Bitcoin क्या है|कैसे काम करता है| कैसे कमाया जा सकता है?

 

Bitcoin क्या है|कैसे काम करता हैऔर कैसे कमाया जा सकता है?

बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है जिसे अंग्रेजी भाषा मे क्रिप्टो करेंसी कहते है क्रिप्टो करेंसी कई एक हैं उनमें से एक का नाम बिटकॉइन है ,बिटकॉइन एक आभासी मुद्रा है  जिसे आप 

छुकर या टटोल कर नहीं देख सकते हो। बिटकॉइन का न तो

  नोटों के रूप में या सिक्कों के रूप में लेन देन होता है  न ही  आप  बिटकॉइन को अपने रुपये रखने वॉलेट या पर्स या बटुआ  में  रख सकते हो जैसे  दूसरे नोट

Bitcoin क्या है|कैसे काम करता है| कैसे कमाया जा सकता है?

और सिक्के को पर्स में रखते हो ।

     Bitcoin सिर्फ कम्यूटर  नेटवर्किंग  से बने  एक  डिजिटल वॉलेट में रखे जा सकते हैं जिसमे बिटकॉइन मूल्यों के रूप में रखे जाते हैं जब बिटकॉइन को किसी दूसरे के पास भेजा जाता है तो भेजने जाने वाले व्यक्ति की अन्य जानकारी कोई चुरा नहीं पाता क्योंकि यह peer to peer ट्रांसेक्शन होता है हर लेन देन में एक नए ब्लॉक का निर्माण होता है जो पूरे कंप्यूटर नेटवर्क से जुड़े रहते है। 

बिटकॉइन का कोई एक मालिक नहीं है।यानी किसी एक व्यक्ति का स्वामित्व नहीं है।

बिटकॉइन को कंट्रोल करने के लिए कोई सेंट्रलाइज अथॉरिटी नहीं है।

कई अर्थ शास्त्रियों ने तो इसको बहुत ही खतरनाक बताया उन्होंने बिटकॉइन समेत सभी क्रिप्टो करेंसी को पोंजी स्कीम की तरह बताया।

थोड़ा सा पीयर तो पियर नेटवर्क के बारे में समझते है कि येक्या है ?

Peer to peer नेटवर्क क्या है-- पियर तो पियर सर्वर और क्लाइंट सर्वर दो प्रकार के होते हैं क्लाइंट सर्वर में एक सर्विस को accept करता  है फिर दूसरा सर्विस मुहैय्या करवाता है वहीं peer to peer network में एक ही कंप्यूटर से सर्विस accept भी की जाती है और यही कंप्यूटर सर्विस  मुहैय्या भी करवाता है ,इसमें क्लाइंट और सर्वर में विभेद नहीं होता बल्कि प्रत्येक नोड (node) सर्वर और क्लाइंट की तरह कार्य करता है।इसमें डेटा मैनेजमेंट (Data Mangement) centralised नहीं होता।

   बिटकॉइन(Bitcoin)शब्द का सर्वप्रथम  प्रयोग सन 2008 में सतोषी नाकोमाटो नाम के एक  सॉफ्टवेयर डेवलपर ने किया था।पर वास्तव में ये सतोषी नाकामाटो कौन है ये आज तक नहीं मालूम हो पाया है।

   उसने एक डॉक्यूमेंट पब्लिश किया।इस सतोषी नाकामाटो ने इस डॉक्यूमेंट में यह बताया कि पूरी दुनिया मे चल रही बैंकिंग व्यवस्था को कैसे बिटकॉइन करेंसी के माध्यम से  बदल(replace) किया जा सकता है।

बैंकिंग सिस्टम में हर एकाउंट के लेन देन पर  निगरानी रखने के लिए एक व्यवस्था कायम किया है और हर निकासी और जमा पर अपनी मोहर लगाता है।पर बिटकॉइन में ऐसी कोई केंद्रीकृत एजेंसी नहीं होती ।यह एक निश्चित एल्गोरिथ्म पर आधारित है ,पर इतने विशाल लेन देन को बहुत शक्तिशाली कम्यूटर की जरूरत पड़ती है। और इस कंप्यूटर के संचालन के लिए जो व्यक्ति अपना इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करते हैं वो बिटकॉइन की भाषा मे माईनर कहलाते हैं।

