I B का full form है--
Intelligence BUREAU
इंटेलिजेंस ब्यूरो की स्थापना और गठन--
आई बी देश की अन्य ख़ुफ़िया एजेंसीय और पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देती है जिससे समय से पूर्व प्रशासन सामान्य जन को अप्रिय घटनाओं से बचाने के लिए आवश्यक कार्यवाही कर सके ।
भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी की गिनती दुनिया के पुरानी ख़ुफ़िया एजेंसीय में होती है , शुरुआत में इस ख़ुफ़िया एजेंसीय को देश की आंतरिक और बाह्य ख़ुफ़िया तंत्र के रूप में कार्य करना होता था,IB का गठन 1887 में ब्रिटिश सरकार ने अफगानिस्तान पर तैनात रुसी सैनिकों पर नज़र रखने के लिए किया था,1947 में इसे भारत सरकार ने फिर से संगठित किया।
ये एजेंसीय 1947 से गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय ख़ुफ़िया ब्यूरो के तौर पर नई भूमिका मिली है 1868 में इसे दो भागों में बाँट दिया गया और आंतरिक सूचना एकत्रण की जम्मेदारी आई बी के पास रह गई।
,इस ख़ुफ़िया ब्यूरो में ज्यादातर पुलिस सेवा (IPS) एवं सेना के कर्मचारियों को शमिल किया जाता है,ख़ुफ़िया ब्यूरो को डायरेक्टर (DIB) हमेशा भारतीय पुलिस सेवा का एक अधिकारी होता है, इस सेवा के कार्यो को अति गोपनीय रखा जाता हाउ ,जिसके कारण इसकी गतिविधियों को सामान्यता कोई नही जानता।
आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए आई बी पूरे देश के राज्य पुलिस के संपर्क में रहती है और उनमे समन्वय स्थापित करती है,आई बी को आतंकी गतिविधियॉ कम करने मिश्रीत सफलता मिली है20008 में IB ने मुम्बई हमले से पूर्व समुद्र द्वारा आतंकियों के प्रवेश की सूचना दी थी।
आई बी संदिग्ध फ़ोन नंबर टेप कर सकता है और अन्य दुर्भावना पूर्ण संगठनों के email की भी निगरानी कर सकता है।
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इंटेलिजेंस ब्यूरो की स्थापना और गठन--
आई बी देश की अन्य ख़ुफ़िया एजेंसीय और पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देती है जिससे समय से पूर्व प्रशासन सामान्य जन को अप्रिय घटनाओं से बचाने के लिए आवश्यक कार्यवाही कर सके ।
भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी की गिनती दुनिया के पुरानी ख़ुफ़िया एजेंसीय में होती है , शुरुआत में इस ख़ुफ़िया एजेंसीय को देश की आंतरिक और बाह्य ख़ुफ़िया तंत्र के रूप में कार्य करना होता था,IB का गठन 1887 में ब्रिटिश सरकार ने अफगानिस्तान पर तैनात रुसी सैनिकों पर नज़र रखने के लिए किया था,1947 में इसे भारत सरकार ने फिर से संगठित किया।
ये एजेंसीय 1947 से गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय ख़ुफ़िया ब्यूरो के तौर पर नई भूमिका मिली है 1868 में इसे दो भागों में बाँट दिया गया और आंतरिक सूचना एकत्रण की जम्मेदारी आई बी के पास रह गई।
,इस ख़ुफ़िया ब्यूरो में ज्यादातर पुलिस सेवा (IPS) एवं सेना के कर्मचारियों को शमिल किया जाता है,ख़ुफ़िया ब्यूरो को डायरेक्टर (DIB) हमेशा भारतीय पुलिस सेवा का एक अधिकारी होता है, इस सेवा के कार्यो को अति गोपनीय रखा जाता हाउ ,जिसके कारण इसकी गतिविधियों को सामान्यता कोई नही जानता।
आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए आई बी पूरे देश के राज्य पुलिस के संपर्क में रहती है और उनमे समन्वय स्थापित करती है,आई बी को आतंकी गतिविधियॉ कम करने मिश्रीत सफलता मिली है20008 में IB ने मुम्बई हमले से पूर्व समुद्र द्वारा आतंकियों के प्रवेश की सूचना दी थी।
आई बी संदिग्ध फ़ोन नंबर टेप कर सकता है और अन्य दुर्भावना पूर्ण संगठनों के email की भी निगरानी कर सकता है।
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