अंध भक्ति किसे कहते हैं जानिए कौन होते हैं अंधभक्त

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  अंधभक्त किसे कहते हैं? अंध भक्त का शाब्दिक अर्थ- अंधभक्त का तात्पर्य हिन्दी शब्दावली के अनुसार वो भक्त जो आंख बंद कर दुसरों का अनुसरण करें। अनुयायी जो अपने नेता पर अधिक भरोसा करे । और  अपने विवेक का इस्तेमाल बिल्कुल न करे।     अन्ध शब्द के अन्य मिश्रित शब्द अंध प्रेम-Blind love अंध भक्त-Blind supporter अंध विश्वास-  Superstition ,Blind Faith अंध राष्ट्रवाद -Blind Patriotism अंध-Blind भक्त- Worshiper भक्ति शब्द  का प्रयोग ईश्वर भक्ति ,मातृ भक्ति,पितृ भक्ति ,राष्ट्र भक्ति ,  आदि भक्त वो हैं जो   जो भक्ति करते है जो  किसी में श्रद्धा और आस्था और  विश्वास रखतें हैं।  जैसे -शिव भक्त , कृष्ण भक्त ,देवी भक्त ,राष्ट्र भक्त आदि हैं। जो भक्ति करते है अंधभक्त का तात्पर्य किसी भी व्यक्ति पर ऑंखमूँदकर विश्वास करने वाला अनुयायी। जिसमें व्यक्ति अपने विवर्क और तर्क का प्रयोग न करे। निरीश्वरवादी बौद्ध अन्य धर्म अनुयाइयों के धर्म ग्रंथ में अकल्पनीय बातों का खंडन करते है ,वो हिन्दू ,मुस्लिम ,ईसाइयों के धर्म ग्रथों में दिए गए कई कथानकों का खंडन करते है और कपोल कल्पित कहते हैं  और इन धर्मों में आस्था रख

हनुमान जी की आरती Hanuman ji ki Arti

हनुमान जी की आरती-

हनुमान जी की आरती Hanuman ji ki Arti
(पंचमुखी हनुमान जी)



आरती: हनुमान जी की


आरती कीजै हनुमान लला की,दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरिवर कांपै,रोग दोष जाके निकट न झाँपै।

अंजनि पुत्र महा बलदाई,संतन के प्रभु सदा सहाई।

दे बीरा रघुनाथ पठाये,लंका जारि सिय सुध लाये।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई ,जात पवनसुत बार न लाई।

लंका जारि असुर संहारे,सियारामजी के काज सँवारे।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे,आनि सजीवन प्राण उबारे।

पैठि पताल तोरि जम-कारे, अहिरावन की भुजा उखारे।

बाएं  भुजा असुर दल मारे,दाहिनी भुजा संतजन तारे।

सुर नर मुनिजन आरती उतारें,जै जै जै हनुमान उचारें।

कंचन थार कपूर लौ छाई, आरती करत अंजना माई।

जो हनुमान जी की आरती गावै ,बसि बैकुंठ परम पद पावै।

लंक विध्वंस किये रघुराई।तुलसीदास स्वामी कीरत  गाई।

आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।



 Hanuman Aarti (English) 


Aarti kije hanuman lala ki 

dusht dalan ragunath kala ki 

aarti kije hanuman lala ki

 dusht dalan ragunath kala ki 

aarti kije hanuman lala ki

 jake bal se girivar kaanpe 

rog dosh ja ke nikat na jhaanke 

anjani putra maha baldaaee

 santan ke prabhu sada sahai 

aarti kije hanuman lala ki

 dusht dalan ragunath kala ki

 aarti kije hanuman lala ki 

de beera raghunath pathaaye 

lanka jaari siya sudhi laaye 

lanka so kot samundra-si khai

 jaat pavan sut baar na lai 

aarti kije hanuman lala ki 

dusht dalan ragunath kala ki 

aarti kije hanuman lala ki 

lanka jaari asur sanhare

 siyaramji ke kaaj sanvare

 lakshman moorchhit pade sakaare 

aani sajeevan pran ubaare 

aarti kije hanuman lala ki 

dusht dalan ragunath kala ki

 aarti kije hanuman lala ki 

paithi pataal tori jam-kaare 

ahiravan ke bhuja ukhaare 

baayen bhuja asur dal mare 

daahine bhuja santjan tare 

aarti kije hanuman lala ki

 dusht dalan ragunath kala ki 

aarti kije hanuman lala ki sur nar muni aarti utare

 jai jai jai hanuman uchaare

 kanchan thaar kapoor lau chhaai 

aarti karat anjana maai 

aarti kije hanuman lala ki 

dusht dalan ragunath kala ki 

aarti kije hanuman lala ki

 jo hanumanji ki aarti gaave

 basi baikunth param pad pave 

lank bidhwansh kinhi raghurai 

tulsi das swami aarti gaayi

 aarti kije hanuman lala ki 

dusht dalan ragunath kala ki 

aarti kije hanuman lala ki 

dusht dalan ragunath kala ki।

 aarti kije hanuman lala ki।



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