   सन 2009 में सर्वप्रथम पहली बार बिटकॉइन से लेनदेन की  की शुरुआत हुई। तब एक माइनर बिटकोईन ट्रांसेक्शन से रिवॉर्ड सिर्फ दो से तीन दिन में प्राप्त कर लेता था और आज सन 2021 को एक बिटकॉइन रिवॉर्ड के रूप में पाने के लिए एक साल का इंतजार भी करना पड़ सकता है।क्योंकि आज दुनिया भर में लाखों माईनर हो चुके हैं और खास बात ये है कि आप यदि माइनिंग के लिए कंप्यूटर रखते हो तो उसमें किसी एक ही प्रकार के क्रिप्टो करेंसी के लिए ही कर सकते हो।

       बिटकॉइन के लेन देन में किसी बैंक की जरूरत नहीं है साथ इस मुद्रा का प्रयोग बिना किसी मध्यस्थता के किया जा सकता है यानी जैसे हर देश मे नोट सरकार छापती है जो एक (अथॉरिटी) होती है नोट छापने के लिए और नोट के मूल्य के उतार चढ़ाव पर निगरानी के लिए एक सेंट्रलाइज्ड बैंक होता है जैसे भारत मे RBI है। पर बिटकॉइन का नियंत्रण  कोई बैंक नहीं करता इसमें ब्लॉकचैन तकनीकी का इस्तेमाल होता है एक बार यदि आपने किसी को  रुपये भेजे तो उसका एक अलग ब्लॉग बनेगा और जब निकाला तो उसका एक अलग ब्लॉग बनेगा और इस लेनदेन निकासी का पूरा का पूरा ब्यौरा एक ब्लॉक में दर्ज रहेगा और ये नए ब्लॉक पुराने ब्लॉक के फैले हुए जाल से एक जुड़ने के लिए जटिल कम्यूटर एल्लोग्रथिम (allogrithim) का इस्तेमाल होता है।

बिटकॉइन के लेन देन में किसी बैंक की जरूरत नहीं है  न ही आप डॉलर या रुपये विभिन्न देश की मुद्राओं की तरह क्रेडिट या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकतें हो।

बिटकॉइन के लेन देन में किसी बैंक की जरूरत नहीं है साथ

जब हम बैंक से ऑनलाइन  ख़रीददारी करते हैं या फिर बैंक से ऑनलाइन trasactions करते हैं तो हमें बैंक के प्रक्रिया को फॉलो करना होता है तब हम बैंक से पैसे का लेन देन कर पाते है और पूरे पैसे के निकासी का हिसाब बैंक एकाउंट में मौजूद रहता है ,जिससे ये पता लगाया जाता है कि कितने पैसे किन किन मदों में  खर्च किये गए। परंतु बिटकॉइन में ऐसा नहीं होता इसकी कंट्रोलिंग किसी बैंक के एकाउंट से नहीं होती ,बिटकॉइन का कोई मालिक नहीं होता इसलिए बिटकॉइन के रूप में किये गए सभी लेन देन का रिकॉर्ड किसी पब्लिक लेजर (public ledger) में होता है इसको ब्लॉक चैन (block chain)कहते 
हैं।
बिटकॉइन वॉलेट क्या है?

.हम लोग बिटकॉइन की खरीद फ़रोख़्त भी करते है इसके लिए एक यूनिक आई डी बनानी पड़ती है ,इसमें बिटकॉइन को इलेक्ट्रॉनिकली स्टोर भी कर सकते हैं।इसके लिए हमे वॉलेट का इस्तेमाल करना होता है वालेट कई प्रकार के होते है जैसे मोबाइल वॉलेट ,डेस्कटॉप वालेट,ऑनलाइन वॉलेट आदि इसमें से किसी एक का इस्तेमाल करके अपना एकाउंट बनाना होता है। इस वॉलेट को बनाने में हमको एक यूनिक एड्रेस दिया जाता है।जब बिटकॉइन खरीदते या बेचते है उस समय इस यूनिक आई डी वाले वॉलेट की आवश्यकता पड़ती है ,उस समय बिटकॉइन खरीदने पर यहीं स्टोर होती है ,बाद में बिटकॉइन के रूप में जितना इंडियन रुपया उस समय उस दिन उस टाइम होगा उतना कन्वर्ट होकर आपके बैंक एकाउंट में भी भेजा जा सकता है।बिटकॉइन लेन देन में एक बिटकॉइन एड्रेस का प्रयोग किया जाता है।

