देश मोदी के good governace की तारीफ़ कर रहें है , सभी देश की निगाहें भारत में लगीं है , भारत को ऊंचाइयों पर ले जाने का जो स्वप्न देखते है मोदी उस स्वप्न को जनता के बीच भी साझा करते है जनसम्पर्क द्वारा रेडियो प्रोग्राम मन की बात के माध्यम से ,जिससे इस सरकार ने न केवल अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में ख़ुद को मज़बूत बनाया है बल्कि जनता के दिलों में भी बख़ूबी जगह बनाई है।
इसी दमख़म के बीच इस सरकार ने इस मानसूनी सत्र में इतने बिल पेश कर दिए जो एक इतिहास बन गया ,सरकार ने सत्र बढ़वाया भी अन्य विधेयक पेश करने के लिए ,बड़े बड़े विधेयक इस सत्र में आये चर्चा हुई पास हुए ,पर आम जनता के मानसपटल में बस चुके विधेयक तीन तलाक और धारा 370 के विधेयकों को ऐसे सदन के पटल में रखा कि विपक्षी भी कुछ नही समझ पाएं ,सिर्फ राज्यसभा में सरकार के बहुमत में नही होने से बिखरे हुए विपक्ष और क्षेत्रीय दलों को पक्ष में मोड़ा गया ,तीन तलाक में हो हल्ला के बाद राज्यसभा में पास हो गया , कांग्रेस ने आरोप लगाया की अचानक प्रस्तुत करने से कोई व्हिप जारी नही कर पाये, सांसदों को एक जुट नही कर पाएं ,और सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंट दिया,तीन तलाक का बिल धोखे में पास करा लिया ।
सबसे बड़ा भूचाल आया धारा 370 से ,इसके सदन में पहुंचने से पहले देश में हर बन्दे के जहन में एक ही प्रश्न कौंधता था कि इतनी सेना क्यों भेजी जा रही है कश्मीर में,क्या सरकार को कोई ख़ुफ़िया जानकारी तो नही मिली 15 अगस्त में आतंकियों के कश्मीर में हमले की ,अमरनाथ यात्रियों को वापस लौट आने , सारे कश्मीरी पर्यटको को होटल छोड़कर वापस आने के सरकार के उद्घोषणा के बाद तो लगा बहुत कुछ होने वाला है , कश्मीरी नेताओं , महबूबा मुफ़्ती ने तो कह दिया की धारा 370 या 35-A को यदि केंद्र सरकार ने हटाया तो कश्मीर हाँथ से निकल जायेगा, उमर अब्दुल्ला और फ़ारुख़ अब्दुल्ला एक दिन पहले ही प्रधानमन्त्री से मिले और आश्वाशन माँगा कि वो जम्मू कश्मीर के लिए कोई ऐसा क़दम न उठायें जिससे काश्मिरियत में आंच न आये , प्रधानमन्त्री जी ने जवाब दिया भाई 24 घण्टे और इन्तजार कर लो पर्दा उठ जायेगा।
अगले दिन अमित शाह गृह मंत्री संसद में प्रवेश किया ,अध्यक्ष ने कार्यवाही प्रारम्भ करने को कहा,अमित शाह जी ने अपने पिटारे से वो तीर निकाला जो भारत के लिए ब्रम्हास्त्र कहा जायगा ,क्योंकि ने राष्ट्रपति के उस आदेश को पढ़कर सदन को सुनाया जिसमे धारा 35-A के समाप्ति और धारा 370 के भाग दो और तीन के उन्मोचन की बात कही गई ।साथ में तीन बिल को पास कराने के लिए सदन में प्रस्तुत कर दिया,जो पास भी हो गए क्योंकि सदन में भाजपा का बहुमत नही होने के बाद भी बसपा, बी जे डी, ए आई डी एम के, तेलुगुदेशम,वाई एस आर कांग्रेस ने सरकार का समर्थन किया इस मुद्दे में ।
अब प्रश्न ये उठता है कि विरोधी पार्टियां विरोध क्यों कर रहीं है , क्या कारण है ,और क्या कारण है कुछ पार्टियां समर्थन कर रहीं है?
