घाटमपुर की लोकप्रिय विधायिका सरोज कुरील की जीवनी।Biography of Saroj Kureel MLA Ghatampur

 

घाटमपुर की लोकप्रिय विधायिका सरोज कुरील की जीवनी

​सरोज कुरील घाटमपुर (कानपुर नगर) विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान विधायिका हैं, जो अपना दल (सोनेलाल) और भाजपा गठबंधन का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके जीवन का सफर एक साधारण गृहिणी और अधिवक्ता से लेकर विधानसभा तक पहुँचने और जनता की सेवा करने की प्रेरणादायी कहानी है।सरोज कुरील जनता से एक दिन अपने  घाटमपुर आवास में मिलती है और विभिन्न समस्याओं के लिए प्रार्थनापत्र लेती है और समस्याओं के निराकरण के लिए अधिकारियों और विभागीय सचिव से मिलकर निराकरण  करती हैं।

घाटमपुर की लोकप्रिय विधायिका सरोज कुरील की जीवनी

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

​सरोज कुरील का जन्म 13 जुलाई, 1971 को उन्नाव में हुआ था। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन (स्नातकोत्तर) के साथ-साथ एलएल.बी. (LL.B.) की पढ़ाई पूरी की। पेशे से वकील होने के कारण उन्हें कानून और समाज की बुनियादी समस्याओं की गहरी समझ थी। उनका विवाह सरकारी सेवा में कार्यरत सत्य प्रकाश जी से हुआ, जो जल निगम में चीफ इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनके दो बेटे हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और शुरुआत

​सरोज कुरील का ससुराल पक्ष राजनीतिक रूप से बेहद प्रतिष्ठित रहा है। वह घाटमपुर के पूर्व सांसद और दिग्गज नेता ज्वाला प्रसाद कुरील की बहू हैं, जो 1977 में जनता पार्टी से सांसद रहे थे। इसी राजनीतिक विरासत से प्रेरित होकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। राजनीति की शुरुआत उन्होंने स्थानीय स्तर पर की और वह निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख भी चुनी गईं। ज्वाला प्रसाद कुरील को 1977 से घाटमपुर की जनता बेहद ईमानदार नेता के रूप में देखती  और सुनती आई है।

संघर्ष का दौर: कब हारीं और कैसे सीखीं?

​सरोज कुरील की राजनीतिक राह आसान नहीं रही। जीत का स्वाद चखने से पहले उन्हें लंबे समय तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा:

  • 2012 का चुनाव: उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) के टिकट पर घाटमपुर सीट से अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। बेहद करीबी मुकाबले में वह मात्र 700 वोटों के अंतर से चुनाव हार गईं।घाटमपुर विधानसभा चुनाव (2012) में जब बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सरोज कुरील चुनाव हारी थीं, तब समाजवादी पार्टी (SP) के इंद्रजीत कोरी ने लगभग 19,700 (सटीक रूप से 19,640) वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।
  • 2017 का चुनाव: उन्होंने दोबारा बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भाजपा की लहर में उन्हें तत्कालीन प्रत्याशी कमल रानी वरुण से हार का सामना करना पड़ा और वह दूसरे स्थान पर रहीं।2017 के घाटमपुर विधानसभा चुनाव में भाजपा की कमल रानी वरुण (कमल नलीवर) को 92,776 वोट मिले थे।

    ​इस चुनाव में बसपा की उम्मीदवार सरोज कुरील को 47,598 वोट मिले थे, जिसके कारण वह 45,178 वोटों के अंतर से चुनाव हार गई थीं।

​इन लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और घाटमपुर की जनता के बीच लगातार सक्रिय रहकर उनके सुख-दुख में भागीदारी निभाती रहीं।

2022 की ऐतिहासिक जीत: कैसे बनीं विधायिका?

​साल 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा राजनीतिक मोड़ आया। उन्होंने बसपा छोड़कर भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) का दामन थाम लिया। गठबंधन के तहत उन्हें घाटमपुर सुरक्षित सीट से मैदान में उतारा गया। भाजपा ने इस सीट पर अपनी दावेदारी छोड़कर अपना दल को दे दी थी और अपना दल चीफ अनुप्रिया पटेल ने सरोज कुरील को टिकट दी।

​लगातार क्षेत्र में किए गए संघर्ष और जनता से जुड़ाव का फल उन्हें मिला। उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार भगवती प्रसाद सागर को 14,474 वोटों के बड़े अंतर से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।

घाटमपुर कस्बे के लिए विकास कार्य और जनता से जुड़ाव

​वर्तमान में सरोज कुरील साकेत नगर, कानपुर में रहती हैं, लेकिन उनका अधिकतर समय घाटमपुर विधानसभा के ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बीतता है। अपनी विधायकी के दौरान उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर काम किया है:

  1. सड़क और बुनियादी ढांचा: घाटमपुर कस्बे और ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण करवाया।
  2. बिजली और पानी: ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और पेयजल किल्लत को दूर करने के लिए हैंडपंप तथा ट्यूबवेल की व्यवस्था करवाई।
  3. जनता से सीधा संवाद: वह नियमित रूप से 'जनता दरबार' लगाती हैं, जहाँ लोग अपनी समस्याओं को लेकर सीधे उनसे मिलते हैं। वह एक सुलभ और व्यावहारिक नेता के रूप में जानी जाती हैं।
  4. . मड पंप स्थापना और जलभराव का स्थायी समाधान (रेलवे लाइन अंडरपास योजना):

    घाटमपुर कस्बे की सबसे पुरानी और गंभीर समस्याओं में से एक रेलवे पटरी के नीचे होने वाला भारी जलभराव था। बरसात के दिनों में अंडरपास और आस-पास का इलाका पूरी तरह डूब जाता था, जिससे पूरा कस्बा टापू बन जाता था। विधायिका सरोज कुरील ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और रेल मंत्रालय तथा स्थानीय प्रशासन से समन्वय स्थापित कर रेलवे पटरी के नीचे आधुनिक 'मड पंप' (कीचड़ और पानी खींचने वाले विशेष पंप) की स्थायी व्यवस्था करवाई। इस कदम से कस्बे की सुचारू जल निकासी संभव हुई और वर्षों से जलभराव की मार झेल रहे स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों को बहुत बड़ी राहत मिली, जिसकी मीडिया में भी काफी सराहना हुई।

    5. घाटमपुर बस स्टैंड का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण:

    कस्बे के विकास और यात्रियों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने लंबे समय से उपेक्षित पड़े घाटमपुर बस स्टैंड की कायाकल्प परियोजना को पूरा कराया। इसके लिए उन्होंने स्वयं परिवहन मंत्री से मुलाकात कर बजट और मंजूरी पर जोर दिया। हाल ही में इस अत्याधुनिक बस स्टैंड के सुंदरीकरण और नवीनीकरण कार्य का लोकार्पण किया गया, जिससे अब यात्रियों को बैठने, छांव और साफ-सफाई की बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। यह कस्बा वासियों के लिए एक बड़ी सौगात साबित हुआ है।

    6. महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य कैंपों का संचालन:

    चूंकि वह अपना दल (सोनेलाल) के राष्ट्रीय महिला मंच की प्रभारी भी हैं, इसलिए उन्होंने घाटमपुर विधानसभा में महिलाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया है। ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए उन्होंने समय-समय पर बड़े चिकित्सा शिविरों (Health Camps) का आयोजन करवाया, जहाँ गरीब परिवारों को मुफ्त दवाइयाँ और कानूनी परामर्श (वकील होने के नाते) उपलब्ध कराया गया। उनके इस सामाजिक सरोकार वाले कार्य ने उन्हें महिलाओं के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है।

7.इसके अलावा सरोज कुरील के प्रयासो से कटरी काटर  मऊनखत गांव की जमीन में बहुत बड़ा सोलर फॉर्म बनने जा रहा है यह लगभग 150 एकड़ क्षेत्रफल में बनेगा ,इसके द्वारा ग्रीन एनर्जी बनेगी इस बिजली को घाटमपुर और आसपास के गांवों में त्वरित विद्युत आपूर्ति होगी।विधायक सरोज कुरील के प्रयासों से घाटमपुर के काटर (कटरी) गांव में लगभग 160 एकड़ (64 से 65 हेक्टेयर) जमीन पर वृहद सोलर पावर पार्क बनने जा रहा है।

​इस परियोजना से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • लागत और क्षमता: लगभग ₹176 करोड़ से ₹200 करोड़ की लागत से बनने वाले इस सोलर प्लांट की क्षमता 35 से 36 मेगावाट (MW) होगी।
  • निर्माण: इसे उत्तर प्रदेश नेडा (NEDA) की देखरेख में नोएडा की वेदू इंफ्रा कंपनी द्वारा तैयार किया जा रहा है।
  • लाभ: इस प्लांट से बनने वाली ग्रीन एनर्जी स्थानीय क्षेत्र में ही सप्लाई की जाएगी, जिससे घाटमपुर और आसपास के करीब 70 गांवों को बेहतर बिजली मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

जनता की पसंद और रेटिंग

​घाटमपुर कस्बे और ग्रामीण जनता के बीच सरोज कुरील की छवि एक 'जमीन से जुड़ी और गंभीर' नेत्री की है।

  • पसंद करने के कारण: जनता उन्हें इसलिए पसंद करती है क्योंकि वह आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं और उनमें कोई राजनीतिक अहंकार नहीं दिखता। एक महिला और अधिवक्ता होने के नाते वह महिलाओं की समस्याओं और कानूनी अड़चनों को बेहतर ढंग से सुलझाती हैं।
  • जनता की रेटिंग: स्थानीय फीडबैक और उनके कार्यकाल के कार्यों के आधार पर घाटमपुर की जनता उन्हें 10 में से 7.5 से 8 की मजबूत रेटिंग देती है। हालांकि, देहाती क्षेत्र होने के कारण रोजगार और स्थानीय विकास को लेकर जनता की अपेक्षाएं हमेशा बनी रहती हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए वह लगातार प्रयासरत हैं।

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