     बिटकॉइन की कीमत आज के दिन बहुत ज्यादा है जैसे हमे एक डॉलर खरीदने के लिए 70 रुपया देना पड़ रहा उसी तरह आज के डेट में एक बिटकॉइन को खरीदने के लिए  26 लाख देना पड़ेगा ,आपको ज्ञात हो 2009 में बिटकॉइन इतना सस्ता था कि व्यक्ति ने अपने घर बिटकॉइन से ऑनलाइन पिज़्ज़ा डिलीवर करवाया था ,क्योंकि उस समय उसकी कीमत मात्र .06 डॉलर ही थी।

     प्रतिदिन बिटकॉइन की कीमत तेजी से बढ़ रही है क्योंकि इसकी संख्या पहले से फिक्स कर दी गई है इसकी संख्या 21 मिलियन निर्धारित की गई है उसमें 13 मिलियन के करीब बिक चुके है। समय के साथ इसकी कीमत कम होगा।जब इसकी संख्या लगातार और कम हो जाएगी ये अनुमान लगाया गया है कि आखिरी बिटकॉइन सन 2110 निकलेगा जो बहुत दूर है।यदि रोजाना के उतार चढ़ाव को देखेंगे तो इसका मूल्य कभी बहुत ज़्यादा चढ़ जाता है कभी लुढ़ककर बहुत नीचे चला जाता है, बहुत ही अनिश्चय रहता है जिसमें पूंजी यदि लगाया गया तो। क्योंकि इस बिटकॉइन में कोई निश्चित नियामक बॉडी नहीं है बल्कि वैश्विक बाजार के उतार चढ़ाव और बिटकॉइन के वैश्विक ख़रीद फ़रोख़्त के कारण भी शेयर मार्केट की तरह इसका मूल्य तेजी से चढ़ता उतरता है।

   जरूरी नहीं कि आप करोङो रुपये मूल्य की एक बिटकॉइन ही खरीदें बल्कि आप उसके छोटे से भाग को भी ख़रीद सकते हो , बिटकॉइन के छोटे भाग को "सातोशी" कहते हैं। जैसे एक रुपये में सौ पैसे होते है यानी रुपये की सबसे छोटे मूल्य को एक पैसा कहते हैं उसी तरह एक बिटकॉइन में 10 करोङ  सातोशी(satoshi) होते है ,आप चाहे तो satoshi की ख़रीद फ़रोख़्त कर  सकतें है क्योंकि हर व्यक्ति सीधे एक बिटकॉइन को खरीदने में एक करोङ के आसपास का निवेश नही कर सकता। क्योंकि आज की डेट में 26 लाख से ऊपर है एक बिटकॉइन की कीमत और आपको जानकारी हो कि 2009 में एक बिटकॉइन की कीमत मात्र.06 डॉलर थी।

      रोज के बिटकॉइन की कीमत अलग अलग होती है ,आप धीरे धीरे सतोषी ही खरीदें ,यहां तक कि आप इसमें कम से कम कितना रुपया सौ रुपया भी निवेश कर सकते हैं आपको उतने अनुपात का सतोषी मिल जायेगा। बाद में जब आप देखें कि बिटकॉइन की कीमत में उछाल आया रहा है तब आप अपने यूनिक आई डी वाले इलेक्ट्रॉनिक  वॉलेट  रखे हुए सतोसी को बेंच सकते हैं।

   यदि आप कोई सामान बेच रहे हो तो खरीददार से डॉलर या रुपया  की जगह  बिटकॉइन में भी लेन देन कर सकते हो।जिससे आपके वालेट में बिटकॉइन एकत्र हो जाएगा।

    बिटकॉइन का बनाने का एक और तरीका होता है जिसे माइनिंग कहते हैं ,इसमें माईनर एक ट्रांसेक्शन के बाद एक बिटकॉइन सेवा शुल्क(रिवॉर्ड) के रूप में प्राप्त करता है। जैसे आप लोंगो ने payTM आदि वॉलेट से जब खरीददारी की होगी तो वो आपको  रिवॉर्ड में कुछ पॉइंट देते है ,आप उन पॉइंट का इस्तेमाल किसी नेक्स्ट ख़रीददारी में कर सकते है।उसी तरह इसमें माईनर को सर्विस चार्ज के रूप में एक बिटकॉइन ही मिल जाता है।