इसका जवाब ये है कि कश्मीर एक ऐसा नासूर बन गया था देश के लिए जिसने देश को बहुत ही क्षति दी ,नुक्सान उठाया ,न सिर्फ़ 1989 -1990 से पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद बढ़ा बल्कि पत्थरबाजी की घटनायें बढ़ी ,जब कश्मीर का पहला फिदाइन (आत्मघाती मानव बम) हमला हुआ सी आर पी एफ के जवानों पर पुलवामा में ,उस हमले में जितने सैनिक मरे उससे देश के हर छोटे से बड़े सभी लोगो का दिल छलनी कर दिया ,लोग असीम पीड़ा में थे ,कुछ करना चाहते थे ,सरकार ने बहुत कुछ किया एयर स्ट्राइक करके पर ,ये फौरी तौर पर इलाज़ था परंतु अब लोग चाहते थे कि इसका परमानेंट इलाज हो उस कारण को खत्म किया जाये जिसके कारण पाकिस्तान आतंक फैला रहा है ,क्योंकि वो कश्मीर को अभी भी विवाद का क्षेत्र बनाये रखना चाहता था, क्योंकि काश्मीर की अवाम धारा 370 के कारण पूरी तरह नही जुड सकी भारत के प्रति जब देश के किसी क़ानून नियम का सीधे प्रभाव वहां नही पड़ता था इसी कारण कश्मीर का कुछ तबक़ा सिर्फ इसी इशू को राजनीति करके सत्ता में आना चाहता था ,ये लोग राजनीति के किये अलगाववादी नेताओं ,जैसे यासीन मलिक ,आदि नेताओं को संरंक्षण देते थे, पाकिस्तान से धन आता था हवाला से ,पत्थर बाज़ी के लिए । जनता के बीच कश्मीर का मुद्दा भाजपा के 2019 से ज्यादा 2014 लोकसभा के compaign में आया था, परंतु सरकार ने धारा 370 को खत्म करने से पहले पूरी तैयारी। पिछली सरकार मोदी-1 सरकार के 5 साल में कर ली ,सारे आंकड़े जुटा लिए ,महबूबा मुफ़्ती की सरकार के साथ गठबंधन से जान लिया कि सरकार कश्मीरियों के लिए कितना विकास कर रही कितना भ्रष्टाचार फैला रही , कैसे यहां की सरकारों ने पंचायती राज को आगे नही बढ़ने दिया ?आम जनता क्या चाहती है ,कितनी जनता पूरी तरह भारत देश में मिलना चाहती है ? कितने लोंगों के पास मनी लॉन्डरिंग का पैसा है ,ये पत्थरबाज कौन है कौन इन्हें पत्थर बाज बना रहा है, पत्थरबाजों के कोई सख्त क़दम उठाने से पीछे हटना ,महबूबा मुफ़्ती, फ़ारुख़अब्दुल्ला द्वारा लगातार पाकिस्तान समर्थक बयानबाजी करना ,अब केंद्र की सरकार चुनाव कंपेन के समय मैनिफेस्टो के लिए जनता द्वारा लिए गए ऑनलाइन मशविरे को देखा होगा उसने देखा कि ज्यादातर लोग कश्मीर मुद्दे पर भारत का ऐसा ही स्टैंड चाहते थे ,पूरे देश में राष्ट्र वाद की हवा लगातार बह रही थी ,लोहा गरम था ,जम्मू में सरकार न होकर गवर्नर रूल था,गवर्नर रूल को बढ़ाया गया ,और कुछ पार्टियों को सहमत किया गया ,नैतिकता ,राष्ट्रवाद, दलितों के उत्थान ,नारी उत्थान के लिए। कुछ पार्टियां इसके लिए सहमत भी हुई राज्यसभा में इस प्रस्ताव के लिए यदि कभी भाजपा ने प्रस्तुत किया ,बसपा ने सहमति दी क्योंकि बी आर अम्बेडकर ने धारा 370 लगाने का सख्त विरोध किया था ,एक बार तो उन्होंने जिद्द पकड़ ली कि ये देश के समानता और संविधान के विरोध में है , तब शेख अब्दुल्ला आंबेडकर जी को समझाने के लिए उनके पास आया,तब अम्बेडकर ने अब्दुल्ला से कहा ये कैसे हो सकता है की देश के टैक्स का पूरा पैसा आप के कश्मीर में लगा दिया जाए और आप कश्मीर वासी देश को कुछ न दें बल्कि एकता अखण्डता को कम जोर कर दें? लगते समय ही ,इसके अलावा बसपा को दलितों के चिंता के आधार पर समर्थन दिया क्योंकि वहां दलितों के लिए जम्मू कश्मीर विधानसभा में ,नौकरियों , में कोई आरक्षण नही था ,1957 में सरकार द्वारा पंजाब से लाकर बसाये गए बाल्मीकि समुदाय के अधिकारों के लिए,जो आज भी सफ़ाई कर्मचारी के अलावा कोई नौकरी नही पा सकते ,ए .