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Physics Wallah (PW) और अलख पाण्डेय की सफलता की कहानी: कम फीस में JEE-NEET की बेहतरीन तैयारी कैसे संभव हुई?

  ​"सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि यह सालों के कड़े संघर्ष और अटूट संकल्प का परिणाम होती है। आज जब हम भारतीय शिक्षा जगत में एक 'क्रांति' की बात करते हैं, तो हमारे सामने एक ऐसे शिक्षक का चेहरा आता है जिसने साइकिल से कोचिंग जाने से लेकर देश के सबसे बड़े एड-टेक (Ed-tech) साम्राज्य 'फिजिक्स वाला' के निर्माण तक का सफर तय किया। यह कहानी केवल एक शिक्षक की नहीं, बल्कि उस जिद की है जिसने शिक्षा को व्यापार से ऊपर उठाकर हर गरीब छात्र के लिए सुलभ बना दिया।यह महान कार्य इसलिए करने में सफल हुए क्योंकि अलखपांडेय ने गरीबी को नजदीक से देखा था।उन्होंने देखा कि कैसे एक गरीब और मध्यमवर्ग का बच्चा बड़े बड़े  कोचिंग संस्थाओं में एडमिशन उनकी ज्यादा फीस होने के कारण नहीं ले पाते वो होनहार मेधावी होते है पर कोचिंग करने के लिए उनके पास यथा अनुरूप पैसे नहीं होते।        अलख पांडे ने गरीब बच्चों को सस्ती और अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से ही अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने बी.टेक इसलिए छोड़ी क्योंकि उनका मन पढ़ाई से ज्यादा पढ़ाने (टीचिंग) में लगता था और वह कॉलेज की पढ़ाई से संतु...

Raghav Kanheriya Moortikaar। राघव कनेरिया मूर्तिकार की जीवनी हिंदी में

 Raghav Kanheriya moortikar ki jivni----

राघव कनहेरिया मूर्तिकार की जीवनी हिंदी में---

राघव कनहेरिया  ( Raghav Kanheriya  )      का जन्म  19 मार्च 1936 में गुजरात के राजकोट जिला के सुदूर गांव अनिडा में हुआ था । वह 1960 के दशक की शुरुआत में एक   प्रयोगवादी मूर्तिकार के रूप में उभरे।

Raghav Kanheriya Moortikar

इन्होंने एम एस यूनिवर्सिटी बड़ौदा से कला का डिप्लोमा प्राप्त किया ,यहां पर इन्होंने प्रोफेसर शंखों चौधरी से कला की बारीकियों को समझा।उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए राघव कनहेरिया लंदन की ओर रूख किया वहां रॉयल कॉलेज लंदन  से  एम. ए. आर्ट से परास्नातक किया।

राघव कनहेरिया प्रारंभ से प्रयोगवादी मूर्तिकार थे ,वह मिट्टी के बर्तनों में चित्र बनाये,मिट्टी के बने मटकों के टुकड़ों को जोड़कर कई  अमूर्त संरचनाएं बनाईं।

  उन्होंने ढली हुई धातुओं के माध्यम से जुड़ाई द्वारा मशीन के बेकार पुर्जों का उपयोग करके आश्चर्यजनक शिल्प बनाये।
   
राघव कनहेरिया के प्रारंभिक मूर्तियों में हमे हेनरी मूर मूर्तिकार मारिनो मारिनी  मूर्तिकार का प्रभाव दिखता है।

1960 के दशक में वह मुम्बई एक स्क्रैप व्यवसायी वीरेंद्र शाह के स्टील फैक्ट्री में काम के लिए आमंत्रण मिला,यहां पर इन्होंने स्क्रैप के टुकड़ों के विभिन्न आकारों को जोड़कर वैल्डिंग करके कई संरचनाएं बनाईं ,जैसे कैक्टस ,पुरोहित आदि।
धीरे धीरे उनकी मूर्ति संरचनाओं में विकास हुआ 2014 से 2016 तक जो मूर्ति  संरचनाएं  बनाईं  वो पोलिश की हुई थीं।
 तीसरे चरण में उन्होंने स्टेनलेस स्टील की संरचनाएं बनाई जो बैल की थीं जिसको इन्होंने नंदी नाम दिया।
राघव कनहेरिया की प्रसिद्ध मूर्ति संरचनाएं--
■ कलोल करता बछड़ा

सुंदर सांड (टेराकोटा)

राजसी मुर्गा

■द बुल(कांस्य)

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