 बिटकॉइन(Bitcoin)माइनिंग क्या है--

     माइनिंग का सामान्य अर्थ खनन होता है खनन का मतलब है कि जैसे आप मानो की सोने की खान से सैकड़ों फिट उतरकर चट्टानों के बीच पतले तार के रूप में एकत्र सोने के अयस्क (ore) को निकालना फिर साफ कर प्रयोग में लाना। जिस प्रकार धीरे धीरे खान के अंदर का पूरा सोना एक दिन बाहर आ जाएगा इसी तरह आप जान चुके हो कि बिटकॉइन की संख्या फिक्स है 21 मिलियन है और धीरे धीरे कम हो रहे है उसी तरह  की 21 मिलियन की संख्या का पूरा प्रयोग  एक दिन हो जाएगा।
     खदान से सोना या अन्य धातु को निकालने की प्रक्रिया को माइनिंग कहते हैं और जहां नोट या सिक्के ढाले जाते हैं उसे मिंट(mint),बिटकॉइन बनाने को बिटकॉइन माइनिंग कहते हैं।
     माइनिंग का बिटकॉइन के रूप में जब प्रयोग होता है तो इसका अर्थ है कि एक उन्नत तकनीकी वाले कंप्यूटर के प्रयोग से एक बिटकॉइन का निर्माण, बिटकॉइन माइनिंग के बाद हुए ट्रांसेक्शन में जो शुल्क मिलता है वो बिटकॉइन के रूप में मिलता है।यह बिटकॉइन माइनिंग करने वाले व्यक्ति को उसके सेवा शुल्क  (reward)के रूप में मिलता है। आप इसको ऐसे भी समझो जब 2009 में बिटकॉइन की शुरुआत हुई थी तब
     माइनिंग करने के लिए उच्च प्रोसेसर क्षमता वाले कई कंप्यूटर की आवश्यकता पड़ती है ,क्योंकि जब एक बिटकॉइन की खरीद होती है तो उसका एक ब्लॉक बन जाता है जिसमे उसकी पूरी जानकारी छिपी होती है,यह एक बहुत कठिन गणितीय प्रणाली है जिसको पूरा करने के लिए लाखों कैलकुलेशन प्रति सेकंड करना होता है उसके बाद ही ट्रांसेक्शन कन्फर्म हो पाता है।
  इस जटिल प्रक्रिया के कारण कोई हैकर भी हैक नहीं कर सकता ये ब्लॉक दूसरे ब्लॉक से जुड़ता है ,इसमें काम्प्लेक्स अल्लोग्रथिम का प्रयोग होता है जो साधारण कंप्यूटर के बस की बात नहीं होती है।
माइनर्स की संख्या  प्रतिदिन बढ़ती जा रही है 
चीन ,रूस ,अमेरिका ,जापान में हजारों  लोगों ने बहुत शक्तिशाली कंप्यूटर को बड़े बड़े हाल में रखकर हार्डवेयर सेटअप कर रखा है और माइनिंग का काम करते हैं।
इस प्रक्रिया को पूरा करने में अत्यधिक बिजली खर्च होती है
   इस प्रकार के कुछ माईनर बहुत अधिक बिटकॉइन बना रहे है ,दुनिया भर में पचास हजार माइनर होंगे जो देखते है कि कहां से कैसे बिटकॉइन की खरीद हुई ,इन माईनर का काम सही से पूरी प्रक्रिया को होने में सहायता करना जिससे नया ब्लॉक बन जाये और कोई हैकर भी सेंध न लगा पाए।जब एक बिटकॉइन का ख़रीद पूरी तरह हो जाता है और उसमें जिस व्यक्ति के कंप्यूटर द्वारा ये कार्य संपादित होता है उसको उसी अनुपात में बिटकॉइन मिल जाती है ,जब इस समय हर क्षण हजारों लोग बिटकॉइन से लेन देन कर रहे हैं तब किसी एक माइनर को ये सौभाग्य प्राप्त होता है कि उसके कंप्यूटर की सहायता ली गई। इस कॉम्पटीशन में एक ब्लॉक माइन होता है तो करीब पंद्रह मिनट में एक माइनर को सफलता मिल पाती है।  
    इस प्रकार कैलकुलेशन में ये रिजल्ट निकलाहै कि 2016-2020 तक रोज 1800 बिकॉइन की माइनिंग होगी तो 2020 से 2024 तक रोज 900 बिटकॉइन निकलेंगी,इस तरह हर साल इनको संख्या घटती जाएगी और घटते घटते 2140 तक कोई भी बिटकॉइन माइनिंग के लिए नहीं रह पाएगी।
  इस प्रक्रिया को पूरा करने में अत्यधिक बिजली खर्च होती है।
बिटकॉइन माइनिंग का उद्देश्य बिटकॉइन नोड को सुरक्षित रखना और नेटवर्क को छेड़छाड़ से बचाना है।