आई. डी. एम. के. ने इसलिए समर्थन किया क्योंकि जयललिता ने धारा 370 हटाने के लिए कई बार केंद्र सरकारों से कहा था ,बीजू जनता दल ने क्यों किया समर्थन तो वो इसलिए कि नवीन पटनायक के पिता ने भारत छोडो आंदोलन के समय युवा आंदोलनकारी थे उड़ीसा से वो देश की आजादी के समय ही किसी राज्य को विशेष दर्जा के ख़िलाफ़ थे ,वो एक समाजवादी थे परंतु 370 के विरोध में थे। आम आदमी पार्टी ने क्यों समर्थन किया क्योंकि आम आदमी की विचारधारा शुरुआत में कम्युनिस्ट थी ,जब पार्टी के दिल्ली में सरकार बनाया ,तब उनके नेता प्रशांत भूषण ने कश्मीर को आज़ाद कराने का विवादास्पद बयान दिया था, तब आम आदमी पार्टी की किरकिरी हुई थी ,इस समय भी संसद के बहार इनके नेता संजय सिंह ने विरोधियों के खेमे यानि कांग्रेस, सपा, तृणमूल, सी. पी. एम. के साथ मिलकर विरोध स्वरूप ज़मीन में धरना दिया था,पर केजरीवाल ने समर्थन वाला ट्वीट किया क्योंकि केजरीवाल के पास मीडिया का फीडबैक रहता है ,उनका चुनाव भी दिल्ली का 2 महीने बाद होना है इसलिए डबल स्टैंड अपनाया ,दिल्ली में इस मुद्दे के समर्थक ज़्यादा हैं पर कुछ इस मुद्दे से विरोधी भी होंगे ,केजरीवाल दलितों का वोट भी लेना चाहते है और धारा 370 से दलितों को फायदा होगा ,इसलिए वो दलितों को नाराज़ कदापि नही करना चाहते और साथ में इसी मुद्दे से दिल्ली में कोई सीट नही मिलेगी इस बार ।
विरोधी के सुर क्यों है विरोधी, 370 के हटने से----
सपा ,कांग्रेस, तृणमूल विरोध में क्यों है इस मसले में , क्या ये पार्टियां देश विरोधी है ,तो आप समझो कि ये सब वोट बैंक का ख़ेल है ,इन सब पार्टियों के नेताओं को मालूम है कि धारा 370 क्या थी? कांग्रेस ने तो इसी मक़सद से इसे तैयार किया जवाहर लाल नेहरू इस प्रस्ताव को पास करवाने के लिए पटेल जी से दबाव डाला था ,क्योंकि वो उस समय अमेरिका में थे , नेहरू ने अपने विश्वस्त अयंगार को इस मामले को समझने के लिए सुपुर्द कर दिया था क्योंकि आयंगार ने कई साल राजा हरि सिंह के प्रधानमन्त्री रहे थे ,पटेल ने इस मसविदा को संसद,लोकसभा में प्रस्तुत तो जरूर करवा दिया पर पटेल ने कहा नेहरू पछतायेगा,बहुत हो हंगामा हुआ उसके प्रस्तुत करने में उस समय पर बिल पास हो गया ,वर्तमान में देखिये ,कांग्रेस के दो नेता मुखर विरोध कर रहें है एक ग़ुलाम नबी आजाद जो कश्मीर के रहने वाले है और तीन बार वहां के सी. एम. रह चुके हैं ,उनकी राजनीति कश्मीरी लोंगो से ही है इसलिए उनको महबूबा ,उमर अब्दुल्ला, फ़ारुख़ अब्दुल्ला की तरह विरोध तो करना ही पड़ेगा ,उधर एक दूसरे नेता अधीर रंजन चौधरी को लगा दिया है बंगाल के मुस्लिम्स को संतुष्टि के लिए। राहुल गांधी का इस मसले में बिलकुल चुप्पी वाला स्टैंड रहा, कुछ कांग्रेसी नेता इस के सपोर्ट में है जैसे कर्ण सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, जनार्दन द्विवेदी, आदि ,जिससे जनता के बीच कांग्रेस का कन्फ्यूज़न वाला स्टैण्ड बना रहे कि कांग्रेस इसके विरोध में है या सपोर्ट में जनता को भ्रम में रखा जाये।
