पीसी एंड पीएनडीटी (PC-PNDT) एक्ट, 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और घटते लिंगानुपात को सुधारने के लिए बनाया गया है। इस कानून के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
- लिंग चयन पर पूर्ण प्रतिबंध: गर्भाधान से पहले या बाद में किसी भी तकनीक (जैसे IVF या अल्ट्रासाउंड) के जरिए बच्चे का लिंग चुनने या उसका पता लगाने पर पूरी तरह रोक है।
- अल्ट्रासाउंड केंद्रों का पंजीकरण: सभी आनुवंशिक प्रयोगशालाओं, क्लीनिकों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लिए सरकार के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- विज्ञापनों पर रोक: लिंग चयन या लिंग निर्धारण से जुड़े किसी भी प्रकार के विज्ञापन (ऑनलाइन या ऑफलाइन) को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
- कड़े दंड का प्रावधान: कानून का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों, लैब कर्मियों या ऐसा करवाने वाले परिजनों को भारी जुर्माने के साथ 3 से 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
यह कानून केवल चिकित्सा और शोध के उद्देश्यों (जैसे आनुवंशिक विकारों का पता लगाने) के लिए ही प्रसव पूर्व परीक्षणों की अनुमति देता है।
पीसी एंड पीएनडीटी (PC-PNDT) एक्ट, 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और घटते लिंगानुपात को सुधारने के लिए बनाया गया है। इस कानून के मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
- लिंग चयन पर पूर्ण प्रतिबंध: गर्भाधान से पहले या बाद में किसी भी तकनीक (जैसे IVF या अल्ट्रासाउंड) के जरिए बच्चे का लिंग चुनने या उसका पता लगाने पर पूरी तरह रोक है।
- अल्ट्रासाउंड केंद्रों का पंजीकरण: सभी आनुवंशिक प्रयोगशालाओं, क्लीनिकों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लिए सरकार के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- विज्ञापनों पर रोक: लिंग चयन या लिंग निर्धारण से जुड़े किसी भी प्रकार के विज्ञापन (ऑनलाइन या ऑफलाइन) को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
- कड़े दंड का प्रावधान: कानून का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों, लैब कर्मियों या ऐसा करवाने वाले परिजनों को भारी जुर्माने के साथ 3 से 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
यह कानून केवल चिकित्सा और शोध के उद्देश्यों (जैसे आनुवंशिक विकारों का पता लगाने) के लिए ही प्रसव पूर्व परीक्षणों की अनुमति देता है।
graph TD
A[PC-PNDT Act 1994] --> B[महत्वपूर्ण धाराएं / Sections]
A --> C[मुख्य कानूनी पाबंदियां]
A --> D[सजा के प्रावधान]
B --> B1[धारा 3: बिना रजिस्ट्रेशन तकनीक पर रोक]
B --> B2[धारा 4: केवल गंभीर बीमारी में टेस्ट की इजाजत]
B --> B3[धारा 5: मरीज की लिखित सहमति अनिवार्य]
B --> B4[धारा 6: लिंग निर्धारण पर पूर्ण प्रतिबंध]
B --> B5[धारा 22: विज्ञापनों पर रोक]
C --> C1[गर्भधारण से पहले/बाद लिंग चयन]
C --> C2[बिना अनुमति अल्ट्रासाउंड मशीन रखना]
C --> C3[मशीन का व्यावसायिक उपयोग बिना रिकॉर्ड के]
D --> D1[डॉक्टर/लैब के लिए: 3-5 साल जेल + ₹10K-50K जुर्माना]
D --> D2[परिजनों/कराने वाले के लिए: 3-5 साल जेल + ₹50K-1L जुर्माना]
महत्वपूर्ण धाराएं और कानूनी निचोड़
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कानून में क्या लिखा है (प्रावधान) |
व्यावहारिक महत्व (लोग क्या सर्च करते हैं) |
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|---|---|---|
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धारा 3 |
बिना सरकारी रजिस्ट्रेशन के कोई भी आनुवंशिक क्लिनिक, प्रयोगशाला या अल्ट्रासाउंड सेंटर नहीं चल सकता। |
अवैध रूप से चल रहे सेंटर्स को सील करने का आधार। |
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धारा 4 |
प्रसव पूर्व निदान तकनीक का उपयोग केवल गंभीर आनुवंशिक विकारों या जन्मजात विकृतियों का पता लगाने के लिए ही हो सकता है। |
यह तय करता है कि टेस्ट कब वैध है और कब अवैध। |
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धारा 5 |
टेस्ट से पहले गर्भवती महिला को इसके प्रभाव समझाना और उसकी लिखित सहमति (Form G) लेना अनिवार्य है। |
अस्पतालों के लिए कागजी कार्रवाई और कानूनी सुरक्षा का मुख्य हिस्सा। |
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धारा 6 |
किसी भी स्थिति में, किसी भी व्यक्ति (डॉक्टर या अन्य) द्वारा गर्भस्थ शिशु के लिंग का पता लगाना या बताना पूरी तरह प्रतिबंधित है। |
कानून की सबसे मुख्य धारा, जो लिंग जांच को अपराध बनाती है। |
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धारा 22 |
इंटरनेट, प्रिंट या किसी भी माध्यम से लिंग चयन सेवाओं का विज्ञापन करना अपराध है। |
ऑनलाइन सर्च या विज्ञापनों पर रोक लगाने के लिए। |
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धारा 23 |
इस कानून के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने पर सजा तय करती है। |
कोर्ट में केस दर्ज होने पर इसी धारा के तहत कार्रवाई होती है। |
अपराध और सजा के प्रावधान (Penalties)
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पहली बार दोषी पाए जाने पर:
- डॉक्टर/लैब कर्मी के लिए: 3 साल तक की जेल और ₹10,000 तक का जुर्माना। साथ ही, मेडिकल काउंसिल से उनका लाइसेंस हमेशा के लिए या कुछ समय के लिए निलंबित हो सकता है।
- परिजनों/मरीज के लिए (जो लिंग जांच करवाते हैं): 3 साल तक की जेल और ₹50,000 तक का जुर्माना।
- दूसरी या अगली बार दोषी पाए जाने पर:
- डॉक्टर और परिजन दोनों के लिए: 5 साल तक की जेल और ₹1,00,000 तक का भारी जुर्माना।
महत्वपूर्ण नोट: इस कानून के तहत सभी अपराध गैर-जमानती (Non-Bailable) और संज्ञेय (Cognizable) होते हैं, यानी पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।
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