बिटकॉइन में निवेश कैसे करें-

बिटकॉइन में निवेश के लिए आपको कुछ वेबसाइट या उनके ही app की सहायता लेनी पड़ेगी ,आपको उनके वेबसाइट में कुछ डाक्यूमेंट्स की जानकारी देनी होगी तब आप उसमे रजिस्टर हो पाओगेडाक्यूमेंट्स जिनकी जानकारी देनी होगी  वो इस प्रकार हैं।
 1-पैन कार्ड,
  2-आधार कार्ड,
  3-वोटर आई डी कार्ड,
   4-फ़ोन नंबर 
    5-बैंक एकाउंट
भारत मे प्रसिद्ध वेबसाइट का नाम है Zebpay आप इसके वेबसाइट या मोबाइल app में जाकर खुद को रजिस्टर करेंगे ,जो आपको वेब एड्रेस देगा ,जिसके माध्यम से आप खरीद फरोख्त कर सकते हो बिटकॉइन की।
दूसरी अन्य वेब साइट है 
Unocoin तथा 
 coins witch kuber भी हैं आप इन वेबसाइट की सहायता से भी एनरोल्ड हो सकते हो।

बिटकॉइन (Bitcoin)से लाभ-

  • बिटकॉइन के लेन देन में ट्रांसेक्शन चार्ज बहुत ही कम लगता है ,बनिस्बत जब आप किसी भी प्रकार के प्लास्टिक कार्ड जैसे डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड से कोई खरीददारी  करते हो तो उसमें भी कुछ रकम कट जाती है।
  • इसमें किसी भी प्रकार के लेन देन पर सरकार को नहीं बताना पड़ता ।
  • बिटकॉइन से दुनिया भर में कहीं से कोई सामान खरीद सकते हो ।ट्रांसक्शन शुल्क बहुत मामूली है जैसे मानलीजिए  आप RTGS से पैसा दूसरे के पास भेजते हो तो आपको एक प्रतिशत शुल्क कटवाना होता है , UPI से लेन देन में भी 0.2 पैसा कट जाता है।
  • बिटकॉइन में long term  निवेश करके आप कहीं ज्यादा पैसा कमा सकते हो , क्योंकि इसका मूल्य लगातार बढ़ ही रहा है।

    बिटकॉइन(Bitcoin)से हानि--

  • बिटकॉइन से लेन देन हर जगह accept नहीं होता ,सिर्फ कुछ कम्पनी ही बिटकॉइन के लेन देन को स्वीकार करतीं हैं।
  • किसी भी देश की सरकार बिटकॉइन या किसी भी क्रिप्टोकरेंसी को अपने देश मे स्वीकार नहीं करती इसलिए कभी भी जब उसकी इकॉनमी में कोई समस्या आएगी तो कानून बनाकर बैंक से पैसे निकालकर bitcoin खाता वाले एकाउंट में जाने से रोक सकतीं है।
  • इस मे सरकार की कोई भूमिका नहीं होती ,यदि किसी कारण आपका invest किया गया रुपया हैकर्स के द्वारा हैक कर भी लिया जाए तो सरकार किसी फ्रॉड में कोई मदद नहीं करेगी।
  • यह बहुत ही परिवर्तनकारी है तेजी से बदलने वाली मुद्रा है सिर्फ 30 सेकंड में ही मूल्य कम या ज्यादा हो जाता है यदि किसी कंपनी से कोई सामान किसी मूल्य पर खरीदा और बदले में बिटकॉइन भेजते  है  और  उतार चढ़ाव के कारण बिटकॉइन का मूल्य बहुत कम हो सकता है।