अब सपा को विरोध करना और जद यू का विरोध करने में लगता है कि दोनों अभी तक जनता की नब्ज नही पहचान पाये ,जद यू तो एन. डी. ए. के साथ है ,जद. यू. का कहना है कि उनके नेता जयप्रकाश नारायण धारा 370 के समर्थक थे इसलिए वो हटाने में विरोध करेंगे,क्या सपा भी इसी कारण विरोध कर रही है ? पर नही सपा का वोट बैंक है जिसमे कई जिलों में कई मुस्लिम बाहुल्य है जो कश्मीर में भारत के सेना भेजने का विरोध करते आएं है,जो पत्थर बाजों को मासूम बताते हैं , सपा ,जद यू को उस वोट बैंक की चिंता है पर मुस्लिम का कुछ तबक़ा 370 के भारत के कदम से ख़ुश भी है या फिर कुछ बिलकुल चुप है ,इसीलिए सपा ने पहले राज्यसभा में हो हंगामा किया, लोकसभा में अखिलेश ने विरोध किया ,इन्होंने लखनऊ में 370 हटाये जाने के कारण हो हंगामा भी किया । परंतु अब देश के जब सारी जनता इस मुद्दे में एक जुट है तो ये नही चाहते की अब उनका यादव जाति का वोट कट जाए क्योंकि ज्यादातर 99 % यादव राष्ट्रभक्त जाति है और सेना में यादव जाति के युवा भी अधिक है ,आभीर एक सर्व प्राचीन जाति है जिनका ऐतिहासिक केंद्र जयपुर,मथुरा के आसपास तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से मिलता है ,जिन्होंने कई युद्ध किये देश के सीमाओं की रक्षा के लिए चन्द्रगुप्त मौर्य के सैन्य टुकड़ी के रूप में।
कांग्रेस का विरोधी स्वर केवल जम्मू कश्मीर की राजनीती ही नही है बल्कि पूरे देश की राजनीति है , पूरे देश के लोंगों का यदि भारत के भूभाग से धारा 370 को हटाना ही उसका सच्चा उद्देश्य है तो निश्चित रूप से यदि जो पार्टी जनता के ख़िलाफ़ जायेगी उसको नुकसान पहुंचेगा, कांग्रेस को इस मुद्दे में विरोध भी नही करते बन रहा न ही समर्थन ,विरोध करती है तो जनता की नजरों से दूर हटेगी ,यदि समर्थन करती है तो जनता प्रश्न पूंछती है कि आपने 70 साल में कोई प्रयास क्यों नही किया , 370 हटाने के लिए ,साथ में जब जब 370 का नाम सामने आता है जनता को बस जवाहरलाल नेहरू की देश के प्रति करतूत याद आती है जिससे कांग्रेस हासिये में चली जाती है।
अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य::
पाकिस्तान का बेसुरा सुर ---
अब हम अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखतें है , तो ये दिखता है कि पूरे दुनिया में सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान ही इस मुद्दे को तूल दे रहा है , जबकि दुनिया के सभी देश अमेरिका पूरा समर्थन में है ,अमेरिका ने इसे भारत का आंतरिक मामला बता दिया है , शायद भारत ने इसको संसद में लाने से पूर्व अपने राजनयिक से यूरोप अमेरिका में संभावनाओं के प्रकट होने पर उनके दृष्टिकोण को भांप लिया था ,ज्यादातर यूरोप के देश वही दृष्टिकोण रखते है जो अमेरिका रखता है ,यूरोप के सारे देश जर्मनी, फ़्रांस, आदि ने भी इसे भारत का आंतरिक मामला बताया है और पाकिस्तान के रवैय्ये की आलोचना की है जबकि पाकिस्तान ने इन देशों को भारत के इस निर्णय में हस्तक्षेप की प्रार्थना की थी ।
