सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक सभ्यता अंतर।Diffrence Between Indusvalley civilization and Vaidik Civilization

 सैन्धव सभ्यता और वैदिक सभ्यता में अंतर:

सिंधुसभ्यता और  वैदिक सभ्यता में अंतर


सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक काल भारतीय इतिहास के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, लेकिन इनकी प्रकृति, समाज और जीवनशैली में गहरा अंतर है।
1. शहरी बनाम ग्रामीण जीवन
सिंधु सभ्यता एक नगरीय सभ्यता थी। यहाँ के शहर (जैसे हड़प्पा और मोहनजोदड़ो) ग्रिड प्रणाली पर आधारित थे, जहाँ पक्की ईंटों के मकान और उन्नत जल निकासी व्यवस्था थी। इसके विपरीत, वैदिक सभ्यता मुख्य रूप से ग्रामीण थी। आर्यों का जीवन अस्थाई था और वे घास-फूस या लकड़ी के घरों में रहते थे।
2. आर्थिक आधार
सिंधु निवासी व्यापार और वाणिज्य पर अधिक निर्भर थे। उनका मेसोपोटामिया जैसी विदेशी सभ्यताओं से व्यापारिक संबंध था। कृषि भी उन्नत थी, लेकिन अर्थव्यवस्था का केंद्र शहर थे। वैदिक काल की अर्थव्यवस्था पशुपालन और कृषि पर टिकी थी। ऋग्वैदिक काल में 'गाय' सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति मानी जाती थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में खेती मुख्य व्यवसाय बन गई।
3. धार्मिक दृष्टिकोण
सिंधु लोग मूर्ति पूजा और मातृशक्ति के उपासक थे। वहां से पशुपति शिव, मातृदेवी और लिंग-योनि की मूर्तियां मिली हैं। वैदिक धर्म यज्ञ और मंत्रोच्चार पर आधारित था। आर्य इंद्र, अग्नि और वरुण जैसे प्राकृतिक देवताओं की स्तुति करते थे और वे मूर्ति पूजा के बजाय आहुति देने में विश्वास रखते थे।
4. युद्ध और शांति
सिंधु सभ्यता के अवशेषों में हथियारों का अभाव मिलता है, जिससे पता चलता है कि वे एक शांतिप्रिय व्यापारिक समुदाय थे। आर्यों के पास उन्नत रथ और लोहे के हथियार (उत्तर वैदिक काल में) थे। वे युद्ध कौशल में निपुण थे, जिसका वर्णन ऋग्वेद के 'दशराज्ञ युद्ध' में मिलता है।
5. लेखन और भाषा
सिंधु लिपि चित्रात्मक (Pictographic) थी, जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। वहीं, वैदिक ज्ञान संस्कृत भाषा पर आधारित था। यह मूल रूप से 'श्रुति' (सुनकर याद रखना) परंपरा पर टिका था, जिससे बाद में वेदों की रचना हुई।
6. सामाजिक संरचना
सिंधु समाज में वर्ग विभाजन संभवतः व्यवसाय (व्यापारी, श्रमिक, पुरोहित) के आधार पर था और वहां मातृसत्तात्मक होने के संकेत मिलते हैं। वैदिक समाज पितृसत्तात्मक था, जहाँ परिवार का मुखिया पुरुष होता था। धीरे-धीरे वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) कठोर हो गई।
निष्कर्ष
जहाँ सिंधु सभ्यता अपनी भौतिक प्रगति और शहरी नियोजन के लिए जानी जाती है, वहीं वैदिक सभ्यता ने भारत को दार्शनिक, भाषाई और आध्यात्मिक आधार प्रदान किया।

सैन्धव सभ्यता में वैदिक संस्कृति से तुलना करने पर कई तथ्य ऐसे मिलते है जो दोनो जगह में अलग अलग थे दोनो में असमानता थी।

1)सिंधु घाटी सभ्यता में दुर्ग के अवशेष मीले है जबकि वैदिक सभ्यता के लोंगों के पक्के आवास के सबूत नही हैं वैदिक जन बांस और घासफूस के घरों में रहते थे।

2) वैदिक सभ्यता के लोंगो को लोहे ,सोने चांदी धातुओं  का ज्ञान था जबकि सैन्धव सभ्यता के लोग लोहे से अपरिचित थे।

3)वैदिक सभ्यता के लोग अश्व से परिचित थे परंतु अभी तक ये  शोध के आधार पर ज्ञात है कि सैन्धव लोग घोड़े से अपरिचित थे।

4) वेदों में व्याघ्र का तथा हांथी का उल्लेख नहीं है जबकि सैन्धव मुद्रा में व्याघ्र और हाँथी के चित्र अंकित हैं।

5)आर्य लोग  विभिन्न प्रकार के अस्त्र शस्त्र का प्रयोग करते थे जबकि सिंधु घाटी सभ्यता से अस्त्र शस्त्र के प्रमाण नहीं मिले हैं।

6)आर्य लोग मूर्ति पूजक नही थे आर्य सिर्फ देवताओं का आह्वाहन करते थे न कि कोई मूर्ति बनाकर पूजा करते थे वहीं सैन्धव वासी मूर्ति पूजक थे ।

7) सैन्धव सभ्यता में मातृ देवी की उपासना होती थी जबकि ऋग्वैदिक काल मे मुख्यता पुरुष देवताओं को यज्ञ के समय आह्वान किया जाता था।

8)सैन्धव सभ्यता की मुद्राओं में अंकित लिपि से ज्ञात होता है कि सैन्धव वासी लिखना पढ़ना जानते थे। जबकि ऋग्वैदिक सभ्यता में लिपि का विकास नहीं हुआ था ,गुरु शिष्य परंपरा में विद्यार्थी सूक्त ,श्लोक को रटकर याद करते थे। वैदिक काल मे कोई लिपि का विकास नहीं हुआ था।


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