 भारत सरकार की क्या पॉलिसी है --

कोई भी सरकार नहीं चाहती कि किसी भी प्रकार के क्रिप्टो करेंसी उसके देश के सीमा क्षेत्र में चलन में हो  क्योंकि उस देश को टैक्स कम मिल पाता है साथ मे बहुत से लोग जब आपस मे इसी तरह का लेन देन करने लगेंगे तो उनको सरकार को व्यापारियों के आय की सही जानकारी नही हो पाएगी ,साथ मे इस तरह के मुद्राएं स्मगलर और आतंकवादी ड्रग्स सोना चांदी की तस्करी हथियार खरीदने में करेंगें।
1)फरवरी 2013 को RBI ने बिटकॉइन पर प्रेस रिलीज जारी की।
2)5 दिसंबर 2017 को पुनः सावधानी के  लिए बैंकों को निर्देश दिए।
3)मार्च 2018 में रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने सारे बैंक और फाइनेंसियल इंस्टीट्यूट को एक सर्कुलर जारी किया  कि वह उन व्यक्तियों को बैंकिंग सेवाएं बन्द कर दे जो किसी भी प्रकार के क्रिप्टो करेंसी में लेन देन करता है।
 इसलिए क्रिप्टो करेंसी में लेन देन करने वाली संस्थाएं सुप्रीम कोर्ट चली गईं वहां दो साल मुकदमा चला, और मार्च 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया कि RBI को देश भर के बैंकों को क्रिप्टो करेंसी में लेन देन करने वालों के लिए बैंकिंग सेवाएं रोकना मूल अधिकारों को कम करता है इसलिए ये सर्कुलर या नोटिस अवैध है।
 जब ऊपर वाला मैटर सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था तब ही सरकार ने क्रिप्टो करेंसी पर बैन लगाने के लिए क़ानून बनाने के लिए एक प्रस्ताव दिया था पर उसमे कोई आगे की कार्यवाही नहीं हुई।
सरकार ने मार्च 2021 में क्रिप्टो करेंसी पर रेगुलेशन के लिए फिर एक ड्राफ्ट तैयार किया इसका नाम है Crypto Currency Regulation of Official Digital Currency in India Bill 2021
अभी  तक कि कार्यवाही में इसे सिर्फ  लोक सभा प्रस्तुत भर किया गया है ,पास नहीं हो पाया, कोरोना के कारण फ़िलहाल प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई इस बिल में क्या क्या है ये नहीं मालूम क्योंकि अभी ये पब्लिक के लिए उपलब्ध नहीं है।
पर सरकार की क्या मंशा है ये खुला नहीं है ,निर्मला सीतारामन वित्तमंत्री की बयानों से ऐसा लग रहा है कि सरकार इस पर पूरी तरह बैन नहीं लगाएगी बल्कि सिर्फ इसके लिए कई कठोर रेगुलेशन बना सकती है जिससे क्रिप्टो करेंसी का अधिक विस्तार आम पब्लिक में न हो सके।
अपने इंडिया में अभी आप क्रिप्टो करेंसी से कोई सामान नहीं खरीद सकते हो जैसा कि कुछ देशों में हो रहा है ,आप अपने वॉलेट से peer to peer transfer के तहत दुनिया भर में कहीं भी ट्रांसफर कर सकते हैं।

खुल गया एक बैंक-

भारत मे जयपुर में पहला बिटकोईन के लेन देन औऱ सहायता प्रचार प्रसार के लिए एक बैंक भी खुल गया है इसका नाम है UNICAS यह बैंक पहली शाखा है इसी तरह की 14 और शाखाएं देश भर में खुलने की संभावना है ।इन बैको में वॉलेट डाउन लोड करना ,बिटकॉइन को खरीदना और बेचना सिखाया जाएगा।एक बड़ा सा हॉल होगा जिसमें कुछ नए मेहमानों को educate किया जाएगा।

निष्कर्ष--

इस तरह आपको आज बिटकॉइन(Bitcoin)की पूरी जानकारी दी गई है ,यदि आप कुछ रुपये लगाकर स्मार्टली निवेश करते हो तो आप लाभ भी पा सकते हो।
          ध्यान रहे लंबा और अधिक समय का निवेश न करें ,क्योंकि फ़िलहाल INDIAN के लिए थोड़ा खतरनाक हो सकता है, जब तक सरकार की स्पष्ट नीति सामने नहीं आती।

Comments

  1. Bitcoin के बारे मे बहुत सा confusion था, अब समझ मे आयी बहुत सी बातें।

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