पाकिस्तान ने एकतरफा कार्यवाही करते हुए भारत के राजदूत को हटा दिया है ,समझौता एक्सप्रेस रद्द कर दी , थार एक्सप्रेस रद्द कर दी ,सभी व्यापारिक लें देन ख़तम करने को कह रहा है ,अब जब अंतरराष्ट्रीय इसे भारत का आंतरिक मामला बता दिया तो गुस्साए पाकिस्तानी मीडिया ने कश्मीरियों को कर्फ़्यू के हटने के बाद दंगा भड़काने के , बयान दे रहे हैं।
चीन का रुख़---
सिर्फ चीन ने इस मसले में प्रतिक्रिया व्यक्त किया है ,क्योंकि अक्साई चिन क्षेत्र भी उसने हथिया रखा है ,जिस पर वह अपना दावा जताता है ,भले ही वो दुर्गम पहाड़ी एरिया हो पर है तो भारत का हिस्सा ,अतः कश्मीर के बारे में पाकिस्तान का समर्थन करना कोई आश्चर्य नही है ,परंतु भारत के विदेशमन्त्री ने चीन यात्रा कर स्पष्ट कर दिया है कि ये भारत का आंतरिक मामला है जो जम्मू कश्मीर के विकास के लिए किया है।
वैसे पहले से चीन का बीजिंग से ग्वादर बन्दरगाह तक जाने वाले महामार्ग में काश्मीर के ज़मीन का प्रयोग हुआ है, जो भी उसके स्वार्थ में है , उसने POK का एक हिस्सा मुफ़्त में पाकिस्तान से ले रखा है ।
अब आतें है अमेरिका में अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत फिर से पड़ रही है क्योंकि अमेरिका ,अफगानिस्तान से अपने सेनाओं की वापसी चाहता है ,साथ में वह लगातार तालिबानी नेताओं से दोहा में कई राउंड की वार्ता कर चूका है , अब अमेरिका चाहता है की वार्ता नही होने पर आतंकियों को पाकिस्तान की जमीन में पनाह न दे साथ में तालिबानियों के ऊपर हमले में पाकिस्तान की ज़मीन का प्रयोग हो सकता है । अमेरिका ये भी चाहता है कि पाकिस्तान अपने देश में सभी आतंकी अड्डों को तुरंत खत्म करे।
इस समय अमेरिका भारत के सम्बन्ध पाकिस्तान से ज्यादा सुदृढ़ है , अमेरिका नही चाहता कि दक्षिण एशिया में चीन का प्रभाव बढे चीन को अमेरिका नही बढ़ते हुए देखना चाहता ,जैसा कुछ वर्षों में चीन ने मालद्वीप, बांग्लादेश ,श्री लंका, नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाया है । साथ में अमेरिका को रुस से अधिक खतरा चीन से लग रहा है ।अमेरिका चीन का ट्रेड वॉर से भी दोनों देश में तल्खियाँ बढ़ीं हैं।
रुश का रुख-----
रुस इस मामले में फिलहाल चुप है ,भारत वैसे इस समय तक रुश से बहुत दूर नही हुआ परंतु भारत के अमेरिकी रुख़ से चीन और पाकिस्तान की तऱफ झुक गया है। परंतु भारत के कई रक्षा सौदे जैसे ब्रम्होस मिसाइल , और सबमैरीन से है साथ में" फोर हंड्रेड" नामक लड़ाकू विमान भारत रुश से ख़रीदने जा रहा है , जो विश्व में बेहतरीन लड़ाकू विमान है जो अमेरिका के" 35 "नामक विमान के टक्कर का है , इसलिए रुस भारत का सपोर्ट करेगा। साथ में रुस भी चाहता है कि तेजी से आतंकवाद का उन्मूलन हो।
UNO का क्या कहना है---
पाकिस्तान UNO जायेगा इस आधार पर कि भारत काश्मीर के डेमोग्राफिक डिज़ाइन को बदलने की कोशिश कर रहा है ,पर UNO में अमेरिका का ही प्रभाव है। अमेरिका चाहता है कि काश्मीर के क्षेत्र में तेजी से आतंकवाद खत्म हो ,क्योंकि यंहां पर यदि आतंकवाद पुष्पित पल्लवित होता रहा तो वही पर तालिबान फ़िर से अड्डा जमा लेंगे ,और ये तालिबानी भारत से ज्यादा नुकसान अमेरिका को देंगे। बैसे शिमला समझौता के बाद UNO ने LOC से अपने पर्यवेक्षक हटा दिए थे। क्योंकि ये द्विपक्षीय मामला हो चूका था।
