Court Mediator Kaise Bane: लॉ स्टूडेंट्स के लिए करियर गाइड

 

कोर्ट मीडिएटर (Mediator) कैसे बनें: लॉ स्टूडेंट्स और जूनियर वकीलों के लिए एक बेहतरीन करियर विकल्प

​कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमूमन हर छात्र का ध्यान सीधे कोर्ट रूम प्रैक्टिस, कॉर्पोरेट जॉब या ज्यूडिशियरी (PCS-J) की तरफ जाता है। लेकिन आज के समय में कोर्ट रूम की भागदौड़ से अलग एक और बेहतरीन और सम्मानजनक करियर विकल्प तेजी से उभर रहा है—कोर्ट मीडिएटर (Court Mediator) या मध्यस्थ।

​यदि आप भी एक लॉ स्टूडेंट हैं या वकालत के शुरुआती दौर में हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है। आइए जानते हैं कि एक मीडिएटर बनने की पूरी प्रक्रिया क्या है और मीडिएशन सेंटर में असल में क्या काम होता है।


​मीडिएटर (Mediator) कौन होता है और इसका काम क्या है?

​जब अदालतों में मुकदमों का बोझ बढ़ने लगा, तो सरकार और न्यायपालिका ने ADR (Alternative Dispute Resolution) यानी वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ावा दिया। इसी के तहत Civil Procedure Code (CPC) के Section 89 के अंतर्गत कोर्ट्स को यह पावर दी गई कि वे आपसी सहमति वाले मामलों को 'मीडिएशन' (मध्यस्थता) के लिए भेज सकें।

​मीडिएशन सेंटर में बैठने वाले अधिकारी को मीडिएटर कहा जाता है। इनका काम कोर्ट की तरह किसी एक के पक्ष में फैसला सुनाना या सजा देना नहीं होता। इनका मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों को एक साथ और अलग-अलग बिठाकर सुनना, उनकी गलतफहमियां दूर करना और उन्हें एक ऐसे बीच के रास्ते (Settlement) पर लाना होता है जिससे दोनों पक्ष राजी हों।

​मीडिएटर को मुख्य रूप से क्या करना होता है?

  • दोनों पक्षों की काउंसलिंग: कोर्ट रूम के तनावपूर्ण माहौल से दूर, शांत कमरे में दोनों पक्षों की बात सुनना।
  • प्राइवेट कॉकस (Private Caucus): कई बार दोनों पक्ष एक-दूसरे के सामने खुलकर बात नहीं कर पाते। ऐसे में मीडिएटर दोनों से अलग-अलग अकेले में बात करके उनकी वास्तविक समस्या को समझता है।
  • सेटेलमेंट एग्रीमेंट तैयार करना: जब दोनों पक्ष किसी बात पर सहमत हो जाते हैं, तो मीडिएटर एक कानूनी 'Settlement Agreement' तैयार करता है, जिस पर दोनों के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद कोर्ट इसी समझौते के आधार पर केस को हमेशा के लिए खत्म कर देता है।

​मीडिएशन सेंटर में कौन बैठता है? क्या वहां वकीली होती है?

  • कौन बैठता है? मीडिएशन सेंटर में जज नहीं बैठते। वहाँ कोर्ट द्वारा अधिकृत अनुभवी वकील या रिटायर्ड जज ही 'मीडिएटर' के रूप में बैठते हैं।
  • क्या वहां जिरह या बहस होती है? बिल्कुल नहीं। कोर्ट रूम की तरह वहाँ तीखी बहस, गवाहियां या सबूतों का प्रदर्शन नहीं होता। माहौल पूरी तरह दोस्ताना और गोपनीय (Confidential) होता है। दोनों पक्षों के वकील उनके साथ आ सकते हैं, लेकिन उनका काम विवाद बढ़ाना नहीं बल्कि समझौता कराने में मदद करना होता है।

​कोर्ट पैनल में मीडिएटर कैसे बनें? (स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस)

​यदि आप कोर्ट के आधिकारिक मीडिएटर बनना चाहते हैं, तो इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

​स्टेप 1: पात्रता और अनुभव (Eligibility)

​आमतौर पर कोर्ट के पैनल में शामिल होने के लिए वकील के रूप में कुछ सालों का एक्टिव प्रैक्टिस अनुभव मांगा जाता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों के हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार इसमें थोड़ा बदलाव हो सकता है।

​स्टेप 2: DLSA या हाईकोर्ट के नोटिफिकेशन पर नजर रखें

​हर जिला अदालत में DLSA (District Legal Services Authority) यानी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का ऑफिस होता है। जब भी कोर्ट को मीडिएटर्स की आवश्यकता होती है, तो DLSA या संबंधित हाईकोर्ट की MCPC (Mediation and Conciliation Project Committee) द्वारा आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया जाता है।

​स्टेप 3: 40 घंटे की अनिवार्य ट्रेनिंग (Mediation Training)

​शॉर्टलिस्ट होने के बाद आपको कोर्ट की तरफ से 40 घंटे की विशेष मध्यस्थता ट्रेनिंग दी जाती है। इस ट्रेनिंग में आपको मनोविज्ञान, बातचीत करने के तरीके (Negotiation Skills) और विवाद सुलझाने की कानूनी बारीकियां सिखाई जाती हैं।

​स्टेप 4: पैनल में शामिल होना

​ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद आपको सर्टिफिकेट मिलता है और आपका नाम जिला अदालत या हाईकोर्ट के 'मीडिएटर पैनल' में शामिल कर लिया जाता है। इसके बाद जज साहब खुद मामलों को आपके पास रेफर करना शुरू कर देते हैं।

​कमाई कैसे होती है? क्या सैलरी मिलती है?

​मीडिएटर को कोई फिक्स मंथली सैलरी नहीं मिलती। यह एक स्वतंत्र और सम्मानजनक काम है जहाँ आपको प्रति केस के हिसाब से मानदेय (Honorarium) मिलता है।

  • ​हर एक सफल समझौते (Successful Mediation) पर कोर्ट द्वारा तय की गई एक निश्चित राशि (जो राज्यों के अनुसार 3,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है) सीधे मीडिएटर के खाते में ट्रांसफर की जाती है।
  • ​यदि प्रयास के बाद भी समझौता नहीं हो पाता, तो भी की गई सिटिंग्स (Sittings) के हिसाब से कुछ मेहनताना दिया जाता है।

​निष्कर्ष: लॉ के छात्रों के लिए यह क्यों बेहतरीन है?

​अगर आप पारंपरिक कोर्ट रूम की अंतहीन तारीखों और मुकदमेबाजी से बचना चाहते हैं, तो मीडिएशन एक बेहतरीन और उभरता हुआ क्षेत्र है। विशेषकर पारिवारिक विवादों (Family Disputes) और कमर्शियल मामलों (Commercial Disputes) में अब कोर्ट जाने से पहले मीडिएशन को अनिवार्य और प्राथमिकता दी जा रही है।

​एक लॉ स्टूडेंट या जूनियर वकील के तौर पर आपको अभी से अपने ड्राफ्टिंग स्किल्स और बातचीत की कला (Communication Skills) पर काम करना चाहिए, ताकि आगे चलकर आप एक सफल मीडिएटर के रूप में अपनी पहचान बना सकें।

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