ताजा घटनाक्रम::
- पाकिस्तान 5 अगस्त 2019 के बाद से लगातार बौखलाया हुआ है उसने 9 दिन बाद भी रोना धोना बन्द नही किया ,उसने सारी दुनिया के देशों की देहली में माथा टेका है ,उसने पूरी दुनिया का चक्कर लगा लिया जैसे उसके लाहौर ,इस्लामाबाद ,सिन्ध में कब्ज़ा कर लिया हो ,उसने UNSC के वर्तमान अध्यक्ष देश पोलैंड से प्रार्थना कि तो पोलैंड ने दो टूक शब्दों में कह दिया अनुच्छेद 370 भारत का आंतरिक मामला है ,पाकिस्तान अपने हद में रह ।
अब पाकिस्तान ने जब देख लिया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जब उसकी कोई नही सुन रहा तब उसने ,भारत पर परमाणु बॉम गिराने की धमकी दे डाली ,उसने अपने सेना के कई बटालियन LOC में बढ़ा दिए है जबकि सामान्यता अभी तक तीन बटालियन तैनात होतीं थी । उसने अपने सारे आतंकी संगठनो को फिर से टेरर कैंप चलाने की अनुमति दे दी है ।
पाकिस्तान की धमकी वास्तव में इस मसले को अन्तर्राष्ट्रिय स्तर पर सभी देशों और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए है ,जिससे अमेरिका आ कर पाकिस्तान के साथ हमदर्दी के दो बोल भी बोल सके, पर हक़ीक़त ये है की वो पाकिस्तान जो अपने देश के गधों को चीन में बेंचकर अपनी अर्थव्यवस्था मज़बूत कर रहा है वो भारत में एक मिली मीटर क्षेत्र भी कब्ज़ा नही कर सकता, न ही कोई हमला कर सकता है ,हाँ पाकिस्तान को अब डर है की भारत का अगला कदम लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल के सारे आतंकी हमलों के सूत्रधार आतंकी अड्डों में सर्जिकल स्ट्राइक न कर दे या फिर भारत पाक के कब्जे वाले क्षेत्र पर भी न कब्जा कर ले।
भारत इस आधार पर तैयार है कि पाकिस्तान हमला करता भी है तो मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा या फिर वः 150 आतंकी भारत में घुसपैठ की योजना बना रहा है भारत की सेना हर स्तर पर जवाब देने को तैयार है।
आज अगस्त 2019 को घटनाक्रम-- 13 दिन बाद के हालात कश्मीर के धारा 370 हटने के 13 दिन बाद ,काश्मीर में व जम्मू में कई जगह कर्फ़्यू में ढील दी गई , बच्चों के स्कूल भी खुले ,इंटरनेट की सेवा कुछ समय के लिए बहाल की गई ,ज्यादातर जगह में कोई उपद्रव नही हुआ ,सभी जगह शांति बनी रही ,कश्मीर मसले में लगातार पाकिस्तान इसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाना चाहता था ,पर UN के सुरक्षा परिषद् की बैठक में चीन के अलावा किसी भी देश ने पाकिस्तान का साथ नही दिया , क्योंकि हर देश जानता है कि ये भारत का आंतरिक मामला है।
इधर पाकिस्तान ने UN में झटका खाने के बाद भारत से न्यूक्लिअर वार छिड़ने का हो हल्ला शुरू कर दिया ,अब चिल्ला रहा है की पाकिस्तान परमाणु हमला भी कर सकता है ,जब भारत ने पलट कर जवाब दे दिया ,कि भारत नो फर्स्ट यूज़ की पालिसी पर बदलाव भी ला सकता है ,तब पाकिस्तान बौखला गया वह चिल्लाने लगा कि भारत के न्यूक्लियर हथियार सुरक्षित नही हैं ।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि धीरे धीरे पाबंदियां खत्म कर दिया जायेगा ,27 -28 अगस्त को एक प्रतिनिधि मण्डल कश्मीर जायेगा जो केंद्र की योजनाओं को तेजी से लागू करेगी ,अब सबसे बड़ा शांति पूर्वक बदलाव देखने को मिला वो ये है कि कश्मीर के सचिवालय में तिरंगा लहराया गया ,जबकी अब तक कश्मीर का झंडा भी साथ में लहराया जाता था ,उधर सनिवार 20 अगस्त को राहुल गाँधी ने जब अपने 8 दलों के 14 सहयोगियों के साथ कश्मीर जाने का प्रयास किया तब तो उन्हें श्रीनगर एयर पोर्ट से वापस लौटा दिया गया। उधर सुश्री मायावती ने कहा कि बाबा साहब आंबेडकर शुरु से धारा 370 लगाने का विरोध किया था इसलिए बसपा ने 370 हटाने का समर्थन किया।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में ट्रम्प 22 जुलाई 5 अगस्त और 21 अगस्त को मध्यस्थता का स्टेटमेन्ट दिया, इस पर मोदी ने दो टूक शब्दों में बोल दिया कि ये द्विपक्षीय मामला है ,थर्ड देश हस्तक्षेप नही कर सकता । G-7 देशों की बैठक में भारत मेहमान देश के रूप में फ़्रांस में बुलाया गया ,वहां मोदी ट्रम्प की विशेष बैठक हुई उसमे मोदी ट्रम्प को ये समझाने में कामयाब हुए की पाकिस्तान और भारत 1947 तक एक ही देश थे ,भारत पाकिस्तान के साथ कई बार द्विपक्षीय आधार पर कई मसले सुलझा चूका है आगे भी भारत पाकिस्तान बैठक में शन्तिपूर्ण ढंग से वार्ता होगी ।
इधर रूस ने भी कह दिया की कश्मीर का धारा का 370 इशू(issue) उसका आंतरिक मामला था कशमीर में रुस कोई मध्यस्थता नही करेगा।
इधर राहुल गांधी के इस बयान पर कि "कश्मीर की हालात ख़राब है " इस बयान को आधार बनाकर पाकिस्तान ने UNO को चिट्ठी लिखी कि भारत का विपक्षी नेता मान रहा है कि कश्मीर जल रहा है, राहुल के इस बयान से भारत की जनता को बहूत कष्ट हुआ क्योंकि परोक्ष रूप से वो पाकिस्तान की सहायता कर रहे हैं , लोंगों को लगा कि जैसे कश्मीर मसले को नेहरू ने अपनी नीतियों से विवादित बनाया उसी तरह राहुल भी समस्या पैदा कर दी ।
कश्मीर के राज्यपाल ने 28 अगस्त को कश्मीर के लिए 50 हजार नौकरियां भरी जाएँगी और अत्यधिक विकास की बात की। पाकिस्तान इसी विकास से डर रहा है ,कि कहीं POK के नागरिक भी भारत में मिलने की जिद न करने लग जाये ।।
इधर पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख़ रसीद ने भारत पर अक्टूबर नवंबर तक जंग हो सकने का बयान दे रहे है साथ में न्यूक्लिअर वॉर की धमकी दे रहे है ,पाकिस्तान के इन बयानों के पीछे भी अंतर्राष्ट्रीय आधार पर कश्मीर को खड़ा करना है।
दुर्भाग्यपूर्ण ये है कि पाकिस्तान अपनी खस्ताहाल अर्थ व्यवस्था के बाद भी ,भारत से जंग का इच्छुक दीखता है ,भारत को मिली खुफिया जानकारी से ये आशंका है की पाकिस्तान कच्छ एरिया से अपने कमांडो भेज सकता है ,पाकिस्तान ने अपने गजनवी मिसाइल को बॉर्डर पर तैनात करने की तैयारी में लगा है,पाकिस्तान ने कराची एअरपोर्ट को 28 अगस्त से 31 अगस्त तक बन्द कर दिया ।
इधर उपराष्ट्रपति वेंकैय्या नायडू ने 28 अगस्त को पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा की भारत पर यदि किसी ने हमला करने की हिमाकत करता है तो ऐसा जवाब मिलेगा कि वो जिंदगी भर नही भूल पायेगा ।
पढ़ें कश्मीर का इतिहास और धारा 370 के बाद कश्मीर का पुनर्गठन इस लिंक से
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